केंद्र के पत्र ने ‘आप’ सरकार की पोल खोली; मंडियों में फोटो खिंचवाने वाले विधायकों का सच सामने आया: ब्रह्मपुरा
- राजनीति
- 17 Apr, 2026 02:36 PM (Asia/Kolkata)
राकेश नायर
चोहला साहिब/तरनतारन, 17 अप्रैल
Shiromani Akali Dal के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और खडूर साहिब से पूर्व विधायक Ravinder Singh Brahmpura ने अहम सरकारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए पंजाब की Aam Aadmi Party सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंडियों में किसानों की फसल पड़ी हुई है, जबकि सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक कोई ठोस इंतजाम करने के बजाय केवल फोटो खिंचवाकर किसानों के जख्मों पर नमक छिड़क रहे हैं।
ब्रह्मपुरा ने कहा कि वास्तविकता यह है कि पंजाब सरकार ने गेहूं खरीद में छूट लेने के लिए कागजी प्रक्रिया बहुत देर से शुरू की। उन्होंने भारतीय खाद्य निगम (FCI) और केंद्र सरकार की चिट्ठियां सोशल मीडिया पर साझा करते हुए बताया कि पंजाब सरकार ने 9 अप्रैल को पत्र लिखा, एफसीआई पंजाब ने 16 अप्रैल को आगे भेजा और अंतिम मंजूरी 17 अप्रैल को मिली।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब 17 अप्रैल तक कोई आधिकारिक मंजूरी ही नहीं थी, तो सत्ताधारी विधायक मंडियों में जाकर किसानों को क्या भरोसा दे रहे थे? उन्होंने कहा कि इसी प्रशासनिक देरी के कारण पूरे पंजाब, विशेषकर खडूर साहिब क्षेत्र में किसान परेशान हुए।
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में मंडियों में एक स्थानीय विधायक को जिस विरोध का सामना करना पड़ा, वह सरकार की इसी विफलता का परिणाम है, क्योंकि बिना मंजूरी लिए विधायक केवल प्रचार के लिए मंडियों में घूम रहे थे।
एक और खुलासा करते हुए ब्रह्मपुरा ने बताया कि केंद्र सरकार ने गेहूं खरीद में छूट तो दे दी है — जिसमें 70% तक लस्टर लॉस और 15% तक सिकुड़े दानों की अनुमति दी गई है — लेकिन पत्र में स्पष्ट शर्त रखी गई है कि इससे होने वाला पूरा वित्तीय भार और संचालन खर्च पंजाब सरकार को ही उठाना होगा।
उन्होंने कहा कि इस पत्र ने पंजाब सरकार को आईना दिखा दिया है और उसकी जवाबदेही तय कर दी है।
ब्रह्मपुरा ने आगे कहा कि अब जब दस्तावेजों में स्थिति स्पष्ट हो चुकी है, तो ‘आप’ सरकार जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती। उन्होंने मांग की कि पंजाब सरकार तुरंत अपने खजाने से धन की व्यवस्था करे और किसानों की गेहूं बिना किसी कटौती के खरीदी जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों के भुगतान में एक भी रुपया काटा गया या मंडियों में उनकी परेशानी जारी रही, तो शिरोमणि अकाली दल किसानों के अधिकारों के लिए कड़ा आंदोलन करेगा।
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