सऊदी-हूती तनाव बढ़ने पर कूटनीतिक संतुलन की कोशिश में पाकिस्तान
- इंटरनेशनल
- (Asia/Kolkata)
इस्लामाबाद | Nazrana Times अली इमरान चठ्ठा
पाकिस्तान सऊदी अरब की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को बनाए रखते हुए यमन के ईरान समर्थित हूतियों और रियाद के बीच बढ़ते संघर्ष में सीधे शामिल होने से बचने की कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही इस्लामाबाद ईरान के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को भी बनाए रखने का प्रयास कर रहा है।
इस सप्ताह सऊदी अरब पर हूतियों के एक बड़े हमले के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, हमलों में खमिस मुशैत स्थित एक एयरबेस और आसपास के क्षेत्रों में तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया, जिसमें 73 लोग घायल हुए। इसके बाद सऊदी अरब ने 12 घंटे के दौरान यमन के कई प्रांतों में 54 हवाई हमले किए।
मक्का रक्षा समझौते की परीक्षा
यह घटनाक्रम पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच पिछले महीने हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के लिए पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। समझौते के तहत तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला सभी तीन देशों पर हमला माना जाएगा।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि सऊदी क्षेत्र में फैलने वाली किसी भी आक्रामकता की स्थिति में समझौता लागू हो सकता है।
हालांकि, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने तत्काल सैन्य कार्रवाई की अटकलों को कम करने की कोशिश की। विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने कहा कि समझौते को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है और फिलहाल इसके तत्काल सैन्य क्रियान्वयन की बात करना उचित नहीं है।
ईरान को संदेश
पाकिस्तान ने कथित तौर पर ईरान तक सऊदी अरब का संदेश भी पहुंचाया है, जिसमें तेहरान से अपने यमनी हूती सहयोगियों को नियंत्रित करने और संघर्ष को व्यापक क्षेत्रीय संकट में बदलने से रोकने का आग्रह किया गया।
रिपोर्ट में सऊदी, पाकिस्तानी और ईरानी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि संदेश तेहरान तक पहुंचाया गया। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि ईरान का रुख है कि वह हूतियों को नियंत्रित नहीं करता।
रिपोर्ट में दो ईरानी सूत्रों ने यह भी दावा किया कि तेहरान ने हूतियों को सऊदी अरब पर हमला करने का निर्देश दिया था और अतिरिक्त धन तथा हथियार देने का वादा किया था। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
कूटनीतिक प्रयास जारी
पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने गुरुवार शाम ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बातचीत की। एक पाकिस्तानी सूत्र के अनुसार, बातचीत का उद्देश्य क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करना था।
बातचीत में अमेरिका-ईरान संघर्ष, वार्ता दोबारा शुरू होने की संभावनाओं और सऊदी अरब पर हूती हमलों सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
एक पाकिस्तानी सरकारी अधिकारी ने कहा कि इस्लामाबाद सऊदी-हूती संघर्ष में कम प्रोफाइल बनाए रखना चाहता है, क्योंकि उसके सऊदी अरब और ईरान दोनों के साथ महत्वपूर्ण हित जुड़े हुए हैं।
सुरक्षा और आर्थिक हित
पाकिस्तान की स्थिति इस तथ्य से भी जटिल है कि उसके सैनिक पहले से ही यमन की सीमा के पास सऊदी क्षेत्र में तैनात हैं। इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ने की स्थिति में पाकिस्तानी कर्मियों का जोखिम बढ़ सकता है।
इसके अलावा पाकिस्तान ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के रास्तों पर निर्भर है, जो व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष से प्रभावित हो सकते हैं।
खाड़ी देशों के साथ रक्षा सहयोग और संभावित निवेश भी पाकिस्तान की आर्थिक योजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए इस्लामाबाद के लिए रियाद के साथ संबंध मजबूत रखते हुए तेहरान से संबंधों को गंभीर नुकसान से बचाना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अधिकारियों ने रियाद में वरिष्ठ पाकिस्तानी और तुर्की सैन्य अधिकारियों के साथ बातचीत की। सूत्रों के मुताबिक, तीनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि उनकी सेनाएं यमन में प्रवेश नहीं करेंगी और कोई भी जवाबी कार्रवाई सऊदी क्षेत्र से की जाएगी।
क्षेत्रीय प्रभाव
बढ़ते तनाव ने व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संभावित प्रभावों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
एक वरिष्ठ क्षेत्रीय राजनयिक ने उम्मीद जताई कि स्थिति उस स्तर तक नहीं पहुंचेगी जहां पाकिस्तान को प्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप करना पड़े। उन्होंने कहा कि फिलहाल पाकिस्तान कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ेगा।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने हूती हमलों की निंदा करते हुए सऊदी अरब की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा के लिए अपने समर्थन को दोहराया है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि फिलहाल मक्का गठबंधन के विस्तार की कोई योजना नहीं है।
क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के साथ पाकिस्तान के सामने रियाद के साथ अपनी रक्षा प्रतिबद्धताओं और तेहरान के साथ राजनयिक एवं आर्थिक संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती और बढ़ गई है।
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