इमरान खान अस्पताल मामला: सुप्रीम कोर्ट ने FCC के अधिकार क्षेत्र पर उठाए सवाल
इस्लामाबाद (नज़राना टाइम्स): पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को अडियाला जेल से शिफा इंटरनेशनल अस्पताल स्थानांतरित करने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट (FCC) के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाए।
जस्टिस शाहिद वहीद की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें जस्टिस नईम अख्तर अफगान और जस्टिस इश्तियाक इब्राहिम भी शामिल थे, इमरान खान के इलाज और अदालत के पहले जारी निर्देशों के कथित अनुपालन न होने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान जस्टिस शाहिद वहीद ने पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल मंसूर उस्मान अवान से पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट के किसी आदेश का पालन करने के लिए बाध्य है।
पीठ ने यह भी सवाल किया कि संविधान का कौन-सा प्रावधान FCC को सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित किसी मामले का रिकॉर्ड मंगाने का अधिकार देता है।
यह संवैधानिक सवाल उस समय सामने आया जब फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट ने इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल स्थानांतरित करने से संबंधित सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का रिकॉर्ड मंगाने का आदेश दिया।
FCC ने यह कदम उस समय उठाया जब वह अडियाला जेल के अन्य कैदियों द्वारा निजी अस्पतालों में इलाज की मांग से संबंधित अपीलों पर सुनवाई कर रही थी।
अटॉर्नी जनरल ने Article 175-E का दिया हवाला
अटॉर्नी जनरल मंसूर उस्मान अवान ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि संविधान का Article 175-E फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट को कुछ परिस्थितियों में किसी लंबित मामले का रिकॉर्ड मंगाने का अधिकार देता है, यदि उसमें संविधान की व्याख्या से संबंधित कोई महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न शामिल हो।
अब इस संवैधानिक प्रावधान का दायरा और सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित कार्यवाही पर इसकी लागू होने की सीमा इस कानूनी मुद्दे के केंद्र में है।
जस्टिस शाहिद वहीद ने मौलिक अधिकारों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए न्यायिक अधिकार क्षेत्र के सवाल पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि मौलिक अधिकारों से जुड़े प्रश्न विभिन्न प्रकार की न्यायिक कार्यवाहियों में सामने आ सकते हैं।
इस संदर्भ में उन्होंने आपराधिक मामलों में निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का भी उल्लेख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार की सुनवाई के दौरान FCC के अधिकार क्षेत्र से जुड़े विवाद पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया। इसके बजाय पीठ ने संवैधानिक स्थिति स्पष्ट करने के लिए अटॉर्नी जनरल से और कानूनी सहायता मांगी।
18 अगस्त का आदेश अभी भी प्रभावी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान के इलाज और उनके परिवार के सदस्यों से मुलाकात से संबंधित अपने 18 अगस्त के आदेश के अनुपालन का भी जायजा लिया।
अटॉर्नी जनरल ने अदालत को बताया कि इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल स्थानांतरित करने का आदेश अभी भी प्रभावी है, क्योंकि बाद के किसी आदेश द्वारा इसे न तो निलंबित किया गया है और न ही निरस्त किया गया है।
पीठ ने अडियाला जेल के सुपरिंटेंडेंट की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाया, जिन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के लिए बुलाया गया था।
अदालत ने पूछा कि अधिकारी की गैरहाजिरी पर गिरफ्तारी वारंट क्यों न जारी किए जाएं।
अटॉर्नी जनरल ने अनुरोध किया कि संबंधित अधिकारी को अदालत के समक्ष पेश होने का एक और अवसर दिया जाए।
जस्टिस शाहिद वहीद ने कहा कि अदालत द्वारा उठाए जा रहे सवालों को नकारात्मक रूप से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने संवैधानिक स्थिति स्पष्ट करने की आवश्यकता के साथ न्यायपालिका के संस्थानों के बीच आपसी सम्मान के महत्व पर भी जोर दिया।
सुनवाई तीन सप्ताह के लिए स्थगित
सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल की अतिरिक्त समय की मांग स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई तीन सप्ताह के लिए स्थगित कर दी।
इस प्रकार मुख्य संवैधानिक सवाल अभी अनसुलझा है कि क्या Article 175-E के तहत फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट की रिकॉर्ड मंगाने की शक्ति सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित कार्यवाही तक भी लागू होती है और ऐसे आदेश के क्या कानूनी प्रभाव होंगे।
Posted By: Ali Imran Chattha