देव स्नान पूर्णिमा पर बिमला एन्क्लेव बना "जगन्नाथ पुरी धाम"

देव स्नान पूर्णिमा पर बिमला एन्क्लेव बना "जगन्नाथ पुरी धाम"

भगवान श्री जगन्नाथ के दिव्य अभिषेक में उमड़ा भक्तिरस का महासागर

कपूरथला 30 जून गौरव मढिया 

"कलौ तद् हरिकीर्तनात्" — शास्त्रों में वर्णन है कि कलियुग में भगवान की प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन हरिनाम संकीर्तन एवं भगवत् सेवा है। इसी दिव्य संदेश को जन-जन तक पहुँचाने हेतु इस्कॉन श्री श्री राधा-श्यामसुंदर मंदिर, कपूरथला द्वारा आगामी 19 जुलाई को आयोजित होने वाली भव्य श्री जगन्नाथ रथयात्रा के उपलक्ष्य में निकाली जा रही 45 दिव्य संध्या फेरियों की श्रृंखला में 30वीं संध्या फेरी के दौरान देव स्नान पूर्णिमा महोत्सव बिमला एन्क्लेव में अत्यंत भव्य, अलौकिक एवं हृदयस्पर्शी वातावरण में सम्पन्न हुआ।

शास्त्रों में वर्णित है कि देव स्नान पूर्णिमा के पावन दिवस पर भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलदेव एवं माता सुभद्रा का श्रद्धापूर्वक अभिषेक करने वाला भक्त भगवान की विशेष कृपा का पात्र बनता है। भगवान स्वयं अपने भक्तों की प्रेममयी सेवा स्वीकार कर उन्हें शुद्ध प्रेमभक्ति प्रदान करते हैं तथा अंततः अपने दिव्य धाम की ओर अग्रसर करते हैं।

इस पावन अवसर पर संध्या फेरी का शुभारम्भ मेडिसिन बाज़ार परिवार (विशु जी के निवास स्थान) से प्रथम आरती के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान का पुष्पवर्षा, आरती एवं हरिनाम संकीर्तन के साथ भावपूर्ण स्वागत किया। इसके पश्चात भगवान श्री जगन्नाथ जी की दिव्य पालकी बिमला एन्क्लेव की गलियों में पहुँची, जहाँ प्रत्येक घर प्रभु के स्वागत के लिए उत्सुक दिखाई दे रहा था।

पूरे क्षेत्र का वातावरण "हरे कृष्ण, हरे कृष्ण" महामंत्र की मधुर ध्वनि से गुंजायमान हो उठा। बिमला एन्क्लेव की मातृशक्ति ने भगवान की स्तुतियों का मधुर गायन करते हुए सुंदर भक्तिमय नृत्य प्रस्तुत किया। चारों ओर पुष्पवर्षा हो रही थी, भक्त प्रेमविभोर होकर नृत्य कर रहे थे और ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं देवलोक पृथ्वी पर अवतरित हो गया हो। श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का ऐसा अद्भुत संगम उपस्थित जनसमूह को दिव्य आनंद से सराबोर कर रहा था

भक्त अपने साथ भगवान के अभिषेक हेतु दूध, दही, घृत, गंगाजल, पंचामृत, पंचरस तथा आम, अनानास, अमरूद, अनार, लीची सहित अनेक प्रकार के फल एवं मिट्टी के सुंदर कलश लेकर पहुँचे। प्रत्येक भक्त के मन में केवल एक ही भाव था—"आज हमें स्वयं भगवान श्री जगन्नाथ का स्नान कराने का दुर्लभ सौभाग्य प्राप्त हो।"

अंततः समस्त भक्तगण दीपक सलवान प्रभु जी, वीना सलवान माता जी एवं उनके परिवार के निवास स्थान पर एकत्रित हुए, जहाँ भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलदेव एवं माता सुभद्रा का अत्यंत भव्य स्वागत किया गया। हरिनाम संकीर्तन, मृदंग, करताल एवं भक्तों के प्रेममय नृत्य के मध्य भगवान को सिंहासन पर विराजमान किया गया।

