जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने रमेश सिंह अरोड़ा से की मुलाकात, अल्पसंख्यक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता पर चर्चा
लाहौर (नज़राना टाइम्स): जर्मन दूतावास के एक प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सरदार रमेश सिंह अरोड़ा से मुलाकात की। बैठक में अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, अंतरधार्मिक सद्भाव और उनके सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों पर विस्तार से चर्चा हुई।
प्रतिनिधिमंडल में जर्मनी के धार्मिक स्वतंत्रता या आस्था संबंधी संघीय आयुक्त थॉमस राहेल और जर्मन संसद बुंडेस्टाग की विदेश मामलों की समिति के सदस्य डेविड ड्रुक्सन शामिल थे। जर्मन दूतावास के डिप्टी हेड ऑफ मिशन अर्नो किर्खहोफ और फर्स्ट सेक्रेटरी पॉलिटिकल वायलेटा कुज़मोवा-अनांग भी बैठक में मौजूद रहे।
जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने सरदार रमेश सिंह अरोड़ा की पंजाब के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के रूप में नियुक्ति का स्वागत किया और पाकिस्तान में एक सिख नेता की प्रांतीय मंत्री के रूप में नियुक्ति को ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बताया।
अरोड़ा ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ शरीफ के नेतृत्व में अल्पसंख्यक समुदायों का कल्याण, संरक्षण और सशक्तिकरण प्रांतीय सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों के समावेश और कल्याण के लिए एक व्यापक पांच वर्षीय रणनीतिक योजना पर काम किया जा रहा है।
माइनॉरिटी कार्ड योजना का लक्ष्य 10 लाख लोगों तक पहुंचना
रमेश सिंह अरोड़ा ने कहा कि माइनॉरिटी कार्ड योजना पंजाब सरकार की प्रमुख पहलों में शामिल है और इसे विस्तार देते हुए 10 लाख लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि अल्पसंख्यक समुदायों के लिए सरकारी विवाह-पंजीकरण लाइसेंस शुरू किए जा रहे हैं। इसके अलावा शैक्षणिक छात्रवृत्तियां, CSS परीक्षा की तैयारी के कार्यक्रम, धार्मिक त्योहारों के लिए अनुदान और बुनियादी ढांचे से जुड़ी विकास परियोजनाएं भी जारी हैं।
धार्मिक त्योहारों और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा
अरोड़ा ने कहा कि माइनॉरिटी वीक, क्रिसमस, दिवाली, होली और ईस्टर जैसे अवसरों को सम्मान और समावेश की भावना के साथ मनाया जा रहा है। उन्होंने क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।
गरीबी के मुद्दे पर बात करते हुए अरोड़ा ने कहा कि यह पाकिस्तान में एक बड़ी सामाजिक और आर्थिक चुनौती है, जो केवल अल्पसंख्यक समुदायों तक सीमित नहीं है बल्कि विभिन्न धार्मिक समुदायों के लोगों को प्रभावित करती है।
उन्होंने बताया कि अलग-अलग धर्मों के प्रतिनिधियों पर आधारित एक अंतरधार्मिक सद्भाव समिति भी पंजाब में सक्रिय रूप से काम कर रही है।
पंजाब-जर्मनी सहयोग पर भी चर्चा
बैठक में जर्मन सरकार, जर्मनी के विदेश कार्यालय और इस्लामाबाद में संबंधित संस्थानों के साथ मिलकर अंतरधार्मिक संवाद और आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
अरोड़ा ने बताया कि पंजाब के युवाओं को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से इन प्रयासों से जोड़ा जा रहा है। इनमें अंतरधार्मिक छात्र राजदूत कार्यक्रम भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों में भाग लेने वाले युवा अपनी सीख और अनुभव स्थानीय समुदायों, स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और धार्मिक शिक्षण संस्थानों के साथ साझा करेंगे।
इसके साथ ही प्रशिक्षित प्रतिभागियों को अंतरधार्मिक सद्भाव और संबंधित क्षेत्रों में काम करने वाले विशेषज्ञों के व्यापक नेटवर्क से जोड़ने का भी उद्देश्य है।
बैठक में अल्पसंख्यक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और अंतरधार्मिक सद्भाव से जुड़े क्षेत्रों में संवाद तथा संस्थागत सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
Posted By: Ali Imran Chattha