पाकिस्तान के विकास के लिए जनहितकारी सुधार, न्यायसंगत कर और सशक्त स्थानीय सरकारें जरूरी: नेता और अर्थशास्त्री

पाकिस्तान के विकास के लिए जनहितकारी सुधार, न्यायसंगत कर और सशक्त स्थानीय सरकारें जरूरी: नेता और अर्थशास्त्री

इस्लामाबाद (नज़राना टाइम्स): पाकिस्तान के वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं और आर्थिक विशेषज्ञों ने टिकाऊ तथा न्यायसंगत आर्थिक विकास के लिए जनहितकारी सुधारों, सशक्त स्थानीय सरकारों, न्यायसंगत कर व्यवस्था और शासन में बुनियादी बदलाव की मांग की है।

ये सुझाव सस्टेनेबल डेवलपमेंट पॉलिसी इंस्टीट्यूट (एसडीपीआई) के 29वें सतत विकास सम्मेलन के दौरान आयोजित उच्चस्तरीय संवाद “पाकिस्तान में विकास के लिए सुधार: प्राथमिकताओं से क्रियान्वयन तक” में सामने आए। प्रतिभागियों ने कराधान, सार्वजनिक खर्च, स्थानीय शासन, निर्यात और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता पर चर्चा की।

संवैधानिक शासन से शुरू हों सुधार

पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष मलिक मुहम्मद अहमद खान ने कहा कि सार्थक सुधारों की शुरुआत संविधान के पालन, कानून के शासन और निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों के सम्मान से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शासन में अनिश्चितता, राजनीतिक प्रतिशोध और जरूरत से अधिक नियमों ने निवेश को हतोत्साहित किया है, जबकि शिक्षा और सार्वजनिक सेवाएं उपेक्षित रही हैं।

नेशनल असेंबली की वित्त और राजस्व संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष सैयद नवीद कमर ने राजनीतिक सहमति और सार्थक परामर्श के साथ राजकोषीय अनुशासन अपनाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि खर्च के दबाव, ऋण अदायगी और सीमित कर आधार का समाधान अलग-अलग उपायों से नहीं किया जा सकता।

कमर ने सवाल उठाया कि संघ और प्रांतों से जुड़े मामलों में साझा हित परिषद का अधिक प्रभावी इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है।

प्रांतों से जिलों तक पहुंचें अधिकार और संसाधन

नेशनल असेंबली की निजीकरण संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष डॉ. फारूक सत्तार ने कहा कि 18वें संविधान संशोधन और राष्ट्रीय वित्त आयोग (एनएफसी) अवॉर्ड ने प्रांतों को मजबूत किया, लेकिन उसी अनुपात में अधिकार और संसाधन जिलों तक नहीं पहुंचे।

उन्होंने निर्वाचित और वित्तीय अधिकारों वाली स्थानीय सरकारों, जिलों के लिए पहले से स्पष्ट वित्तीय आवंटन और स्थानीय आर्थिक योजनाओं में अधिक भागीदारी की मांग की। उन्होंने प्रांतीय वित्त आयोगों की व्यवस्था के साथ एनएफसी के संवैधानिक दायरे में जिला वित्तपोषण पर विचार करने का सुझाव दिया।

सत्तार ने दीर्घकालीन, सर्वदलीय विकास सहमति और संभावित नई प्रशासनिक इकाइयों पर विचार करने की भी वकालत की।

शिक्षा, स्वास्थ्य और खर्च की गुणवत्ता महत्वपूर्ण

पूर्व वित्त मंत्री और अवाम पाकिस्तान पार्टी के महासचिव डॉ. मिफ्ताह इस्माइल ने कहा कि बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और प्रांतीय खर्च की गुणवत्ता आर्थिक विकास के लिए जरूरी हैं।

उन्होंने बिजली की स्थिर और खपत के अनुसार बदलने वाली लागत के ढांचे की समीक्षा करने की मांग की। इसमें अलग स्थिर शुल्क और खपत आधारित शुल्क वाली दो-भागीय दर पर विचार भी शामिल है।

