ब्रैम्पटन सम्मेलन में पंजाबी समाज में महिलाओं की स्थिति पर मंथन
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- (Asia/Kolkata)
ब्रैम्पटन में विश्व पंजाबी सभा का सातवां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न
नज़्राना टाइम्स | कनाडा अली इमरान चठ्ठा
कनाडा के ब्रैम्पटन स्थित पंजाबी भवन में विश्व पंजाबी सभा द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सातवां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। 2 से 4 अक्टूबर तक आयोजित इस सम्मेलन में दुनिया के विभिन्न देशों से 600 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन का मुख्य विषय “पंजाबी समाज में महिलाओं की छवि” रहा। इसमें पूर्वी पंजाब के साथ-साथ दुनिया के विभिन्न देशों में रहने वाले पंजाबी समुदायों के प्रमुख लेखक, कवि, विद्वान और साहित्यकार शामिल हुए। पाकिस्तान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध पंजाबी कवि बाबा नजमी और कवयित्री ताहिरा सारा ने विशेष अतिथि के रूप में भाग लिया।
विश्व पंजाबी सभा के चेयरमैन डॉ. दलवीर सिंह कथूरिया, संरक्षक इंदरजीत सिंह बल्ल और अध्यक्ष परगट सिंह बग्गा के नेतृत्व में आयोजित सम्मेलन ने दोनों पंजाबों के बीच साहित्यिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर भी जोर दिया।

उद्घाटन दिवस पर डॉ. आत्मजीत ने मुख्य वक्तव्य दिया, जबकि डॉ. वरयाम सिंह संधू ने अध्यक्षीय भाषण प्रस्तुत किया। तीनों दिनों में प्रतिदिन तीन सत्र आयोजित किए गए, जिनमें लेखकों और विद्वानों ने पंजाबी समाज में महिलाओं की पहचान, स्थिति और भूमिका के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
सम्मेलन के दौरान लगभग 50 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिन पर विद्वानों ने विस्तृत चर्चा की।
कविता और सांस्कृतिक कार्यक्रम
हर दिन कविता पाठ का आयोजन किया गया। पाकिस्तानी पंजाबी कवि बाबा नजमी की प्रस्तुति को दर्शकों से विशेष सराहना और जोरदार तालियां मिलीं।
अंतिम दिन कविता सत्र की मेजबानी पश्चिमी पंजाब की कवयित्री ताहिरा सारा और ब्रैम्पटन की कवयित्री उजमा महमूद ने की। जगीर सिंह कहलोन, राणा सग्गू, सतीश गुलाटी, बलविंदर बलम, ओवैस राजा, राजवंत कौर संधू, दलवीर रियार, बलबीर रायकोटी, परमजीत देओल, सुरजीत, ताहिरा सारा और उजमा महमूद सहित कई कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय से पहुंचे शास्त्रीय गायक वीर सुखवंत और डॉ. सुखनेन ने भी अपनी प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक कार्यक्रम को समृद्ध किया।
महिलाओं की स्थिति पर चर्चा
डॉ. कंवलजीत ढिल्लों, परमजीत देओल, सुरजीत कौर, राजवंत कौर संधू, मनप्रीत सहोता, रछपाल कौर गिल, हरजसप्रीत गिल और बलबीर रायकोटी सहित कई विद्वानों और लेखकों ने पंजाबी महिलाओं की सामाजिक भूमिका और विभिन्न क्षेत्रों में उनकी छवि पर शोध पत्र प्रस्तुत किए।
सम्मेलन में अलग-अलग दिनों में पंजाब विधानसभा के स्पीकर सरदार कुलतार सिंह संधवां, पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त पहलवान करतार सिंह, सांसद सोनिया सिद्धू, सांसद अमन सोढ़ी, ब्रैम्पटन के मेयर पैट्रिक ब्राउन, प्रिंसिपल आत्म रंधावा, प्रिंसिपल सरवन सिंह और सुच्चा सिंह गिल सहित कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया।

शांति और समानता पर प्रस्ताव
डॉ. आत्मजीत, डॉ. दलवीर सिंह कथूरिया और डॉ. वरयाम सिंह संधू के नेतृत्व में कई प्रस्ताव पेश किए गए।
प्रतिनिधियों ने दुनिया में कहीं भी होने वाले युद्ध के विरोध में प्रस्ताव पारित किया। अन्य प्रस्तावों में महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता, पंजाब के स्कूलों में मार्शल आर्ट को अनिवार्य करने, पंजाब के शहरों और कस्बों में साफ-सुथरे सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध कराने और विज्ञापनों में महिलाओं की छवि को विकृत या अपमानित न करने की मांग शामिल थी।
सम्मेलन का समापन पारंपरिक जागो जुलूस के साथ हुआ। इसके बाद सम्मेलन में भाग लेने वाले विद्वानों को सम्मानित किया गया।
विश्व पंजाबी सभा के संरक्षक इंदरजीत सिंह बल्ल ने सम्मेलन की सफलता में योगदान देने वाले सभी प्रतिनिधियों, विद्वानों, लेखकों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि डॉ. कथूरिया की टीम पंजाबी मातृभाषा की गरिमा और सम्मान को बनाए रखने के लिए अपने प्रयास जारी रखेगी।
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