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KEMU के 20 अफगान MBBS छात्रों को वापसी की औपचारिकताएं पूरी करने का निर्देश

10 Sep, 2026 03:49 PM

सात अंतिम वर्ष के छात्र भी प्रभावित; PMDC के निर्देशों के बाद किंग एडवर्ड मेडिकल यूनिवर्सिटी ने उठाया कदम

लाहौर (नज़राना टाइम्स): लाहौर की किंग एडवर्ड मेडिकल यूनिवर्सिटी (KEMU) ने MBBS की पढ़ाई कर रहे 20 अफगान छात्रों को पाकिस्तान मेडिकल एंड डेंटल काउंसिल (PMDC) के नए निर्देशों के बाद अफगानिस्तान वापसी से जुड़ी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कहा है।
प्रभावित छात्रों को 24 घंटे के भीतर असिस्टेंट रजिस्ट्रार के MBBS कार्यालय में उपस्थित होकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है।
मीडिया रिपोर्टों में उद्धृत विश्वविद्यालय रिकॉर्ड के अनुसार, KEMU से कुल 22 अफगान नागरिक जुड़े हुए थे। इनमें से 20 वर्तमान में MBBS कार्यक्रम में पढ़ रहे हैं, जबकि दो हाल ही में अपनी मेडिकल डिग्री पूरी कर चुके हैं।
पढ़ाई कर रहे 20 छात्रों में सात अंतिम वर्ष में बताए गए हैं। इसके कारण अपनी मेडिकल शिक्षा पूरी करने के करीब पहुंच चुके छात्रों की पढ़ाई बाधित होने को लेकर भी चिंता सामने आई है।

PMDC के निर्देशों के बाद कार्रवाई

KEMU की यह कार्रवाई PMDC द्वारा 1 सितंबर 2026 को देशभर के मेडिकल और डेंटल शिक्षण संस्थानों को जारी किए गए निर्देशों के बाद की गई है।
निर्देशों के अनुसार, पहले से मेडिकल या डेंटल पाठ्यक्रमों में दाखिल अफगान नागरिकों के संबंध में मौजूदा सरकारी नीति के तहत उनकी अफगानिस्तान वापसी के लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है।
शिक्षण संस्थानों को आवश्यकता के अनुसार NOC जारी करने और छात्रों की वापसी से संबंधित औपचारिकताओं में सहयोग करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इसके साथ ही मौजूदा शैक्षणिक सत्र के दौरान अगले आदेश तक अफगान नागरिकों के नए दाखिलों, प्लेसमेंट, ट्रांसफर और माइग्रेशन पर भी रोक लगाई गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर में जारी निर्देश PMDC द्वारा 31 जुलाई को जारी की गई पूर्व हिदायतों की अगली कड़ी हैं।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों में तनाव

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब इस्लामाबाद और काबुल के संबंध गंभीर तनाव से गुजर रहे हैं।
पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और अन्य सशस्त्र समूह अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल पाकिस्तान के भीतर हमलों के लिए कर रहे हैं और उन्हें वहां पनाह मिल रही है।
अफगान तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है और उसका कहना है कि अफगान भूमि को किसी अन्य देश के खिलाफ इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाती।
वर्ष 2026 के दौरान दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ा तथा सीमा पर सैन्य टकराव भी सामने आए।

पाकिस्तान में आतंकवादी हिंसा से नागरिक मौतों में वृद्धि

पाकिस्तान में हाल के वर्षों में आतंकवादी और सशस्त्र हिंसा से जुड़ी घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (PICSS) के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में आतंकवादी हिंसा और उससे जुड़ी घटनाओं में 580 नागरिक मारे गए, जबकि 2024 में यह संख्या 468 थी।
PICSS ने 2025 को 2015 के बाद नागरिक मौतों के लिहाज से सबसे घातक वर्ष बताया था।
2026 के पहले सात महीनों में भी सुरक्षा स्थिति गंभीर बनी रही। PICSS के अनुसार, इस अवधि में 463 नागरिकों की मौत दर्ज की गई।
पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय भी अफगान क्षेत्र से सक्रिय सशस्त्र समूहों को पाकिस्तान में होने वाले कई हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराता रहा है। दूसरी ओर, काबुल अफगानिस्तान में ऐसे आतंकवादी ठिकानों की मौजूदगी से संबंधित पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करता है।

बाजौर हमले के बाद और बढ़ा तनाव

फरवरी 2026 में बाजौर जिले में एक सुरक्षा चौकी पर हुए घातक हमले के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंधों में तनाव और बढ़ गया था।
16 फरवरी को हुए इस हमले में 11 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों और एक बच्चे की मौत हुई थी। इसके बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के डिप्टी हेड ऑफ मिशन को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया था।
TTP ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। पाकिस्तान का दावा है कि TTP अफगानिस्तान में मौजूद ठिकानों से गतिविधियां संचालित करता है, जबकि काबुल इस दावे से इनकार करता है।

विदेश मंत्रालय ने आव्रजन नीति पर स्थिति की स्पष्ट

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान के अनुसार, Illegal Foreigners Repatriation Plan (IFRP) के तहत बिना वैध पासपोर्ट और वीजा के पाकिस्तान में रह रहे किसी भी विदेशी नागरिक को वापस भेजा जा सकता है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अफगान छात्रों की ओर से दी गई वीजा अवधि बढ़ाने की अर्जियों पर मौजूदा नीतियों, नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
यह अंतर महत्वपूर्ण है क्योंकि PMDC के निर्देश मेडिकल और डेंटल शिक्षा से संबंधित हैं, जबकि किसी छात्र के पाकिस्तान में कानूनी रूप से रहने का अधिकार उसके वीजा और आव्रजन दर्जे से भी जुड़ा होता है।

मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

इस फैसले को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है।
ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP) ने छात्रों की शिक्षा और भविष्य प्रभावित होने की आशंका पर चिंता व्यक्त की है।
ह्यूमन राइट्स वॉच ने विशेष रूप से अफगान महिला मेडिकल छात्रों के मामले को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि अफगानिस्तान लौटने के बाद तालिबान सरकार द्वारा महिलाओं की उच्च और मेडिकल शिक्षा पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण उनके लिए अपनी पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
अफगान दूतावास ने भी पाकिस्तानी अधिकारियों से पहले से पढ़ाई कर रहे छात्रों को अपनी शिक्षा पूरी करने की अनुमति देने की अपील की है।
इस तरह यह मामला एक ओर अफगान नागरिकों से संबंधित पाकिस्तान की सरकारी और आव्रजन नीति से जुड़ा है, वहीं दूसरी ओर पहले से दाखिल छात्रों की शिक्षा और मानवीय चिंताओं का सवाल भी खड़ा करता है।

2023 से जारी है वापसी नीति

पाकिस्तान ने 2023 के अंत में Illegal Foreigners Repatriation Plan लागू करना शुरू किया था। इसके शुरुआती चरण में मुख्य रूप से ऐसे विदेशी नागरिकों को निशाना बनाया गया था जो आवश्यक कानूनी दस्तावेजों के बिना देश में रह रहे थे। इनमें बड़ी संख्या अफगान नागरिकों की थी।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों में बढ़ते तनाव के साथ इस नीति का दायरा भी बढ़ा है।
PMDC का ताजा निर्देश इसलिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका असर पाकिस्तान के मेडिकल और डेंटल संस्थानों में पहले से पढ़ रहे अफगान छात्रों पर भी पड़ रहा है, जिनमें कुछ अपनी डिग्री पूरी करने के बेहद करीब हैं।

Posted By: Ali Imran Chattha

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