भगवान श्री जगन्नाथ जी रथयात्रा महोत्सव की 44वीं संध्या फेरी मोहब्बत नगर में भक्तिभाव एवं हर्षोल्लास के साथ संपन्न

भगवान श्री जगन्नाथ जी रथयात्रा महोत्सव की 44वीं संध्या फेरी मोहब्बत नगर में भक्तिभाव एवं हर्षोल्लास के साथ संपन्न

कपूरथला, 14 जुलाई गौरव मढिया
भगवान श्री जगन्नाथ जी की 19 जुलाई को आयोजित होने वाली भव्य रथयात्रा महोत्सव के उपलक्ष्य में इस्कॉन मंदिर कपूरथला द्वारा निकाली जा रही 45 दिव्य संध्या फेरियों में से 44वीं संध्या फेरी मोहब्बत नगर में अत्यंत भव्य, भक्तिमय एवं हर्षोल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और भगवान श्री हरि के पवित्र नाम का संकीर्तन करते हुए संपूर्ण क्षेत्र को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।


इस्कॉन के भक्तों द्वारा भगवान श्री जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी की दिव्य पालकी को मोहब्बत नगर की प्रत्येक गली एवं प्रत्येक घर तक ले जाया गया, जहाँ भक्तों को भगवान के साक्षात मंगलमय दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। पूरे मार्ग में श्रद्धालु "हरे कृष्ण, हरे कृष्ण" महामंत्र का संकीर्तन करते हुए भगवान के साथ भाव-विभोर होकर नृत्य करते रहे।
संध्या फेरी का प्रथम आरती का सौभाग्य श्री अतुल गर्ग जी एवं उनके परिवार को प्राप्त हुआ। उनके निवास स्थान पर भगवान श्री जगन्नाथ जी को विराजमान कर अत्यंत श्रद्धा एवं प्रेम से विविध आरतियाँ उतारी गईं तथा स्वादिष्ट भोग अर्पित किया गया। तत्पश्चात भगवान को पुनः रथ पर विराजमान कर इस्कॉन के भक्तों द्वारा मधुर हरिनाम संकीर्तन प्रस्तुत किया गया, जिससे संपूर्ण वातावरण दिव्य आनंद से भर उठा।
जब भगवान श्री जगन्नाथ जी की पालकी मोहब्बत नगर की गलियों से होकर आगे बढ़ी, तब प्रत्येक घर से श्रद्धालुओं ने भगवान पर पुष्पवर्षा कर उनका भव्य स्वागत किया। वह दृश्य इतना अलौकिक एवं मनोहारी था कि ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं वैकुण्ठ धाम पृथ्वी पर अवतरित हो गया हो और वैकुण्ठवासी भगवान के साथ-साथ चल रहे हों। भगवान के पवित्र नाम की गूँज से प्रत्येक गली, प्रत्येक घर और प्रत्येक हृदय भक्तिरस एवं आध्यात्मिक आनंद से सराबोर हो उठा।


भगवान की पालकी अनेक भक्तों के घरों में दर्शन कराती हुई श्री रोहित गुप्ता जी के निवास स्थान पर पहुँची, जहाँ उनके माता-पिता एवं समस्त परिवार ने अत्यंत श्रद्धापूर्वक भगवान की आरती उतारकर उनका स्वागत किया। अनेक श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर भगवान के दुर्लभ एवं मंगलमय दर्शन प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य अनुभव किया।
इसके उपरांत भगवान श्री जगन्नाथ जी की पालकी श्री विक्की भुटानी जी एवं भुटानी परिवार के निवास स्थान पर पहुँची। भगवान के स्वागत में पूरे परिवार ने भव्य पुष्पवर्षा की तथा आकाश में आतिशबाज़ी कर अपने प्रेम एवं श्रद्धा की अभिव्यक्ति की। भगवान के प्रति परिवार के निष्कपट प्रेम एवं समर्पण को देखकर उपस्थित सभी भक्त भाव-विभोर हो उठे।
जैसे-जैसे भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा समीप आ रही है, वैसे-वैसे भक्तों का उत्साह भी निरंतर बढ़ता जा रहा है। 44वीं संध्या फेरी में अनेक भक्त भगवान के प्रेम में ऐसे सराबोर थे कि उन्हें न तो भीषण गर्मी का अनुभव हो रहा था और न ही भूख-प्यास की चिंता। सभी भक्त केवल भगवान के पवित्र नाम का संकीर्तन करते हुए आनंदपूर्वक नृत्य कर रहे थे।


भुटानी परिवार के निवास स्थान पर इस्कॉन के विशिष्ट वैष्णव एच.जी. नकुल प्रभु जी (नीरज अग्रवाल जी) ने अत्यंत मधुर हरिनाम संकीर्तन कराया तथा भगवान श्री जगन्नाथ जी की हृदयस्पर्शी एवं ज्ञानवर्धक कथा का श्रवण कराया। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में उन्होंने बताया कि भगवान श्री जगन्नाथ जी की विशाल एवं गोल-गोल आँखें इस बात का प्रतीक हैं कि उनकी कृपादृष्टि सभी दिशाओं में समान रूप से रहती है और कोई भी भक्त उनकी करुणा से वंचित नहीं रहता। उन्होंने यह भी बताया कि भगवान जगन्नाथ के स्वरूप में पलकें नहीं हैं, क्योंकि भगवान एक क्षण के लिए भी अपने भक्तों से दृष्टि नहीं हटाना चाहते। जिस प्रकार भक्त भगवान के दर्शन के लिए सदैव लालायित रहते हैं, उसी प्रकार भगवान भी अपने भक्तों के दर्शन के लिए उतने ही आतुर रहते हैं। यही भक्त और भगवान के मध्य दिव्य एवं निष्कपट प्रेम का अद्भुत संगम है, जिसका अनुभव भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा में सहज रूप से किया जा सकता है।
इस्कॉन मंदिर कपूरथला ने समस्त नगरवासियों से विनम्र आग्रह किया है कि वे 19 जुलाई को आयोजित होने वाली भगवान श्री जगन्नाथ जी की भव्य रथयात्रा में अपने परिवार सहित अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर भगवान के दर्शन, हरिनाम संकीर्तन एवं महाप्रसाद का लाभ प्राप्त करें तथा अपने जीवन को आध्यात्मिक आनंद एवं भगवान की असीम कृपा से धन्य बनाएं।

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