पाकिस्तान ने संस्थागत पुनर्गठन के लिए डॉ. इशरत हुसैन की सिफारिशों को बनाया आधार: औरंगज़ेब

पाकिस्तान ने संस्थागत पुनर्गठन के लिए डॉ. इशरत हुसैन की सिफारिशों को बनाया आधार: औरंगज़ेब

इस्लामाबाद (नज़राना टाइम्स): पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगज़ेब ने मंगलवार को कहा कि सरकार ने स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पूर्व गवर्नर डॉ. इशरत हुसैन की संस्थागत सुधार संबंधी सिफारिशों को अपने पुनर्गठन कार्यक्रम का आधार बनाया है। उन्होंने कहा कि डॉ. हुसैन ने देश के बैंकिंग क्षेत्र में बड़े बदलाव लाने के साथ सरकारी कामकाज में व्यापक सुधारों की नींव भी रखी।

औरंगज़ेब सतत विकास नीति संस्थान (एसडीपीआई) की ओर से डॉ. हुसैन को आजीवन उपलब्धि पुरस्कार देने के लिए आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार पिछली सरकारों के शुरू किए गए काम को आगे बढ़ा रही है।

चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे सुधार

वित्त मंत्री ने बताया कि उन्होंने डॉ. हुसैन से सीधे संपर्क कर संस्थागत सुधारों पर उनकी रिपोर्ट मांगी थी। इसी रिपोर्ट को सरकार की पुनर्गठन योजना का आधार बनाया गया। उन्होंने कहा कि इस काम में बड़ी संख्या में मंत्रालय और उनसे जुड़े विभाग शामिल हैं। इसलिए सिफारिशों को एक साथ लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

स्टेट बैंक में छह वर्षों के सुधारों को किया याद

स्टेट बैंक के गवर्नर जमील अहमद ने पाकिस्तान के सामाजिक और आर्थिक विकास तथा वित्तीय क्षेत्र में डॉ. हुसैन के योगदान की सराहना की। दिसंबर 1999 में उनके साथ अपनी पहली पेशेवर मुलाकात को याद करते हुए अहमद ने कहा कि डॉ. हुसैन केंद्रीय बैंक में बदलाव की स्पष्ट सोच और एक महत्वाकांक्षी योजना के साथ आए थे। उनके अनुसार, अगले छह वर्षों में हुसैन ने दूरगामी सुधार लागू किए और यह दौर बैंक के इतिहास में सबसे व्यापक बदलावों वाले दौरों में से एक रहा।

पूर्व संघीय मंत्री और वाणिज्य सलाहकार अब्दुल रज़ाक दाऊद ने कहा कि यह पुरस्कार स्टेट बैंक में डॉ. हुसैन के काम को उचित पहचान देता है। हबीब बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष सुल्तान अली अल्लाना ने प्रशासनिक सेवा के उनके अनुभव और अंतरराष्ट्रीय वित्त में उनकी विशेषज्ञता का उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री की पूर्व सचिव नरगिस सेठी ने 2006 में गठित राष्ट्रीय सरकारी सुधार आयोग में डॉ. हुसैन की अध्यक्षता के दौरान उनके साथ काम करने का अनुभव साझा किया। बोस्टन यूनिवर्सिटी के पार्डी स्कूल ऑफ ग्लोबल स्टडीज़ के डीन एमेरिटस और प्रोफेसर डॉ. आदिल नजम ने कहा कि नीति निर्माता के रूप में हुसैन की उपलब्धियों पर अधिक ध्यान दिया जाता रहा है, जबकि उनके योगदान के दूसरे पहलुओं को अक्सर कम जगह मिली है।

बांग्लादेश के सलाहकार ने दक्षिण एशिया के लिए नया विकास मॉडल सुझाया

इससे पहले बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के वित्त और योजना सलाहकार राशेद अल महमूद तितुमीर ने बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने औद्योगिक बदलाव, क्षेत्रीय उत्पादन नेटवर्क, सम्मानजनक रोजगार और मजबूत सामाजिक सुरक्षा पर आधारित दक्षिण एशियाई विकास मॉडल का प्रस्ताव रखा।

तितुमीर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव से विकासशील देशों के औद्योगीकरण, रोजगार सृजन, घरेलू संसाधन जुटाने, विकास के लिए धन जुटाने और आर्थिक संप्रभुता की रक्षा करने के तरीके बदल रहे हैं। उन्होंने इन देशों से अपनी पारंपरिक विकास रणनीतियों पर पुनर्विचार करने और आर्थिक झटकों से निपटने की क्षमता बढ़ाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश अपनी भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाकर विनिर्माण केंद्र और निर्यात का प्रवेश द्वार बनना चाहता है।

अतिरिक्त कर्ज की जगह इक्विटी निवेश पर जोर

जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण समन्वय के संघीय मंत्री मुसद्दिक मलिक ने कहा कि पाकिस्तान अब विकास के लिए अतिरिक्त कर्ज पर निर्भर नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि देश इक्विटी निवेश और ऋण अदला-बदली के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, विकास न्यायसंगत और टिकाऊ होना चाहिए और उसकी दिशा पाकिस्तान की अपनी प्राथमिकताओं से तय होनी चाहिए।

मलिक ने कहा कि पाकिस्तान करीब 16 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये का राजस्व जुटाता है, जिसमें से लगभग आठ ट्रिलियन रुपये कर्ज और ब्याज की अदायगी पर खर्च होते हैं। उन्होंने इस खर्च को कुल राजस्व का करीब 48 से 49 प्रतिशत बताया।

युवाओं के लिए एक करोड़ डॉलर का ‘ग्रीन फील्ड’ कार्यक्रम

मलिक ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने में करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि स्नातक युवा बलोची, ब्राहुई, सिंधी और उर्दू जैसी भाषाओं में एआई प्रणालियों को प्रशिक्षित करने का काम कर सकते हैं।

उन्होंने वैज्ञानिक प्रयोगों और नए समाधानों पर काम करने वाले युवाओं को इक्विटी निवेश उपलब्ध कराने के लिए एक करोड़ डॉलर के ‘ग्रीन फील्ड’ कार्यक्रम की घोषणा की। इसकी पहली प्रतियोगिता तीन महीने के भीतर आयोजित करने की योजना है।

उद्घाटन सत्र को एसडीपीआई के कार्यकारी निदेशक आबिद कय्यूम सुलेरी, संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष शफकत काकाखेल और अल्लामा इकबाल ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति नासिर महमूद ने भी संबोधित किया। उन्होंने सतत विकास, क्षेत्रीय सहयोग और उभरती वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप विकास रणनीतियां बदलने की जरूरत पर जोर दिया। योजना, विकास और विशेष पहल के संघीय मंत्री अहसन इकबाल ने भी इस अवसर पर संबोधित किया।

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