एफसी जवान शब्बीर बलोच हत्या मामला: डॉ. महरंग बलोच समेत 4 BYC नेताओं को उम्रकैद
- इंटरनेशनल
- 22 Jun, 2026 01:19 PM (Asia/Kolkata)
क्वेटा, 22 जून: क्वेटा की आतंकवाद निरोधक अदालत (एटीसी) संख्या-1 ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) और उससे जुड़े संगठनों के चार नेताओं को फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) के जवान शब्बीर बलोच की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई।
अदालत ने BYC नेता डॉ. महरंग बलोच, सिबगतुल्लाह शाह, बलोच स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (BSO) के अध्यक्ष बलाच कादिर और कार्यकर्ता अबू बकर कलांची को दोषी ठहराते हुए कहा कि उन्होंने फरवरी 2024 में ग्वादर में एक भीड़ को उकसाया, जिसने ड्यूटी पर तैनात एफसी जवान शब्बीर बलोच की हत्या कर दी थी।
फैसला जिला जेल क्वेटा में स्थापित विशेष अदालत में सुनाया गया, जहां आरोपियों को वीडियो लिंक के माध्यम से पेश किया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब “राजी मुची” जुलूस के दौरान हालात हिंसक हो गए। सिबी निवासी 30 वर्षीय सिपाही शब्बीर बलोच सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात थे। आरोप है कि भीड़ ने उन्हें घेर लिया, उन पर पथराव किया और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने ड्रोन निगरानी फुटेज सहित कई साक्ष्य पेश किए। अदालत के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार फुटेज में आरोपियों को भीड़ का नेतृत्व करते और हमले को उकसाते हुए देखा गया। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार मृत जवान के शव के साथ मृत्यु के बाद भी कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया। इस हमले में 16 अन्य सुरक्षा कर्मी भी घायल हुए थे।
दो वर्षों से अधिक समय तक चले इस मुकदमे के दौरान कई कानूनी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां सामने आईं। प्रारंभ में ग्वादर में चल रही सुनवाई को बाद में क्वेटा स्थानांतरित कर दिया गया, क्योंकि संबंधित न्यायाधीश ने अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की थी।
अदालत ने कहा कि जब बचाव पक्ष ने वीडियो लिंक के माध्यम से गवाही पर आपत्ति जताई, तो गवाहों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का अवसर भी दिया गया। बाद में बचाव पक्ष ने न्यायाधीश के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दायर किया और कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। इसके बावजूद अदालत ने आरोपियों के निष्पक्ष बचाव के अधिकार की रक्षा के लिए सरकारी खर्च पर वकील उपलब्ध कराया।
सरकारी संस्थानों और कानूनी विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे कानून के शासन को मजबूत करने वाला निर्णय बताया है। अधिकारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण राजनीतिक विरोध प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सुरक्षा बलों पर हमला करने के लिए हिंसक भीड़ को संगठित करना आतंकवाद की श्रेणी में आता है।
डॉ. महरंग बलोच को मार्च 2025 में गिरफ्तार किया गया था और वह फैसले से पहले 15 महीने से अधिक समय तक हिरासत में रहीं। दोषी ठहराए गए सभी व्यक्तियों को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है।
Leave a Reply