इस्माइल ने कहा कि आईएमएफ पर निर्भरता से स्थायी रूप से बाहर निकलने के लिए आशावादी समयसीमाओं के बजाय राजकोषीय और बाहरी घाटे कम करने तथा निर्यात आय बढ़ाने की जरूरत है।

पूर्व संघीय मंत्री इंजीनियर खुर्रम दस्तगीर खान ने कहा कि गुजरांवाला जैसे औद्योगिक केंद्रों के निर्माता जटिल कर प्रशासन, महंगी बिजली और गैस तथा नियमों के पालन की लागत के कारण कारोबार बढ़ाने से हिचकिचाते हैं।

उन्होंने तकनीक, पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को आवश्यक सिद्धांत बताया तथा एकाधिकार वाली व्यवस्थाएं समाप्त करने की मांग की।

जिम्मेदारी, अधिकार और जवाबदेही साथ हों

पूर्व वित्त मंत्री असद उमर ने कहा कि घाटे कम किए और निर्यात में प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनाए बिना पाकिस्तान टिकाऊ विकास हासिल नहीं कर सकेगा और न ही बार-बार आईएमएफ कार्यक्रमों में जाने से बच पाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रभावी राज्य व्यवस्था आवश्यक है, लेकिन जिम्मेदारी, अधिकार और जवाबदेही एक साथ होनी चाहिए।

समुद्री मामलों के पूर्व संघीय मंत्री सैयद अली हैदर जैदी ने कहा कि कर दरें बढ़ाना सरकारी खर्च नियंत्रित करने और संस्थागत अक्षमताएं दूर करने का विकल्प नहीं है।

उन्होंने पुराने प्रशासनिक ढांचे में बदलाव, न्यायसंगत न्याय प्रणाली, मजबूत जवाबदेही और नागरिकों पर अधिक निवेश की मांग की।

करों का बोझ न्यायसंगत बनाने पर जोर

खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री के पूर्व वित्तीय सलाहकार मुजम्मिल असलम ने संपत्ति, कृषि और अन्य राजस्व श्रेणियों में कर छूट को कर संग्रह का आधार बढ़ाने में बाधा बताया।

प्रांतीय सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि खैबर पख्तूनख्वा का अपने स्रोतों से मिलने वाला राजस्व लगभग 65 अरब रुपये से बढ़कर 150 अरब रुपये हो गया। उनके मुताबिक, इस दौरान दरें घटाई गईं और लेन-देन को तेजी से डिजिटल बनाया गया।

पूर्व वित्त मंत्री प्रोफेसर डॉ. हाफिज अहमद पाशा ने व्यापक और प्रगतिशील कर सुधारों की मांग की। उन्होंने कहा कि वेतनभोगियों और बड़े विनिर्माण उद्योगों पर अनुपात से अधिक कर बोझ है, जबकि संपत्ति, खुदरा एवं थोक व्यापार और कृषि आय पर तुलनात्मक रूप से कम कर लगता है।

उन्होंने अनुमान लगाया कि अधिक न्यायसंगत कर आधार से जीडीपी के अतिरिक्त 3 से 3.5 प्रतिशत के बराबर राजस्व जुटाया जा सकता है। इससे विकास खर्च के लिए गुंजाइश बनेगी और उधारी की जरूरत घटेगी।

बजट और व्यापार घाटे को बताया मुख्य समस्या

सिंध के मुख्यमंत्री के पूर्व सलाहकार डॉ. कैसर बंगाली ने प्राथमिकताओं पर अलग दृष्टिकोण रखते हुए बजट घाटे, व्यापार घाटे और उन्हें पूरा करने के लिए लिए जाने वाले ऋण को पाकिस्तान की मुख्य आर्थिक समस्या बताया।

उन्होंने कहा कि खर्च राजस्व से अधिक तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने समान काम करने वाले संघीय मंत्रालयों और विभागों को समाप्त करने, गैर-विकास खर्च की समीक्षा और सरकारी उधारी घटाने की मांग की, ताकि कारोबारों के लिए ऋण की उपलब्धता प्रभावित न हो।

