मोतीबाग में गूंजा जगन्नाथ महाप्रभु का जयघोष, आठवीं संध्या फेरी बनी प्रेम, भक्ति और उत्साह का अनुपम संगम

मोतीबाग में गूंजा जगन्नाथ महाप्रभु का जयघोष, आठवीं संध्या फेरी बनी प्रेम, भक्ति और उत्साह का अनुपम संगम

कपूरथला 8 जून गौरव मढिया 

श्री श्री जगन्नाथ रथ यात्रा महोत्सव 2026 के उपलक्ष्य में इस्कॉन मंदिर कपूरथला द्वारा आयोजित 45 दिव्य संध्या फेरियों की श्रृंखला के अंतर्गत मोतीबाग में निकाली गई आठवीं संध्या फेरी ने पूरे क्षेत्र को भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक उल्लास के रंग में सराबोर कर दिया। आगामी 19 जुलाई को सनातन धर्म सभा से भव्य रूप से निकलने वाली भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथ यात्रा के प्रति श्रद्धालुओं का उत्साह दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है और इसी उत्साह का अद्भुत दृश्य मोतीबाग की गलियों में देखने को मिला।
संध्या फेरी का शुभारंभ श्रद्धालु श्री रमन वधवा जी के निवास स्थान पर भगवान श्री जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी की प्रथम आरती के साथ हुआ। परिवारजनों ने अत्यंत श्रद्धा एवं प्रेमपूर्वक भगवान का स्वागत किया। अति सुंदर अलंकृत लघु रथ में विराजमान होकर भगवान श्री जगन्नाथ जी घर-घर अपने भक्तों को दर्शन देने पहुँचे। जैसे-जैसे पालकी आगे बढ़ती गई, वैसे-वैसे भक्तों का उत्साह और प्रेम उमड़ता गया।
मोतीबाग के श्रद्धालुओं ने भगवान की दिव्य आरतियाँ उतारकर अपने प्रेम को व्यक्त किया। अनेक भक्तों द्वारा भगवान को विविध प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन अर्पित किए गए जिनमें हलवा, पूड़ी, खीर, मिठाइयाँ तथा अनेक प्रकार के भोग प्रमुख रहे। तत्पश्चात इन प्रसादों का वितरण कर भक्तों ने भगवान की कृपा का आनंद प्राप्त किया।
पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा की गई। वातावरण में "जय जगन्नाथ", "हरे कृष्ण" और संकीर्तन की मधुर ध्वनियाँ गूंजती रहीं। इस्कॉन के भक्तों द्वारा किए जा रहे हृदयस्पर्शी हरिनाम संकीर्तन ने ऐसा आध्यात्मिक वातावरण निर्मित कर दिया कि उपस्थित श्रद्धालुओं को मानो वृंदावन धाम की अनुभूति होने लगी। मोतीबाग की गलियाँ प्रेम, भक्ति और आनंद से सराबोर होकर किसी दिव्य धाम का स्वरूप धारण करती प्रतीत हो रही थीं।
संध्या फेरी का समापन श्री तजिंदर गुप्ता जी एवं श्रीमती राधा गुप्ता जी के परिवार द्वारा आयोजित भव्य महाआरती के साथ हुआ। परिवार ने अपने निवास स्थान पर भगवान के लिए अत्यंत सुंदर वेदी सजाकर अपने घर को भगवान की सेवा से धन्य एवं कृतार्थ बनाया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहाँ उपस्थित हुए तथा सभी के लिए प्रेमपूर्वक भोजन एवं प्रसाद की सुंदर व्यवस्था की गई।
इस अवसर पर इस्कॉन मंदिर के संचालक नकुलदास प्रभुजी ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ अपनी विशाल एवं करुणामयी नेत्रों से समस्त दिशाओं में अपने भक्तों पर दृष्टि रखते हैं और उनकी छोटी-से-छोटी सेवा को भी प्रेमपूर्वक स्वीकार करते हैं। उन्होंने बताया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ब्रजवासियों और गोपियों के निष्कलंक प्रेम में पूर्णतः भावविभोर हो जाते हैं, तब वे जगन्नाथ स्वरूप में प्रकट होते हैं। यही कारण है कि भगवान जगन्नाथ प्रेम और करुणा के साक्षात स्वरूप माने जाते हैं।
प्रभुजी ने आगे कहा कि भगवान एवं माता लक्ष्मी भक्तों की तनिक मात्र सेवा से भी प्रसन्न होकर उन पर असीम कृपा बरसाते हैं। मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल भौतिक उपलब्धियाँ प्राप्त करना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति कर अपने जीवन को भगवद्भक्ति में समर्पित करना है। आध्यात्मिक जीवन ही हमारी वास्तविक यात्रा है, जो हमें परम लक्ष्य भगवद्धाम तक पहुँचाती है।
उन्होंने रथ यात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रथ की रस्सी खींचना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भगवान के साथ अपने संबंध को जोड़ने का दिव्य अवसर है। जब भक्त भगवान के रथ की रस्सी पकड़ते हैं, तब वास्तव में भगवान उनके जीवन की डोर अपने हाथों में ले लेते हैं और उन्हें संसार रूपी भवसागर से पार लगाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
प्रभुजी के मधुर एवं प्रेरणादायक वचनों ने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को भक्ति भाव से भर दिया और सभी भक्त प्रेम एवं आनंद में झूम उठे।
जगन्नाथ रथ यात्रा के उपलक्ष्य में निकाली जा रही इन दिव्य संध्या फेरियों के माध्यम से प्रतिदिन सैकड़ों-हजारों श्रद्धालु भक्ति की गंगा में स्नान कर रहे हैं। नगर का वातावरण निरंतर आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत होता जा रहा है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि वह दिन दूर नहीं जब संपूर्ण कपूरथला भगवान श्री जगन्नाथ के प्रेममय संदेश से आलोकित होकर वृंदावन भाव में रंग जाएगा और हर हृदय से केवल एक ही ध्वनि निकलेगी

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