टंडो अल्लाहयार: दो हिंदू लड़कियों की उम्र का विवाद फिर अदालत में, मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार
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- (Asia/Kolkata)
कथित धर्म परिवर्तन और विवाह मामले में दोनों लड़कियां सुरक्षित गृह में; उम्र निर्धारण रिपोर्ट पर टिकी आगे की अदालती कार्यवाही
रिपोर्ट: अली इमरान चट्ठा
टंडो अल्लाहयार, सिंध (नज़राना टाइम्स): सिंध के टंडो अल्लाहयार की इब्राहिम कॉलोनी से जुड़ी दो हिंदू लड़कियों के कथित धर्म परिवर्तन और विवाह का मामला एक बार फिर अदालत के सामने है। दोनों लड़कियां फिलहाल सरकारी सुरक्षित गृह में हैं और उनकी उम्र निर्धारित करने वाली मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह रिपोर्ट मामले की आगे की कानूनी कार्यवाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
परिवारों की कानूनी टीम के अनुसार लड़कियों की पहचान सीता उर्फ तंजीना और रुपाई उर्फ दुआ के रूप में की गई है। परिवारों और उनके वकीलों का आरोप है कि लड़कियों का कथित तौर पर अपहरण किया गया, उनका धर्म परिवर्तन कराया गया और उस समय विवाह कराया गया जब वे नाबालिग थीं।
परिवारों का कहना है कि यदि उनकी उम्र से संबंधित दावा सही साबित होता है तो ये विवाह सिंध बाल विवाह निषेध कानून के तहत कानूनी सवालों के घेरे में आएंगे। हालांकि, इन आरोपों पर अभी अंतिम न्यायिक फैसला नहीं आया है।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
परिवारों की कानूनी टीम के अनुसार शिकायत मिलने के बाद एसएसपी टंडो अल्लाहयार ने मामले का संज्ञान लिया और पुलिस को कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
इसके बाद सिंध चाइल्ड मैरिज रिस्ट्रेंट एक्ट की धाराओं 3 और 4 के साथ अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। कानूनी टीम के मुताबिक पुलिस ने बाद में दोनों लड़कियों को बरामद किया और मामले में कथित रूप से शामिल पुरुषों को गिरफ्तार किया।
जन्म प्रमाणपत्र और बयानों में उम्र को लेकर विरोधाभास
जब लड़कियों को अदालत में पेश किया गया तो परिवारों के वकीलों ने उनके जन्म पंजीकरण प्रमाणपत्र पेश किए। वकीलों का दावा है कि इन दस्तावेजों के अनुसार दोनों लड़कियां नाबालिग हैं।
दूसरी ओर, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत पहले दर्ज किए गए बयानों में लड़कियों ने कथित तौर पर स्वयं को बालिग बताया था और उन पुरुषों के साथ रहने की इच्छा जताई थी जिन्हें उन्होंने अपना पति बताया।
उम्र को लेकर दस्तावेजों और दर्ज बयानों के बीच इस अंतर को देखते हुए अदालत ने मेडिकल माध्यम से उम्र निर्धारित करने के लिए जांच कराने का आदेश दिया।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मेडिकल रिपोर्ट आने तक दोनों लड़कियों को किसी भी पक्ष के हवाले करने के बजाय सुरक्षित गृह में रखा जाए।
परिवार के पास लौटने की इच्छा जताने का दावा
परिवारों की कानूनी टीम के अनुसार हाल की सुनवाई के दौरान दोनों लड़कियों ने अदालत के सामने अपने माता-पिता के पास लौटने की इच्छा जताई।
इसके बाद परिवारों के वकीलों ने अदालत से लड़कियों को उनके माता-पिता के सुपुर्द करने की मांग की। हालांकि, उम्र निर्धारण संबंधी मेडिकल रिपोर्ट अभी लंबित होने के कारण अदालत ने फिलहाल उन्हें परिवारों के हवाले करने का आदेश नहीं दिया और सुरक्षित गृह में रखने की व्यवस्था जारी रखी।
मामले को आगे की सुनवाई के लिए 9 सितंबर 2026 को सूचीबद्ध किया गया।
