इमरान खान और बुशरा बीबी की एकांत कैद खत्म करने का आदेश, परिवार से मुलाकात और फोन कॉल की भी अनुमति

इमरान खान और बुशरा बीबी की एकांत कैद खत्म करने का आदेश, परिवार से मुलाकात और फोन कॉल की भी अनुमति

इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने अदियाला जेल प्रशासन को 15 दिनों के भीतर आदेश के पालन की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया

इस्लामाबाद, 1 सितंबर 2026 — नज़राना टाइम्स

इस्लामाबाद हाई कोर्ट (IHC) ने मंगलवार को पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की एकांत कैद समाप्त करने का आदेश दिया।
जस्टिस खादिम हुसैन सूमरो ने सुरक्षित रखा गया फैसला सुनाते हुए इमरान खान और बुशरा बीबी को एकांत में रखे जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं को सुनवाई योग्य करार दिया।
अदालत ने अदियाला जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि दोनों को जेल नियमों के तहत मिलने वाली सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और उन्हें जेल नियमों के विपरीत एकांत में न रखा जाए।

अखबार, किताबें और चिकित्सा सुविधाएं देने का आदेश

अदालत ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि इमरान खान और बुशरा बीबी को नियमों के अनुसार अखबारों और किताबों तक पहुंच के साथ-साथ आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।
इसके अलावा, परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों से मुलाकात के संबंध में जेल नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है।

इमरान खान अपने बेटों से फोन पर कर सकेंगे बात

अदालत ने इमरान खान को अपने बेटों से टेलीफोन पर बातचीत करने की अनुमति भी दी है।
हालांकि, अदालत ने इस सुविधा के साथ एक शर्त भी लगाई है। फैसले के अनुसार, यदि फोन पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के लिए किया जाता है, तो यह सुविधा वापस ली जा सकती है।

नुसरत भुट्टो मामले की कानूनी नजीर का हवाला

जस्टिस खादिम हुसैन सूमरो ने फैसला सुनाते हुए नुसरत भुट्टो मामले और बेगम शमीम अफरीदी मामले में स्थापित कानूनी नजीरों का भी हवाला दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इमरान खान और बुशरा बीबी के साथ लागू जेल नियमों के अनुसार व्यवहार किया जाना चाहिए और उन्हें ऐसी एकांत कैद में नहीं रखा जा सकता जो निर्धारित जेल नियमों का उल्लंघन करती हो।
इमरान खान को एकांत में रखे जाने के खिलाफ याचिका उनकी बहन अलीमा खान ने दायर की थी, जबकि बुशरा बीबी की एकांत कैद को चुनौती देने वाली याचिका मुबशरा खावर मानेका की ओर से दायर की गई थी।

इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला 6 अगस्त को सुरक्षित रख लिया था।

अब अदालत ने अदियाला जेल प्रशासन को अपने आदेशों पर अमल सुनिश्चित करने और 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
 

Ali Imran Chattha
Ali Imran Chattha
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