फारूकाबाद के ऐतिहासिक गुरुद्वारा सिंह सभा के कथित अवैध ध्वस्तीकरण के बाद पंजाब सरकार ने तत्काल पुनर्निर्माण के दिए आदेश
- इंटरनेशनल
- 01 Jul, 2026 03:18 PM (Asia/Kolkata)
लाहौर, 1 जुलाई (नज़राना टाइम्स):
पंजाब सरकार ने शेखूपुरा ज़िले के फारूकाबाद स्थित लगभग 80 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा सिंह सभा के कथित अवैध ध्वस्तीकरण का संज्ञान लेते हुए इसके तत्काल पुनर्निर्माण के आदेश जारी कर दिए हैं।
सिख समुदाय की शिकायतों के बाद पंजाब के मानवाधिकार एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सरदार रमेश सिंह अरोड़ा ने मौके का अचानक दौरा किया। उनके साथ शेखूपुरा के डिप्टी कमिश्नर, सहायक आयुक्त इमरान अली हरल, नगर समिति के मुख्य अधिकारी, औकाफ विभाग के अधिकारी, अन्य जिला प्रशासनिक अधिकारी तथा मीडिया प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने पुष्टि की कि गुरुद्वारे के पुनर्निर्माण का कार्य तुरंत शुरू किया जाएगा। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि जांच प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ पूरी की जाए तथा पुनर्निर्माण में किसी प्रकार की देरी न हो।
औकाफ विभाग की प्रारंभिक जांच के अनुसार, एक स्थानीय व्यवसायी ने संबंधित अधिकारियों से आवश्यक एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) प्राप्त किए बिना ही इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को ध्वस्त कर दिया। मंत्री ने इस कार्रवाई को कानून और धार्मिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति या संस्था को किसी धार्मिक स्थल को अवैध रूप से गिराने या उसमें बदलाव करने का अधिकार नहीं है।
सरदार रमेश सिंह अरोड़ा ने कहा कि पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ शरीफ़ ने पूरे प्रांत में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सभी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार धार्मिक विरासत और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उल्लंघन के प्रति शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रही है।
मंत्री ने औकाफ विभाग और जिला प्रशासन को मामले की विस्तृत एवं तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने बताया कि शुरुआती जानकारी के अनुसार संबंधित भूमि संभवतः औकाफ विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। इसलिए भूमि के स्वामित्व, कानूनी स्थिति और जिम्मेदारी का स्पष्ट निर्धारण आगे की कार्रवाई के लिए आवश्यक है।
इस बीच, इस मामले ने स्थानीय निवासियों और व्यापारियों के बीच भी चिंता पैदा कर दी है। उनका कहना है कि यह स्थान पिछले लगभग 80 वर्षों से उपयोग में नहीं था और इस दौरान यहां कई परिवार बस गए तथा अनेक छोटे-बड़े व्यवसाय स्थापित हो गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गुरुद्वारे का पुनर्निर्माण उसकी मूल स्थिति में किया गया, तो दर्जनों परिवारों को विस्थापित होना पड़ सकता है और उनकी आजीविका प्रभावित होगी। उन्होंने सरकार से अपील की है कि यदि किसी को हटाना आवश्यक हो, तो प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, वैकल्पिक आवास और पुनर्वास की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
सरकारी अधिकारियों ने इन चिंताओं को स्वीकार करते हुए कहा है कि सभी कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सिख समुदाय के धार्मिक अधिकारों और ऐतिहासिक विरासत की रक्षा करते हुए स्थानीय निवासियों को न्यूनतम कठिनाई का सामना करना पड़े।
फिलहाल इस मामले में तीन समानांतर प्रक्रियाएं चल रही हैं—कथित अवैध ध्वस्तीकरण की औपचारिक जांच, भूमि के स्वामित्व की कानूनी पुष्टि और गुरुद्वारे के पुनर्निर्माण की शुरुआत। यह मामला अब सरकार की धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और कानून के शासन के प्रति प्रतिबद्धता की एक महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है।
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