लाहौर प्रेस क्लब में पत्रकारों ने मनाया काला दिवस, पीईसीए, छंटनी और वेतन में देरी का विरोध
- इंटरनेशनल
- (Asia/Kolkata)
लाहौर (नज़राना टाइम्स): पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (पीएफयूजे) के देशव्यापी आह्वान पर पंजाब यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (पीयूजे) ने लाहौर प्रेस क्लब में काला दिवस मनाया। पत्रकारों ने 3 नवंबर 2007 को लगाए गए आपातकाल, इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम अधिनियम (पीईसीए), मीडिया संस्थानों में छंटनी और समय पर वेतन न मिलने के खिलाफ प्रदर्शन किया।
पत्रकारों ने प्रेस क्लब के भीतर विरोध शिविर लगाया, काले झंडे लहराए और प्रेस की स्वतंत्रता के समर्थन में नारे लगाए। उन्होंने पीईसीए और 2007 के आपातकाल के खिलाफ भी नारेबाजी की।
निर्वाचित नेतृत्व और विधानसभाओं पर भरोसा करने की अपील
पत्रकार संगठनों के नेताओं ने देश के किसी भी हिस्से में आपातकाल लगाने को अलोकतांत्रिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि देश की समस्याओं के समाधान के लिए जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों और विधानसभाओं पर भरोसा किया जाना चाहिए। उन्होंने खैबर पख्तूनख्वा में आपातकालीन उपायों और राज्यपाल शासन को तत्काल हटाने की मांग भी की।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो लंबा मार्च करेंगे: अंसारी
पीएफयूजे के महासचिव और लाहौर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अरशद अंसारी ने कहा कि पाकिस्तान में पत्रकार बेहद कठिन परिस्थितियों में अपनी पेशेवर जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उन्होंने पीईसीए को ‘काला कानून’ बताते हुए दावा किया कि इसके तहत अब तक 500 से अधिक पत्रकारों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं।
अंसारी ने आरोप लगाया कि मीडिया मालिक समय पर वेतन और अन्य बकाया राशि का भुगतान नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जबरन बर्खास्तगी और छंटनी से कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार ने पत्रकारों की समस्याओं का समाधान नहीं किया तो बलूचिस्तान से कराची तक और मुल्तान से लाहौर होते हुए इस्लामाबाद तक लंबा मार्च निकाला जाएगा और संसद भवन का घेराव किया जाएगा।
पीयूजे ने सरकारी विज्ञापन खर्च की जांच मांगी
पीयूजे के अध्यक्ष नईम हनीफ और महासचिव कमरुज़्ज़मां भट्टी ने सरकार से मीडिया संस्थानों को दिए गए अरबों रुपये के विज्ञापनों के खर्च का ऑडिट कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि समय पर वेतन नहीं देने या कर्मचारियों की छंटनी करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और उनके सरकारी विज्ञापनों का भुगतान रोका जाए।
बड़ी संख्या में पत्रकार और संगठन पदाधिकारी हुए शामिल
अंसारी, हनीफ और भट्टी के अलावा प्रदर्शन में संघीय कार्यकारिणी परिषद के सदस्य शफीक अवान, इजाज़ मकबूल और राणा शफीक पसरूरी, पंजाब विधानसभा प्रेस गैलरी के अध्यक्ष ख्वाजा नसीर तथा पत्रकारों और मीडियाकर्मियों की सुरक्षा के लिए गठित संघीय आयोग की पंजाब प्रतिनिधि तमसीला चिश्ती शामिल हुईं।
लाहौर फोटो पत्रकार संघ के अध्यक्ष वसीम नियाज़ और महासचिव इमरान शेख, पीयूजे के पूर्व अध्यक्ष दीन मुहम्मद दर्द तथा वसीम फारूक शाहिद ने भी प्रदर्शन में भाग लिया।
प्रदर्शन में सत्तार खान, शेर अली खलाती, सलाहुद्दीन बट्ट, जाहिद आबिद, ज़ाहिर शहज़ाद, सालिक नवाज़, जवाद हसन गुल, जमाल अहमद, सैयद अतीक शाह, अरशद अली, आतिया ज़ैदी, अल्लाह रखा बट्ट, ए.आर. गुल, रियाज़ भट्टी, सदाकत मुगल, परवेज़ अल्ताफ, वसीम सरदार, मुहम्मद अली, आरिफ चौधरी, जावेद इकबाल, बाबर शाह, रुहेल अकबर, कैसर मुगल, महबूब आलम, कामरान मुगल, खालिद अमीन और मुहम्मद अली जट्ट शामिल थे।
तनवीर अहमद, महमूद शिराज़ी, इहतिज़ाज़ इब्राहीम, आतिफ खाकवानी, नदीम शेख, नियाज़ बालम, मोहसिन बिलाल, हामिद नवाज़, जावेद हाशमी, राणा शहज़ाद, शहज़ाद मलिक, राणा खालिद कमर, मुदस्सर खान, अरशद चौधरी, खालिद मंसूर, सैयद शाकिर अली शाह, कासिम अली, राणा नायाब, हारिस मरगूब और अन्य पत्रकारों ने भी काले झंडे लहराए और अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए।
Leave a Reply