विकास संबंधी फैसलों में नागरिक भागीदारी बढ़े

पंजाब विधानसभा की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष अहमद इकबाल चौधरी ने कहा कि विकास पर चर्चा राष्ट्रीय आंकड़ों से आगे बढ़कर प्रांतों, शहरों और जिलों के प्रदर्शन तक पहुंचनी चाहिए।

उन्होंने प्रांतों से स्थानीय सरकारों को भरोसेमंद वित्तीय हस्तांतरण तथा स्थानीय विकास और सार्वजनिक सेवाओं के लिए अधिक जवाबदेही की मांग की। उन्होंने नागरिकों को उनकी रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े फैसलों से बाहर रखने वाली भागीदारी की कमी दूर करने पर भी जोर दिया।

पूर्व विशेष वित्त सचिव नूर मुहम्मद ने कहा कि सीमित वित्तीय संसाधनों पर सरकार की अत्यधिक मांग निजी निवेश के लिए उपलब्ध धन घटाती है।

उन्होंने कुछ सार्वजनिक खर्चों से कम लाभ मिलने, संस्थागत दोहराव और सिविल सेवा में सुधार की जरूरत का उल्लेख किया।

20 से 30 साल की साझा आर्थिक दिशा का सुझाव

पंजाब योजना एवं विकास बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सुलेमान गनी ने राजनीतिक दलों से आर्थिक शासन के लिए 20 से 30 साल की साझा दिशा पर सहमत होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सेवाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारियां नागरिकों के करीब लाई जानी चाहिए।

उन्होंने प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सेवाएं देने के लिए स्थानीय सरकारों को सक्षम बनाने तथा उसके अनुरूप निर्णय लेने के अधिकारों का पुनर्वितरण करने की वकालत की।

सिंध लोक सेवा आयोग के सदस्य अब्दुल गुफरान मेमन ने लंबे समय से लंबित ऑडिट आपत्तियों और लोक लेखा समितियों के जरिए उन पर आगे की कार्रवाई की कमजोरी का मुद्दा उठाया।

उन्होंने पुराने मामलों पर बिना समाधान चर्चा दोहराने के बजाय फैसले लेने, क्रियान्वयन के लिए बेहतर प्रोत्साहन व्यवस्था और प्रमुख कार्यक्रमों पर स्थायी राजनीतिक सहमति की मांग की।

नियामक सुधारों से कारोबार की वास्तविक लागत घटे

ओपीएम पाकिस्तान के टीम प्रमुख डॉ. वकार अहमद ने कहा कि कारोबारों को नियामक सुधारों का लाभ नियमों के पालन की घटी लागत के रूप में दिखना चाहिए।

उन्होंने मौजूदा नियमों की समीक्षा के दौरान नए और एक-दूसरे से मिलते-जुलते नियम बनाने पर अस्थायी रोक का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि नियामक संस्थाओं के वार्षिक आकलन में वित्तीय बचत का हिसाब दिया जाना चाहिए।

उन्होंने नए और आपस में न जुड़े डिजिटल पोर्टल शुरू करने से पहले संस्थाओं के बीच समन्वय सुनिश्चित करने की भी मांग की।

नागरिकों के नजरिये से परखे जाएं सुधार

वरिष्ठ पत्रकार फहद हुसैन ने सवाल उठाया कि मौजूदा व्यवस्था से लाभ लेने वाले राजनीतिक, प्रशासनिक, व्यावसायिक और मीडिया हितों के पास उसे बदलने की पर्याप्त प्रेरणा है या नहीं।

वरिष्ठ पत्रकार जेबुन्निसा बुर्की ने कहा कि सुधारों का मूल्यांकन केवल विकास दर के आंकड़ों या बुनियादी ढांचे की घोषणाओं से नहीं होना चाहिए। उन्हें नागरिकों की जरूरतों और उनके जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव के नजरिये से परखना आवश्यक है।

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