नौलखा प्रेसबिटेरियन चर्च ने पेश की धार्मिक सहिष्णुता की मिसाल, रेवरेंड डॉ. मजीद एबल के नेतृत्व में मुहर्रम एकजुटता नाश्ते का आयोजन
- इंटरनेशनल
- 22 Jun, 2026 08:58 PM (Asia/Kolkata)
मुहर्रम जुलूसों और मजालिस के प्रतिभागियों के लिए विशेष नाश्ते का प्रबंध
आर्चबिशप डॉ. आज़ाद मार्शल, मौलाना आसिम मखदूम, मुफ्ती आशिक हुसैन समेत विभिन्न धर्मों के नेताओं की सहभागिता
लाहौर, 22 जून: मुहर्रम-उल-हराम के पवित्र महीने में शांति, आपसी सम्मान, धार्मिक सहिष्णुता और अंतरधार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नौलखा प्रेसबिटेरियन चर्च लाहौर ने रेवरेंड डॉ. मजीद एबल के नेतृत्व में “मुहर्रम सॉलिडेरिटी ब्रेकफास्ट” का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम में आर्चबिशप डॉ. आज़ाद मार्शल, कुल मसालिक बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना आसिम मखदूम, फादर जेम्स चन्नन, मुफ्ती आशिक हुसैन, पादरी खोखर, इमैनुअल परवेज भट्टी, मुफ्ती इंतिखाब नूरी, डॉ. बदर मुनीर, साजिद क्रिस्टोफर, अल्लामा असगर चिश्ती, प्रोफेसर सुहैल अहमद सहित बड़ी संख्या में शिया समुदाय के सदस्यों और विभिन्न विचारधाराओं एवं धार्मिक पृष्ठभूमियों से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेवरेंड डॉ. मजीद एबल ने कहा कि मुहर्रम धैर्य, त्याग, करुणा और मानवता का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न धर्मों के लोगों का शांति और भाईचारे के लिए एक मंच पर एकत्र होना इस बात का प्रमाण है कि पाकिस्तानी समाज आपसी सम्मान और सद्भाव के साथ आगे बढ़ना चाहता है। उन्होंने कहा कि मुहर्रम के दौरान शांति बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और इस प्रकार की पहल राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाती है।
आर्चबिशप डॉ. आज़ाद मार्शल और फादर जेम्स चन्नन ने कहा कि अंतरधार्मिक संवाद और सामुदायिक कार्यक्रम विभिन्न धर्मों के अनुयायियों के बीच विश्वास, सम्मान और प्रेम को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि “मुहर्रम सॉलिडेरिटी ब्रेकफास्ट” जैसे आयोजन सहिष्णुता और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मौलाना आसिम मखदूम और मुफ्ती आशिक हुसैन ने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन (र.अ.) की महान कुर्बानी पूरी मानवता को सत्य, न्याय, दृढ़ता और त्याग का शाश्वत संदेश देती है। उन्होंने सभी मसालिक और विचारधाराओं के अनुयायियों से मुहर्रम-उल-हराम के दौरान एकता, सहिष्णुता और भाईचारे को बढ़ावा देने की अपील की।
प्रोफेसर सुहैल अहमद ने पाकिस्तान में धार्मिक सद्भाव को मजबूत बनाने में धार्मिक विद्वानों, आस्था-नेताओं और सामाजिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
समारोह का समापन मुहर्रम-उल-हराम के दौरान शांति, स्थिरता, अंतरधार्मिक सद्भाव तथा एकता और भाईचारे के वातावरण के लिए विशेष प्रार्थनाओं के साथ हुआ।
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