भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा 19 जुलाई को, पूरा कपूरथला नगर हुआ भक्तिमय
- धार्मिक
- 16 Jun, 2026 03:02 PM (Asia/Kolkata)
कपूरथला 16 गौरव मढिया
श्री श्री जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी की पावन रथयात्रा 19 जुलाई को इस्कॉन मंदिर के तत्वावधान में कपूरथला नगर में भव्य रूप से निकाली जाएगी। रथयात्रा महोत्सव के उपलक्ष्य में भगवान जगन्नाथ स्वयं अपने भक्तों को दिव्य दर्शन प्रदान करने हेतु घर-घर पधार रहे हैं। नगर की गलियों, मोहल्लों और कॉलोनियों में हरिनाम संकीर्तन की मधुर ध्वनि गूंज रही है तथा सनातन धर्म का पावन ध्वज पूरे नगर में लहराता दिखाई दे रहा है।

भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए नगरवासियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। भक्तजन श्रद्धा एवं भक्ति के साथ भगवान का स्वागत कर रहे हैं और उनके दिव्य दर्शन प्राप्त कर स्वयं को धन्य अनुभव कर रहे हैं। कहा जाता है कि भगवान जगन्नाथ अपनी विशाल एवं गोल-गोल करुणामयी आँखों से प्रत्येक जीव पर कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं। वे अपने भक्तों के प्रेम, समर्पण और सेवा को सहर्ष स्वीकार करते हैं तथा उन्हें आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रदान करते हैं।
गत दिवस जरमणी दास पार्क में भव्य संध्या फेरी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तों ने हरिनाम संकीर्तन में भाग लेकर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया। महा आरती हैप्पी सेतिया माताजी के निवास स्थान पर अत्यंत श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न हुई। उपस्थित भक्तों ने हर्षोल्लास के साथ भगवान जगन्नाथ का स्वागत किया और दिव्य प्रसाद ग्रहण किया।

जरमणी दास पार्क में निवासरत खालसा बेटी के परिवार ने भी भगवान जगन्नाथ की विशेष आरती एवं सेवा का आयोजन किया। परिवार द्वारा भक्तों का प्रेमपूर्वक स्वागत किया गया। इस अवसर पर सभी ने भगवान जगन्नाथ की असीम कृपा का अनुभव किया और उनके श्रीचरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।
इस अवसर पर नकुलदास प्रभु जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान की निष्काम सेवा ही जीवन की वास्तविक सफलता है। उन्होंने बताया कि जब कोई व्यक्ति बिना किसी फल की इच्छा के भगवान की सेवा करता है, तब भगवान उसके हृदय को शुद्ध कर उसे जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होने का मार्ग प्रदान करते हैं। भगवान को हमारे धन, पद या प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं है; वे केवल निष्कपट प्रेम और समर्पण चाहते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि रथयात्रा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भगवान की करुणा का जीवंत संदेश है। जब भगवान स्वयं अपने मंदिर से निकलकर जन-जन के बीच आते हैं, तो यह संकेत होता है कि परमात्मा हर जीव को अपनी शरण में बुला रहे हैं। जो व्यक्ति भगवान के नाम का स्मरण करता है, हरिनाम संकीर्तन में भाग लेता है और भक्तों की संगति प्राप्त करता है, उसके जीवन में शांति, आनंद और आध्यात्मिक समृद्धि का उदय होता है।
हरिनाम संकीर्तन की मधुर ध्वनि से संपूर्ण नगर भक्तिरस में डूबा हुआ है। नगरवासियों से आग्रह किया गया है कि वे आगामी 19 जुलाई को आयोजित होने वाली भव्य श्री जगन्नाथ रथयात्रा में परिवार सहित सम्मिलित होकर भगवान के दिव्य दर्शन, हरिनाम संकीर्तन तथा महाप्रसाद का लाभ प्राप्त करें और अपने जीवन को आध्यात्मिक चेतना से आलोकित बनाएं।
Leave a Reply