भारत ने चुनिंदा विदेशी नागरिकों के लिए पासपोर्ट और वीज़ा नियमों में दी छूट, कुछ पाकिस्तानी भी शामिल

भारत ने चुनिंदा विदेशी नागरिकों के लिए पासपोर्ट और वीज़ा नियमों में दी छूट, कुछ पाकिस्तानी भी शामिल

नई दिल्ली, 7 नवंबर 2026 (नज़राना टाइम्स): भारत सरकार ने विदेशी नागरिकों की कुछ निर्धारित श्रेणियों के लिए पासपोर्ट, यात्रा दस्तावेज़ और वीज़ा संबंधी आवश्यकताओं में शर्तों के साथ छूट दी है। इनमें कुछ पाकिस्तानी निवासी, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के पात्र धार्मिक अल्पसंख्यक, पंजीकृत श्रीलंकाई तमिल और निर्धारित श्रेणियों के तिब्बती शामिल हैं।

सरकारी प्रसारक आकाशवाणी और भारतीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ये बदलाव आव्रजन और विदेशी (छूट) (संशोधन) आदेश, 2026 के तहत किए गए हैं। आदेश 5 नवंबर को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित हुआ। अलग-अलग श्रेणियों के लिए छूट का दायरा और शर्तें अलग हैं।

किन पाकिस्तानी नागरिकों को मिलेगी राहत?

आदेश में उन पाकिस्तानी नागरिकों के लिए प्रावधान है, जो भारत में स्थायी रूप से बसने के इरादे से 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले वैध पाकिस्तानी पासपोर्ट पर आए थे, लेकिन पाकिस्तान का कंप्यूटरीकृत पहचान पत्र नहीं होने के कारण अपना पासपोर्ट नवीनीकृत नहीं करा सके।

उन्हें भारत में रहने के लिए वैध पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेज़ रखने की आवश्यकता से छूट दी गई है। हालांकि, देश में रहना जारी रखने के लिए उपयुक्त श्रेणी का वीज़ा लेना आवश्यक है।

छह धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के लिए शर्तें

अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के वे लोग भी इन प्रावधानों के दायरे में हैं, जिन्हें धार्मिक उत्पीड़न या उसके डर के कारण भारत में शरण लेनी पड़ी और जो 31 दिसंबर 2024 या उससे पहले भारत आए थे।

इसमें बिना वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज़ों के आए पात्र लोग और वे व्यक्ति शामिल हैं, जिनके दस्तावेज़ों की वैधता बाद में समाप्त हो गई। उन्हें भी भारत में रहना जारी रखने के लिए उपयुक्त वीज़ा प्राप्त करना होगा।

श्रीलंकाई तमिलों और तिब्बतियों के लिए प्रावधान

9 जनवरी 2015 तक भारत में शरण ले चुके पंजीकृत श्रीलंकाई तमिल नागरिकों को निर्धारित पासपोर्ट और वीज़ा आवश्यकताओं से छूट वाली श्रेणी में रखा गया है। इसके लिए नामित अधिकारी के पास पंजीकरण की शर्त लागू है।

तिब्बतियों की पात्रता उनके भारत आने की तारीख, काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास से जारी प्रवेश परमिट या विशेष प्रवेश परमिट और लागू पंजीकरण आवश्यकताओं पर निर्भर करती है।

कुछ अन्य पुराने निवासियों के लिए भी राहत

आदेश में मूल रूप से भारतीय नागरिक रहे कुछ मुस्लिम पुरुषों के लिए अलग प्रावधान है, जो 15 अगस्त 1947 से 31 दिसंबर 1965 के बीच अपना परिवार भारत में छोड़कर पाकिस्तान गए थे और 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले लौटकर केरल में बस गए थे।

इस श्रेणी के लिए पारिवारिक परिस्थितियों, पाकिस्तान में संपत्ति और सुरक्षा जांच सहित अन्य निर्धारित शर्तें लागू हैं।

मलेशिया या सिंगापुर की नागरिकता लेने के बाद 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले भारत लौटे भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों को भी पासपोर्ट संबंधी राहत दी गई है। यह उन पात्र लोगों के लिए है जिनके पासपोर्ट की अवधि समाप्त हो चुकी है और निर्धारित कारणों से उनका नवीनीकरण नहीं हो रहा। इन श्रेणियों के लिए भी भारत में रहने हेतु उपयुक्त वीज़ा आवश्यक है।

सभी के लिए वीज़ा माफी या स्वतः नागरिकता नहीं

इन बदलावों का मतलब सभी पाकिस्तानी नागरिकों को बिना वीज़ा भारत आने की अनुमति देना नहीं है। छूट केवल निर्धारित प्रवेश तारीखों, दस्तावेज़ी परिस्थितियों और अन्य शर्तों को पूरा करने वाली श्रेणियों पर लागू होती है।

यह आदेश अपने आप भारतीय नागरिकता नहीं देता। विशेष रूप से संबंधित पाकिस्तानी निवासियों और धार्मिक अल्पसंख्यक श्रेणियों को दस्तावेज़ी राहत के बावजूद भारत में रहना जारी रखने के लिए उपयुक्त वीज़ा लेना होगा।

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