बिलावल ने आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया, खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन का बचाव किया
- इंटरनेशनल
- (Asia/Kolkata)
कराची (नज़राना टाइम्स): पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराते हुए खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन का बचाव किया। उन्होंने राजनीतिक दलों से आतंकवाद के मुद्दे को दलगत विवाद बनाने के बजाय उसके खिलाफ प्रयासों में सहयोग करने की अपील की।
कारसाज स्मारक पर श्रद्धांजलि देने के बाद पत्रकारों से बातचीत में बिलावल ने कहा कि आतंकवाद का खात्मा बेनजीर भुट्टो का मिशन था और पीपीपी के लिए यह आज भी प्राथमिकता है। उन्होंने आर्थिक संकट, नई राष्ट्रीय कार्ययोजना और चुनाव सुधारों पर भी सहयोग मांगा।
मीडिया सेल बिलावल हाउस के बयान के अनुसार, बिलावल और पाकिस्तान की प्रथम महिला बीबी आसिफा भुट्टो जरदारी ने स्मारक पर फूल चढ़ाए और मृतकों के लिए प्रार्थना की।
कारसाज में कार्यकर्ताओं के बलिदान को किया याद
बिलावल ने 18 अक्टूबर 2007 को बेनजीर भुट्टो के स्वदेश वापसी जुलूस पर हुए हमले को पाकिस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकवादी हमला बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने किसी अन्य ऐसे हमले से अधिक लोगों को प्रभावित किया।
उन्होंने कहा कि पहले धमाके के बाद पार्टी कार्यकर्ता घटनास्थल से भागे नहीं, बल्कि बेनजीर भुट्टो के वाहन के आसपास मानव ढाल बनाकर खड़े हो गए। दूसरे धमाके में इनमें से कई कार्यकर्ताओं की जान चली गई।
बिलावल ने कहा कि पीपीपी कार्यकर्ता आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष को अपना कर्तव्य मानते हैं। बेनजीर भुट्टो की अंतिम जनसभा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने आतंकियों की धमकियों के बावजूद स्वात में पाकिस्तान का झंडा लहराते रहने का वादा किया था।
उन्होंने कहा कि 2008 में सरकार बनाने के बाद पीपीपी ने स्वात और खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवादियों के खिलाफ अभियान चलाकर वह वादा पूरा किया।
आतंकवाद की वापसी के लिए पुराने फैसलों को जिम्मेदार ठहराया
बिलावल ने कहा कि बड़ी कुर्बानियों के बाद पाकिस्तान ने आतंकवादियों को हराया था। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान ने वह हासिल किया, जो विदेशी सेनाएं अफगानिस्तान में नहीं कर सकीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि अफगानिस्तान से विदेशी सेनाओं की वापसी और काबुल में नया प्रशासन आने के बाद पाकिस्तान की तत्कालीन सरकार ने वहां मौजूद आतंकवादियों को स्वात और पूर्व कबायली क्षेत्रों में फिर बसने दिया। उन्होंने जेलों में बंद आतंकवादियों को रिहा किए जाने का भी आरोप लगाया।
बिलावल ने कहा कि पाकिस्तान आज उन फैसलों के परिणाम भुगत रहा है। उन्होंने खैबर से खुजदार तक आतंकवादी घटनाओं और स्वात में फिर उभरते खतरों का उल्लेख किया।
उन्होंने सशस्त्र बलों और पुलिस को आतंकवाद के खिलाफ डटे रहने के लिए श्रद्धांजलि दी और कहा कि सुरक्षा कर्मियों के साथ आम नागरिकों को भी निशाना बनाया जा रहा है।
खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन का बचाव
बिलावल ने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री पर सार्वजनिक रूप से आतंकवादियों से लड़ने से इनकार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसी कारण पीपीपी ने आपातकालीन कदम उठाने के सरकार के निर्णय का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू है और पीपीपी आतंकवाद का सामना करने तथा पाकिस्तान के खिलाफ विद्रोह रोकने के लिए अन्य पक्षों के साथ काम करने को तैयार है।
बिलावल ने कहा कि पीपीपी ने जब भी आपातकालीन शासन लागू किया, संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया अपनाई। उन्होंने 2008–2013 की अपनी पार्टी की संघीय सरकार के दौरान बलूचिस्तान में गवर्नर शासन लगाने का उदाहरण दिया। उनके अनुसार, आतंकवाद की स्थिति के कारण पार्टी ने अपनी ही प्रांतीय सरकार के खिलाफ यह कदम उठाया था।