परिवारों के अनुसार उनकी कानूनी टीम में एडवोकेट विनोद जयपाल और एडवोकेट विक्रम राठौड़ शामिल हैं। कानूनी टीम का कहना है कि उसका उद्देश्य लड़कियों के अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित करना तथा कानून का उल्लंघन साबित होने की स्थिति में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता ने पारदर्शिता की मांग की
मानवाधिकार एवं अल्पसंख्यक अधिकार कार्यकर्ता चमन लाल ने लड़कियों को लगातार सुरक्षित गृह में रखे जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि यदि मेडिकल जांच और अन्य कानूनी साक्ष्यों के आधार पर लड़कियों की उम्र 18 वर्ष से कम साबित होती है तो उनकी नाबालिग स्थिति और सुरक्षा को पूरी कार्यवाही के दौरान प्रमुखता दी जानी चाहिए।
चमन लाल ने कहा कि यदि लड़कियों ने अदालत में अपने माता-पिता के पास वापस जाने की इच्छा जताई है तो उनके बयान को उचित तरीके से दर्ज किया जाना चाहिए और स्वतंत्र रूप से यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वह किसी दबाव, धमकी, प्रभाव या भय के बिना दिया गया है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षित गृह का उद्देश्य किसी कमजोर या जोखिम में पड़े व्यक्ति की सुरक्षा करना होना चाहिए और वहां ऐसी परिस्थितियां नहीं बननी चाहिए जिनमें कोई भी पक्ष उसके बयान को प्रभावित कर सके।
चमन लाल ने पूर्व के विवादित मामलों, जिनमें रिंकल कुमारी मामला भी शामिल है, का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वह मौजूदा मामले को किसी पुराने मामले के समान नहीं बता रहे और न ही पहले लगाए गए आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में पेश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि दोनों लड़कियां नाबालिग साबित होती हैं तो बाल विवाह से संबंधित कानून को बिना किसी भेदभाव के लागू किया जाना चाहिए।
उनके अनुसार यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी व्यक्ति ने जानते-बूझते गैरकानूनी बाल विवाह कराने में सहायता की, तो कानून के अनुसार उसकी भूमिका की भी जांच और जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने कथित अपहरण या दबाव के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि इन सवालों का फैसला किसी पक्ष की धारणा के बजाय सबूतों के आधार पर होना चाहिए।
कई महत्वपूर्ण सवाल अभी अनसुलझे
मामले में कई महत्वपूर्ण सवालों का जवाब अभी न्यायिक और जांच प्रक्रिया से सामने आना बाकी है। इनमें दोनों लड़कियों की कानूनी रूप से निर्धारित उम्र, विवाह के समय उनके नाबालिग होने या न होने, कथित धर्म परिवर्तन की परिस्थितियां, किसी प्रकार के दबाव या जबरदस्ती की संभावना और लड़कियों द्वारा दिए गए बयानों की स्वतंत्रता जैसे मुद्दे शामिल हैं।
ऐसे में अदालत द्वारा मांगी गई मेडिकल उम्र निर्धारण रिपोर्ट मामले की आगे की कार्यवाही के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
नोट: यह रिपोर्ट परिवारों की कानूनी टीम द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी और इस खबर के लिए किए गए साक्षात्कारों पर आधारित है। अपहरण, जबरदस्ती, धर्म परिवर्तन और गैरकानूनी बाल विवाह से संबंधित आरोपों को अदालत के अंतिम फैसले द्वारा अभी स्थापित तथ्य नहीं माना गया है। उपलब्ध जानकारी के समय मेडिकल उम्र निर्धारण रिपोर्ट भी लंबित थी।
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