77 साल बाद ऐतिहासिक गुरुद्वारा छठी पातशाही में फिर हुई अरदास
- इंटरनेशनल
- 07 Jul, 2026 12:15 PM (Asia/Kolkata)
विभाजन के बाद पहली बार संगत ने किया श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ, अवैध कब्जाधारियों से मुक्त हुआ गुरुद्वारा
लाहौर (अली इमरान चट्ठा):
पाकिस्तान के लाहौर शहर के किंची चुंगी अमरसदू क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक एवं पवित्र गुरुद्वारा छठी पातशाही में वर्ष 1947 के भारत-विभाजन के बाद पहली बार गुरबाणी की स्वर-लहरियां गूंजीं। यह ऐतिहासिक और भावुक क्षण पूरी सिख संगत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।
बीते दिन सिख संगत ने गुरुद्वारा साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन पाठ किया तथा गुरबाणी, नाम सिमरन और धार्मिक संगत का आयोजन किया। धार्मिक कार्यक्रम से पहले स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने गुरुद्वारा परिसर से अवैध कब्जाधारियों को हटाकर इसका कब्जा सिख समुदाय को सौंप दिया।

दशकों पुराने अवैध कब्जे से मिली मुक्ति
विभाजन के बाद यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा लंबे समय तक वीरान पड़ा रहा और धीरे-धीरे विभिन्न भूमि माफिया समूहों के अवैध कब्जे में चला गया। स्थानीय सिख समुदाय के नेता डॉ. गुलाब सिंह के नेतृत्व में जिला प्रशासन और पुलिस के सहयोग से इस पवित्र स्थल को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया।
डॉ. गुलाब सिंह ने इस अवसर पर इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के अतिरिक्त सचिव (श्राइंस) नसीर मुश्ताक तथा पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक प्रबंधक कमेटी (PSGPPC) के अध्यक्ष एवं पंजाब सरकार के अल्पसंख्यक मामलों और मानवाधिकार मंत्री सरदार रमेश सिंह अरोड़ा का विशेष आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि इन दोनों के निरंतर प्रयासों और प्रतिबद्धता के कारण ही यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा दोबारा सिख समुदाय को वापस मिल सका है।

विभाजन के बाद पहली धार्मिक सभा
77 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित इस पहले धार्मिक समागम में संगत ने अरदास की और गुरु साहिब के सेवा, मानवता, नाम सिमरन और गुरबाणी के संदेश पर चलने का संकल्प दोहराया।
ऐतिहासिक महत्व
इस पवित्र स्थल को वर्ष 1619 में छठे गुरु, श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के चरणों का स्पर्श प्राप्त हुआ था। बाद में महाराजा रणजीत सिंह ने यहां गुरुद्वारे का निर्माण करवाया, जबकि वर्ष 1922 में प्रसिद्ध समाजसेवी सर गंगा राम ने इसका जीर्णोद्धार और विस्तार कराया। यह गुरुद्वारा आज भी पाकिस्तान में सिख इतिहास और विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।

पुनर्स्थापना की अपील
डॉ. गुलाब सिंह ने पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ शरीफ का भी धन्यवाद करते हुए कहा कि उनकी सरकार गुरुद्वारों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने और उनके संरक्षण के लिए सराहनीय कार्य कर रही है।
उन्होंने सरकार से अपील की कि गुरुद्वारा छठी पातशाही का शीघ्र जीर्णोद्धार और पूर्ण पुनर्स्थापना की जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस पवित्र धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर से आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त कर सकें।
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