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दौलत नई नई है

May 16, 2025 12:37 AM (Asia/Kolkata)

ख़मोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फ़त नई नई है अभी तकल्लुफ़ है गुफ़्तुगू में अभी मोहब्बत नई नई है अभी न आएगी नींद तुम को अभी न हम को सुकूँ मिलेगा

यह कविता आज से पचास साल पहले एक हकीम साहब ने कही थी, जो कवि भी थे।

Feb 24, 2025 05:34 PM (Asia/Kolkata)

यह कविता आज से पचास साल पहले एक हकीम साहब ने कही थी, जो कवि भी थे। जहां तक काम चलता हो ग़िज़ा से वहां तक चाहिए बचना दवा से अगर ख़ून कम बने, बलग़म ज्यादा तो खा

जर्मन कवि राजविंदर सिंह को साहित्यकारों ने दी श्रद्धांजलि ---- कंवर इकबाल सिंह

Jan 20, 2025 05:30 AM (Asia/Kolkata)

कपूरथला शहर में जन्में राजविंदर सिंह के परिवार और जर्मनी के एक राज्य कवि और लेखकों के एक प्रमुख संगठन के रूप में, विरसा विहार कपूरथला में राजविंदर सिंह