सिंध में इवैक्यूई ट्रस्ट संपत्तियों के प्रशासन के लिए DC नियुक्त करने का अल्पसंख्यक नेताओं ने किया विरोध

सिंध में इवैक्यूई ट्रस्ट संपत्तियों के प्रशासन के लिए DC नियुक्त करने का अल्पसंख्यक नेताओं ने किया विरोध

PSGPC और हिंदू मंदिर प्रबंधन समिति के प्रतिनिधियों ने ETPB का संघीय दर्जा बरकरार रखने की मांग की

लाहौर — नज़राना टाइम्स

पाकिस्तान के सिख और हिंदू समुदाय के नेताओं ने सिंध सरकार द्वारा इवैक्यूई ट्रस्ट संपत्तियों के प्रशासन के लिए डिप्टी कमिश्नरों (DCs) को प्रशासक नियुक्त करने के फैसले पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस कदम से इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) के संघीय दर्जे और अधिकारों पर असर पड़ सकता है।
बुधवार को लाहौर प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (PSGPC), हिंदू मंदिर प्रबंधन समिति और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधियों ने मांग की कि ETPB का संघीय स्वरूप बरकरार रखा जाए।
अल्पसंख्यक नेताओं ने कहा कि ऐतिहासिक गुरुद्वारों, मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों से जुड़ी इवैक्यूई ट्रस्ट संपत्तियों का प्रबंधन राष्ट्रीय स्तर पर होना चाहिए और इन्हें अलग-अलग प्रांतीय प्रशासनिक व्यवस्थाओं के अधीन नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने 1950 के नेहरू-लियाकत समझौते और 1955 के पंत-मिर्जा समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों की धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा और उनके समान प्रशासन के लिए संघीय व्यवस्था महत्वपूर्ण है।

कानूनी और संवैधानिक आपत्तियां

अल्पसंख्यक नेताओं ने सिंध इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टीज (मैनेजमेंट एंड डिस्पोजल) एक्ट 2019 पर भी आपत्ति जताई। उनका दावा है कि यह प्रांतीय कानून इवैक्यूई ट्रस्ट संपत्तियों से संबंधित मौजूदा संघीय कानूनी ढांचे के साथ टकराव पैदा करता है।
PSGPC के पूर्व अध्यक्ष सरदार बिशन सिंह ने कहा कि 18वें संविधान संशोधन के बाद इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड को प्रांतों के हवाले नहीं किया गया था।
उनके अनुसार, अनुच्छेद 270AA के तहत गठित इम्प्लीमेंटेशन कमेटी ने इस विषय को संघीय स्तर पर ही बरकरार रखा था। उन्होंने यह भी कहा कि 11 जनवरी 2012 को जारी एक अधिसूचना के जरिए बोर्ड को संबंधित संघीय मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में रखा गया था।
सरदार बिशन सिंह ने तर्क दिया कि जिन अधिकारों को संवैधानिक रूप से प्रांतों को हस्तांतरित नहीं किया गया है, उन्हें केवल प्रांतीय कानून बनाकर अपने अधिकार क्षेत्र में नहीं लिया जा सकता।

गुरुद्वारों, मंदिरों और धार्मिक यात्राओं के प्रबंधन पर असर की आशंका

अल्पसंख्यक नेताओं ने चेतावनी दी कि इवैक्यूई ट्रस्ट संपत्तियों के प्रबंधन में प्रांतीय हस्तक्षेप से गुरुद्वारों और मंदिरों के प्रशासन के साथ-साथ धार्मिक यात्राओं से जुड़ी व्यवस्थाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और अन्य देशों से पाकिस्तान आने वाले सिख और हिंदू श्रद्धालुओं की धार्मिक यात्राओं के प्रबंधन में ETPB महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसमें संघीय अधिकारियों, विदेश मंत्रालय और विदेशों में स्थित पाकिस्तानी राजनयिक मिशनों के साथ समन्वय भी शामिल है।
प्रतिनिधियों के अनुसार, ऐतिहासिक गुरुद्वारों, मंदिरों और अन्य अल्पसंख्यक धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, संरक्षण और बेहतर प्रबंधन के लिए एक समान संघीय प्रशासनिक व्यवस्था आवश्यक है।
उन्होंने आशंका जताई कि संघीय और प्रांतीय अधिकारों को लेकर पैदा होने वाला विवाद धार्मिक यात्राओं की व्यवस्था को प्रभावित करने के साथ-साथ अल्पसंख्यक समुदायों में उनकी धार्मिक विरासत की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर सकता है।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील

इस मुद्दे पर आवाज उठाने वालों में सरदार बिशन सिंह, सरदार जसकरण सिंह, सरदार प्रोफेसर डॉ. ममपाल सिंह, अमर नाथ रंधावा और अन्य सामुदायिक प्रतिनिधि शामिल थे।
उन्होंने संयुक्त रूप से राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री मुहम्मद शहबाज शरीफ, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, संघीय सरकार तथा धार्मिक मामलों एवं अंतरधार्मिक सद्भाव मंत्रालय से इस मामले का तत्काल संज्ञान लेने की अपील की।
अल्पसंख्यक नेताओं ने मांग की कि ETPB के कानूनी, संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकारों की रक्षा की जाए और इवैक्यूई ट्रस्ट संपत्तियों का प्रबंधन राष्ट्रीय स्तर पर एक समान ढांचे के तहत बरकरार रखा जाए।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि सिख और हिंदू धार्मिक विरासत के संरक्षण, अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों तथा अंतरधार्मिक सद्भाव के संबंध में पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि से भी जुड़ा हुआ है।

Ali Imran Chattha
Ali Imran Chattha
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