श्री चैतन्य महाप्रभु की भविष्यवाणी को साकार कर रहे हैं इस्कॉन कपूरथला के भक्त — सुल्तानपुर में 36वीं श्री जगन्नाथ संध्या फेरी बनी प्रेम, भक्ति और हरिनाम संकीर्तन का महासागर
- धार्मिक
- 06 Jul, 2026 01:09 PM (Asia/Kolkata)
कपूरथला 6 जुलाई गौरव मढिया
"पृथिवीते आछे यत नगरादि-ग्राम, सर्वत्र प्रचार होइबे मोर नाम।" — श्री चैतन्य महाप्रभु
अर्थात्— “इस पृथ्वी के जितने भी नगर और ग्राम हैं, उन सभी स्थानों पर मेरे पवित्र हरिनाम का प्रचार होगा।”
लगभग पाँच सौ वर्ष पूर्व श्री चैतन्य महाप्रभु ने जो दिव्य भविष्यवाणी की थी, आज वही भविष्यवाणी विश्वभर में साकार होती दिखाई दे रही है। परम पूज्य ए. सी. भक्तिवेदान्त स्वामी श्रील प्रभुपाद ने इस दिव्य संकल्प को विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाया, और उसी गौरवशाली मिशन को आगे बढ़ाते हुए इस्कॉन कपूरथला के भक्त इन दिनों भगवान श्री जगन्नाथ जी की 19 जुलाई, रविवार को आयोजित होने वाली चतुर्थ भव्य श्री जगन्नाथ रथयात्रा के उपलक्ष्य में प्रतिदिन नगर-नगर, गली-गली और घर-घर जाकर श्री जगन्नाथ संध्या फेरियों के माध्यम से हरिनाम संकीर्तन का दिव्य प्रचार कर रहे हैं।

यह केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रत्येक घर तक भगवान की करुणा, कृपा और प्रेम पहुँचाने का एक आध्यात्मिक अभियान है। प्रतिदिन भक्तगण अपने व्यक्तिगत कार्यों, आराम और सुविधाओं का त्याग कर घंटों तक हरिनाम संकीर्तन करते हुए भगवान श्री जगन्नाथ को लेकर नगर की गलियों में निकलते हैं, ताकि कोई भी परिवार भगवान के दर्शन और हरिनाम के अमृत से वंचित न रह जाए। यही वैष्णव जीवन की वास्तविक पहचान है—स्वयं सुखी होने के साथ-साथ प्रत्येक जीव को भगवान से जोड़ने का प्रयास।
इसी दिव्य श्रृंखला में गत दिवस 36वीं श्री जगन्नाथ संध्या फेरी का भव्य आयोजन सुल्तानपुर में अत्यंत श्रद्धा, प्रेम और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। जैसे ही भगवान श्री जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी का दिव्य विग्रह सुल्तानपुर की सीमा में पहुँचा, वैसे ही सम्पूर्ण क्षेत्र "हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे। हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे॥" के मधुर महामंत्र से गुंजायमान हो उठा।

