भगवान श्री जगन्नाथ जी की कृपा से कपूरथला में गूँज रहा है हरिनाम — 45 संध्या फेरियों के माध्यम से घर-घर पहुँच रही है भक्ति की अलौकिक ज्योति
- धार्मिक
- 27 Jun, 2026 06:07 PM (Asia/Kolkata)
कपूरथला 27 जून गौरव मढिया -"उमा कहूँ मैं अनुभव अपना, सत हरि भजन जगत सब सपना।"
भगवान शिव ने माता पार्वती से कहा कि इस संसार का समस्त वैभव क्षणभंगुर है, किन्तु भगवान श्रीहरि की भक्ति ही शाश्वत सत्य है। यही दिव्य संदेश आज भगवान श्री जगन्नाथ जी की पावन संध्या फेरियों के माध्यम से सम्पूर्ण कपूरथला में सजीव हो रहा है।
आगामी 19 जुलाई को आयोजित होने वाली भव्य श्री जगन्नाथ रथयात्रा के उपलक्ष्य में इस्कॉन श्री श्री राधा श्यामसुंदर मंदिर, कपूरथला द्वारा पूरे नगर में 45 दिव्य संध्या फेरियों का आयोजन किया जा रहा है। इन संध्या फेरियों के माध्यम से स्वयं भगवान श्री जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी की दिव्य पालकी घर-घर पहुँच रही है, जिससे प्रत्येक परिवार को अपने ही द्वार पर भगवान की आरती करने, पुष्प अर्पित करने, भोग समर्पित करने तथा हरिनाम संकीर्तन में सम्मिलित होकर अपने जीवन को धन्य बनाने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हो रहा है।

इसी श्रृंखला में 27वीं संध्या फेरी का भव्य आयोजन सेंटर टाउन एवं हरिनाम नगर में अत्यंत उल्लास एवं भक्तिभाव के साथ सम्पन्न हुआ।
संध्या फेरी की प्रथम आरती का सौभाग्य हेल्दी हैप्पीनेस मेडिसिन शॉप को प्राप्त हुआ। परिवार के सभी सदस्यों ने अत्यंत श्रद्धा एवं प्रेमपूर्वक भगवान श्री जगन्नाथ जी की आरती उतारी, विविध भोग अर्पित किए तथा पुष्पवर्षा कर प्रभु का स्वागत किया। भक्तों के बैठने की सुंदर व्यवस्था की गई। दुकान के बाहर गूँजते मधुर हरिनाम संकीर्तन ने आने-जाने वाले असंख्य लोगों के हृदय को स्पर्श किया। श्रीनाम की दिव्य ध्वनि जिस किसी के कानों तक पहुँची, वह स्वयं को कुछ क्षणों के लिए आध्यात्मिक शांति से ओत-प्रोत अनुभव करने लगा।
इसके पश्चात भक्तगण नृत्य एवं संकीर्तन करते हुए भगवान की दिव्य पालकी को सेंटर टाउन लेकर पहुँचे, जहाँ श्रीमती नूतन गुप्ता जी एवं उनके परिवार सहित अनेक श्रद्धालुओं ने भगवान का भव्य स्वागत किया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कपूरथला की गलियाँ स्वयं वृन्दावन धाम में परिवर्तित हो गई हों। सड़कों पर उमड़ती भक्तों की भीड़, गूँजता हुआ "हरे कृष्ण" महामंत्र तथा भगवान के सम्मुख प्रेमपूर्वक नृत्य करते श्रद्धालु इस बात का सजीव प्रमाण थे कि जहाँ हरिनाम संकीर्तन होता है, वहाँ स्वयं भगवान अपनी कृपा बरसाते हैं।
वास्तव में यह कपूरथला वासियों का महान सौभाग्य है कि स्वयं जगन्नाथ भगवान अपने भक्तों के द्वार पर पधारकर उनकी सेवा स्वीकार कर रहे हैं। जो समस्त जगत का पालन करते हैं, वही भक्तों के प्रेम से बंधकर उनके घर-घर पहुँच रहे हैं।

इसके उपरांत संध्या फेरी हरिनाम नगर पहुँची, जहाँ एडवोकेट राघव धीर जी एवं श्रीमती मोनिका धीर जी के निवास स्थान पर भगवान का अत्यंत भावपूर्ण स्वागत किया गया। पूरे परिवार ने श्रद्धा से पुष्प अर्पित किए, आरती उतारी तथा भगवान के श्रीचरणों में मंगलमयी प्रार्थनाएँ अर्पित कीं।
शास्त्रों में भगवान श्री जगन्नाथ को "जगत के नाथ" कहा गया है। वे प्रत्येक जीव के हृदय की भावनाओं को बिना कहे ही समझ लेते हैं। जो श्रद्धापूर्वक उनकी शरण ग्रहण करता है, उसके जीवन के दुःख, क्लेश एवं अज्ञान को दूर कर उसे शुद्ध भक्ति का अमूल्य रत्न प्रदान करते हैं। भगवान की यही असीम करुणा इस संध्या फेरी के माध्यम से प्रत्येक घर तक पहुँचती हुई दिखाई दी।
संध्या फेरी की महाआरती बेस्ट वेस्टर्न होटल परिवार के श्री अशोक कौड़ा जी, श्रीमती राधिका कौड़ा जी एवं उनके परिवार के निवास स्थान पर सम्पन्न हुई। सम्पूर्ण परिवार ने अपने माता-पिता एवं बच्चों सहित अत्यंत प्रेम और उल्लास से भगवान का स्वागत किया। भक्तों द्वारा देर तक हरिनाम संकीर्तन एवं नृत्य किया गया। वातावरण इतना दिव्य एवं आनंदमय था कि ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कौड़ा परिवार का निवास स्थान स्वयं वृन्दावन धाम बन गया हो। एकादशी के इस परम पावन अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ का आगमन सम्पूर्ण परिवार के लिए अत्यंत मंगलकारी एवं कृपामयी सिद्ध हुआ।

महाआरती के उपरांत इस्कॉन कपूरथला के वरिष्ठ भक्त श्री नकुल दास प्रभु जी ने भगवान श्री जगन्नाथ की करुणामयी लीलाओं पर अत्यंत हृदयस्पर्शी कथा का श्रवण कराया। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों के हृदय की प्रत्येक भावना को बिना कहे ही जान लेते हैं। वे केवल बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि निष्कपट प्रेम को स्वीकार करते हैं। जब जीव श्रद्धापूर्वक हरिनाम का आश्रय लेता है, तब भगवान उसके जीवन के दुःखों का अंत कर उसे अपने दिव्य प्रेम की ओर अग्रसर करते हैं।
प्रभु जी ने समस्त नगरवासियों से विनम्र निवेदन किया कि वे आगामी 19 जुलाई को आयोजित होने वाली श्री जगन्नाथ रथयात्रा में अपने परिवार सहित अवश्य पधारें, भगवान के रथ की पावन रस्सी को खींचकर अपने जीवन को धन्य बनाएँ तथा भगवान श्री जगन्नाथ की असीम कृपा एवं दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करें।
हरिनाम संकीर्तन ही कलियुग का महान यज्ञ है, और भगवान के श्रीचरणों की सेवा ही जीवन की परम सफलता है। आइए, हम सभी इस दिव्य अवसर का लाभ उठाकर अपने जीवन को भक्ति, प्रेम और भगवान की कृपा से आलोकित करें।
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