उन्होंने कहा कि अपनी सरकार हटाने का निर्णय दिखाता है कि पीपीपी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को पार्टी हितों से ऊपर रखती है।
अर्थव्यवस्था और चुनाव सुधारों पर सहयोग की अपील
बेनजीर भुट्टो की 2007 में वापसी के समय की उम्मीदों का उल्लेख करते हुए बिलावल ने कहा कि लोगों को उनसे रोजगार, बुनियादी समस्याओं के समाधान और आर्थिक कठिनाइयों से राहत की उम्मीद थी।
उन्होंने कहा कि उनकी मृत्यु के बाद रोजगार, आर्थिक संकट और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर काम करने की पीपीपी की जिम्मेदारी बढ़ गई। उनके अनुसार, पार्टी की सरकार ने 2008 से 2013 के बीच इन्हीं विषयों पर ध्यान दिया।
बिलावल ने माना कि पाकिस्तान को आर्थिक प्रबंधन, आतंकवाद से निपटने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सुधार की जरूरत है। उन्होंने आर्थिक संकट को ऐतिहासिक बताते हुए आशंका जताई कि हालात और बिगड़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पीपीपी नई राष्ट्रीय कार्ययोजना का मसौदा तैयार करने और आतंकवाद के खिलाफ नई राजनीतिक सहमति बनाने के लिए काम कर रही है।
बिलावल के अनुसार, संघीय सरकार चुनाव सुधारों पर समिति बनाने के लिए सहमत हो गई है। उन्होंने विपक्ष को इसमें भाग लेने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि खैबर पख्तूनख्वा में आपातकालीन व्यवस्था और गवर्नर शासन खत्म करवाने के इच्छुक पक्षों को संघीय सरकार से बातचीत करनी चाहिए।
कुंडी अब संघीय सरकार के प्रतिनिधि हैं: बिलावल
सवालों के जवाब में बिलावल ने कहा कि फैसल करीम कुंडी को पीपीपी ने गवर्नर पद के लिए नामित किया था, लेकिन संवैधानिक रूप से अब वह संघीय सरकार के प्रतिनिधि हैं और उसी को रिपोर्ट करते हैं।
उन्होंने कहा कि वह कुंडी से बातचीत और उन्हें सलाह देना जारी रखेंगे, हालांकि गवर्नर संघीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
राजनीतिक समझौतों पर बिलावल ने कहा कि पार्टी बेनजीर भुट्टो के सपनों का पाकिस्तान बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि समझौता राजनीति का हिस्सा है और बेनजीर भुट्टो ने भी देश, जनता और कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देते हुए कभी-कभी समझौते किए थे।
नए प्रांतों और विपक्ष की आलोचना पर रखा पक्ष
नए प्रांतों के सवाल पर बिलावल ने कहा कि संघीय गृह मंत्री मोहसिन नकवी पीपीपी और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का रुख जानते हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बिना आगे नहीं बढ़ सकती।
बिलावल ने कहा कि संविधान संबंधित प्रांतीय विधानसभा की सहमति से नए प्रांत बनाने की प्रक्रिया देता है। उन्होंने तर्क दिया कि जहां सहमति हो और प्रस्ताव के पीछे कोई राजनीतिक चाल या दूसरा उद्देश्य न हो, वहां इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने गिलगित-बाल्टिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां इस मुद्दे पर सहमति है और कोई मतभेद नहीं है।
बिलावल ने कहा कि विपक्षी नेता के तौर पर मौलाना फजलुर रहमान को सरकारी नीतियों की आलोचना करने का अधिकार है और देश में मतभेद के लिए जगह होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने उनसे आतंकवादियों की निंदा करने की भी अपील की और याद दिलाया कि उनकी पार्टी भी आतंकवादी हमलों का शिकार हुई है।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आतंकवाद पर राजनीति न करने और उससे निपटने के उपायों को विवादास्पद न बनाने का आग्रह किया। बिलावल ने कहा कि फजलुर रहमान सरकार और विपक्ष के बीच समझ बनाने में भूमिका निभा सकते हैं।
इस अवसर पर पीपीपी सिंध के अध्यक्ष निसार अहमद खुहरो, सिंध के मुख्यमंत्री सैयद मुराद अली शाह, प्रांतीय मंत्री, विधानसभा सदस्य, स्थानीय निकाय प्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।
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