सैकड़ों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं नीलाचल धाम का दिव्य वातावरण सुल्तानपुर में उतर आया हो। प्रत्येक गली में भगवान का स्वागत पुष्पवर्षा से किया गया। घर-घर के द्वारों को फूलों, रंगोलियों और दीपों से सजाया गया। माताएँ और बहनें आरती की थाल लेकर अपने आराध्य प्रभु के स्वागत में खड़ी थीं। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर वृद्धजनों तक प्रत्येक व्यक्ति भगवान के दिव्य दर्शन कर स्वयं को धन्य अनुभव कर रहा था।
विशेष बात यह रही कि भगवान श्री जगन्नाथ केवल एक स्थान पर विराजमान नहीं रहे, बल्कि भक्तों ने उन्हें प्रत्येक गली और प्रत्येक मोहल्ले तक पहुँचाया। जहाँ-जहाँ प्रभु के चरण पड़े, वहाँ-वहाँ हरिनाम संकीर्तन की मधुर ध्वनि ने वातावरण को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सम्पूर्ण सुल्तानपुर ब्रजवृन्दावन की पावन भूमि में परिवर्तित हो गया हो।
पूरी संध्या फेरी के दौरान नकुल दास प्रभु जी, जितेन्द्र प्रभु जी, मनीष प्रभु जी, संजीव वालिया प्रभु जी तथा अनेक वैष्णव भक्त मृदंग, करताल और हरिनाम संकीर्तन के साथ नृत्य करते हुए आगे बढ़ रहे थे। भक्तों का उत्साह देखकर नगरवासी भी स्वतः इस दिव्य कीर्तन में सम्मिलित होते चले गए। बच्चों, युवाओं, महिलाओं एवं बुज़ुर्गों ने भगवान के सम्मुख नृत्य कर अपने प्रेम को व्यक्त किया। अनेक स्थानों पर भक्तों ने भगवान को विविध प्रकार के स्वादिष्ट भोग अर्पित किए और पुष्पवर्षा कर अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।
सुल्तानपुर के भक्तों का उत्साह इतना अद्भुत था कि उपस्थित श्रद्धालुओं को ऐसा अनुभव हो रहा था मानो वहाँ केवल संध्या फेरी नहीं, बल्कि स्वयं भगवान श्री जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा ही निकल रही हो। भगवान के रथ के आगे जिस प्रकार भक्त प्रेम में विभोर होकर नृत्य करते हैं, ठीक उसी प्रकार सुल्तानपुर की गलियाँ भी प्रेम, भक्ति और हरिनाम के उल्लास से झूम उठीं।
इस्कॉन कपूरथला द्वारा संचालित भक्ति-वृक्ष कार्यक्रम के माध्यम से सुल्तानपुर में भी श्रीकृष्ण भक्ति का दिव्य विस्तार निरंतर हो रहा है। नकुल दास प्रभु जी के मार्गदर्शन में दीपक चावला प्रभु जी एवं उनकी धर्मपत्नी ऋतु चावला जी सहित अनेक स्थानीय भक्तों ने इस आयोजन को सफल बनाने में तन, मन और धन से उल्लेखनीय सेवा प्रदान की। उनके अथक प्रयासों के कारण भगवान श्री जगन्नाथ ने असंख्य परिवारों को उनके घरों पर ही दिव्य दर्शन प्रदान किए।
संध्या फेरी का समापन राम मंदिर में अत्यंत भावपूर्ण वातावरण में हुआ। वहाँ सभी श्रद्धालुओं ने भगवान श्री जगन्नाथ की भव्य आरती उतारी तथा अपने परिवार, समाज, राष्ट्र और समस्त मानवता के कल्याण की प्रार्थना की। इस अवसर पर नकुल दास प्रभु जी ने भगवान श्री जगन्नाथ के दिव्य प्राकट्य की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण कलियुग के जीवों पर विशेष कृपा करने के लिए श्री जगन्नाथ रूप में प्रकट हुए हैं, ताकि प्रत्येक व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के उनके दर्शन कर सके, उनका नाम ले सके और उनके प्रेम का अनुभव कर सके।
उन्होंने कहा कि भगवान की रथयात्रा और हरिनाम संकीर्तन किसी एक समुदाय या वर्ग के लिए नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानव समाज के कल्याण के लिए है। जब भगवान स्वयं अपने मंदिर से बाहर निकलकर प्रत्येक व्यक्ति के द्वार पर पहुँचते हैं, तब यह उनकी असीम करुणा का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को इस दुर्लभ अवसर का लाभ अवश्य उठाना चाहिए।

कार्यक्रम के पश्चात सुल्तानपुर के भक्तों द्वारा विशाल महाप्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान का प्रसाद ग्रहण कर स्वयं को सौभाग्यशाली अनुभव किया। पूरे वातावरण में "जय जगन्नाथ" और "हरे कृष्ण" के जयघोष निरंतर गूँजते रहे।
अंत में इस्कॉन कपूरथला की ओर से समस्त कपूरथला, सुल्तानपुर एवं आसपास के क्षेत्रों के निवासियों से विनम्र निवेदन किया गया कि वे 19 जुलाई, रविवार को आयोजित होने वाली चतुर्थ भव्य श्री जगन्नाथ रथयात्रा में अपने परिवार सहित अवश्य पधारें। भगवान श्री जगन्नाथ के दिव्य रथ की रस्सी को श्रद्धा और प्रेम से खींचना शास्त्रों में महान आध्यात्मिक सौभाग्य माना गया है। आइए, हम सभी इस दुर्लभ अवसर का लाभ उठाएँ, हरिनाम संकीर्तन में सम्मिलित हों, भगवान श्री जगन्नाथ के दर्शन करें और अपने जीवन को प्रेम, भक्ति एवं भगवान की कृपा से आलोकित करें।
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