पुराना अस्पताल बना वृंदावन, 21वीं संध्या फेरी में उमड़ा भक्ति का सागर

पुराना अस्पताल बना वृंदावन, 21वीं संध्या फेरी में उमड़ा भक्ति का सागर

कपूरथला, 22 जून गौरव मढिया 
भगवान श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव (19 जुलाई) के उपलक्ष्य में इस्कॉन कपूरथला द्वारा आयोजित 45 दिव्य संध्या फेरियों की श्रृंखला के अंतर्गत कल 20 जून को 21वीं संध्या फेरी पुराना अस्पताल क्षेत्र में अत्यंत भव्यता, श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुई। भगवान श्री जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी की दिव्य पालकी और रथ की अलौकिक छटा देखते ही बन रही थी। भक्तों द्वारा सुगंधित पुष्पों से सुसज्जित भगवान की पालकी ऐसी प्रतीत हो रही थी मानो स्वयं वैकुण्ठ से कोई दिव्य विमान पृथ्वी पर अवतरित हुआ हो।

संध्या फेरी का शुभारम्भ प्रथम आरती यजमान श्री सुनील गुप्ता प्रभुजी एवं श्रीमती रेनू माता जी के निवास स्थान से हुआ। यजमान परिवार ने भगवान के लिए अत्यंत सुंदर श्रृंगार, भोग एवं प्रसाद की व्यवस्था कर भगवान का हृदयस्पर्शी स्वागत किया। मंगल आरती एवं हरिनाम संकीर्तन के मध्य भगवान श्री जगन्नाथ जी ने क्षेत्रवासियों को अपने दिव्य दर्शन प्रदान किए।

जैसे-जैसे मधुर हरिनाम संकीर्तन की ध्वनि पूरे क्षेत्र में गूंजती गई, वैसे-वैसे भक्तों का उत्साह भी बढ़ता गया। भगवान श्री जगन्नाथ जी पुराना अस्पताल क्षेत्र के घर-घर पधारे और प्रत्येक परिवार ने दीप, धूप एवं पुष्पों से उनकी आरती उतारकर उनका स्वागत किया। अनेक श्रद्धालुओं ने विविध प्रकार के भोग-प्रसाद अर्पित कर भगवान की कृपा प्राप्त की तथा प्रसाद वितरण द्वारा इस दिव्य उत्सव को और भी मंगलमय बनाया।

विशेष रूप से पुराना अस्पताल स्थित शिव मंदिर एवं हनुमान मंदिर में भी भगवान श्री जगन्नाथ जी की भव्य आरती की गई। संपूर्ण क्षेत्र हरिनाम संकीर्तन, नृत्य और जयघोषों से गूंज उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा पुराना अस्पताल क्षेत्र ही वृंदावन धाम में परिवर्तित हो गया हो। भगवान श्री जगन्नाथ अपनी करुणामयी विशाल नेत्रों से सभी भक्तों पर कृपादृष्टि बरसाते हुए आगे बढ़ते रहे और भक्त प्रेमपूर्वक उन्हें प्रत्येक घर में ले जाकर उनके दर्शन कराते रहे !

संध्या फेरी का समापन महा आरती यजमान श्रीमती सोनिया कुमार जी एवं उनके परिवार के निवास स्थान पर हुआ। परिवार द्वारा भगवान के लिए अत्यंत सुंदर वेदी तैयार की गई थी। भगवान को विधिवत विराजमान कर भव्य महाआरती संपन्न की गई। भक्तों ने नृत्य एवं संकीर्तन के साथ ऐसा आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया कि उपस्थित श्रद्धालुओं को वृंदावन की दिव्य अनुभूति होने लगी। यजमान परिवार द्वारा भक्तों के लिए स्वादिष्ट एवं प्रेमपूर्वक तैयार किया गया प्रसाद भी वितरित किया गया।

इस अवसर पर इस्कॉन कपूरथला के वरिष्ठ वैष्णव नकुल प्रभुजी ने उपस्थित भक्तों एवं क्षेत्रवासियों को भगवान जगन्नाथ रथयात्रा की मंगलमयी शुभकामनाएँ प्रदान करते हुए कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ कलियुग के सर्वाधिक पतित-पावन स्वरूप हैं। वे किसी की योग्यता अथवा अयोग्यता नहीं देखते, बल्कि अपनी अहैतुकी कृपा से प्रत्येक जीव को प्रेमभक्ति प्रदान करते हैं और उसके जीवन को मंगलमय बना देते हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा की दिव्य रस्सी को श्रद्धापूर्वक खींचने वाला भक्त महान आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करता है। जो भक्त भगवान को प्रेमपूर्वक भोग अर्पित करता है, भगवान उसके जीवन को कृपा, समृद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति से भर देते हैं। इसी प्रकार जो व्यक्ति भगवान के समक्ष हर्ष और प्रेम से नृत्य करता है, उसके जीवन के अनेक दुःख, क्लेश और मानसिक चिंताएँ भगवान की कृपा से दूर हो जाती हैं।

नकुल प्रभुजी ने समस्त शहरवासियों से विशेष निवेदन किया कि वे 19 जुलाई को आयोजित होने वाली भव्य भगवान श्री जगन्नाथ रथयात्रा में बढ़-चढ़कर भाग लें, तन-मन-धन से भगवान की सेवा में सहयोग करें तथा भगवान जगन्नाथ की असीम कृपा प्राप्त कर अपने जीवन को सफल बनाएं।

संपूर्ण कार्यक्रम हरिनाम संकीर्तन, भगवन्नाम के जयघोष और प्रसाद वितरण के साथ अत्यंत आनंदमय वातावरण में संपन्न हुआ। उपस्थित भक्तों का अनुभव था कि भगवान श्री जगन्नाथ स्वयं अपने भक्तों के मध्य पधारकर प्रेम, करुणा और भक्ति का अमृत वितरित कर रहे हैं।

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