इसके उपरांत इस्कॉन कपूरथला के संचालक श्रीमान नकुल दास प्रभु जी एवं विरजा देवी दासी माता जी के द्वारा भगवान का पंचामृत एवं पंचरस से दिव्य महाअभिषेक सम्पन्न हुआ। तत्पश्चात उपस्थित सभी भक्तों, सलवान परिवार, मेडिसिन बाज़ार परिवार एवं बिमला एन्क्लेव के निवासियों ने अत्यंत श्रद्धा एवं प्रेम के साथ भगवान का अभिषेक कर अपने जीवन को धन्य बनाया।

ऐसा अनुभव हो रहा था मानो आज बिमला एन्क्लेव स्वयं जगन्नाथ पुरी धाम में परिवर्तित हो गया हो। एक ओर भगवान के दिव्य स्नान दर्शन हो रहे थे, दूसरी ओर "जय जगन्नाथ" के जयघोष सम्पूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर रहे थे। अभिषेक के पश्चात भगवान का मनोहर श्रृंगार किया गया, भव्य आरती उतारी गई तथा विविध प्रकार के स्वादिष्ट भोग अर्पित किए गए।

भगवान श्री जगन्नाथ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के स्वामी हैं, फिर भी वे अपने भक्तों के प्रेम से बंधकर उनके घर-घर पधारते हैं। यही उनकी असीम करुणा है। शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान को किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं होती, वे केवल भक्त के निष्कपट प्रेम को स्वीकार करते हैं। जो भक्त श्रद्धा एवं प्रेम से उनकी सेवा करता है, भगवान उसके जीवन में आध्यात्मिक सुख, शांति, मंगल एवं भक्ति का प्रकाश प्रकट कर देते हैं।

इन दिव्य संध्या फेरियों के माध्यम से इस्कॉन के भक्त घर-घर जाकर भगवान श्री जगन्नाथ की कृपा का वितरण कर रहे हैं। यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि प्रत्येक हृदय को भगवान से जोड़ने का "प्रेम-यज्ञ" है, जिसमें हर परिवार को भगवान के सान्निध्य का दुर्लभ अवसर प्राप्त हो रहा है।

इस अवसर पर सलवान परिवार द्वारा समस्त भक्तों के लिए अत्यंत प्रेमपूर्वक महाप्रसाद की सुंदर व्यवस्था की गई। भगवान को भोग अर्पित करने के पश्चात सभी भक्तों ने महाप्रसाद ग्रहण किया तथा हरिनाम संकीर्तन में भावविभोर होकर भगवान के गुणों का कीर्तन किया।

अपने प्रेरणादायी संबोधन में श्री नकुल दास प्रभु जी ने कहा कि यह 45 दिनों का महायज्ञ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भगवान श्री जगन्नाथ के प्रेम को घर-घर पहुँचाने का दिव्य अभियान है। उन्होंने सभी शहरवासियों से आग्रह किया कि वे अपने परिवार सहित इन संध्या फेरियों में सम्मिलित होकर भगवान को अपने घर आमंत्रित करें, उनकी सेवा का सौभाग्य प्राप्त करें तथा अपने जीवन को भगवत्प्रेम से प्रकाशित करें।

उन्होंने सभी को आगामी 19 जुलाई को आयोजित होने वाली भव्य श्री जगन्नाथ रथयात्रा में परिवार सहित पधारने का आग्रह करते हुए कहा कि जब स्वयं जगत के स्वामी भगवान श्री जगन्नाथ हमारे नगर में अपने रथ पर विराजमान होकर पधारेंगे, तब आइए हम सभी उनके रथ की पावन रस्सी को श्रद्धापूर्वक खींचें और साथ ही अपने हृदय रूपी वृन्दावन में भी भगवान को सदा-सर्वदा के लिए विराजमान करें।

आइए, इस दिव्य प्रेम-यात्रा का हिस्सा बनें। अपने घर भगवान श्री जगन्नाथ का स्वागत करें, हरिनाम संकीर्तन में सम्मिलित हों और उनके असीम प्रेम, कृपा एवं करुणा का अनुभव करें।

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