ईरान-अमेरिका वार्ता में पाकिस्तान प्रमुख मध्यस्थ बनकर उभरा
- इंटरनेशनल
- 10 May, 2026 03:24 PM (Asia/Kolkata)
इस्लामाबाद अली इमरान चठ्ठा
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ने बताया है कि ईरान ने क्षेत्रीय संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से अमेरिका द्वारा दिए गए शांति प्रस्ताव पर अपना औपचारिक जवाब पाकिस्तान के माध्यम से भेज दिया है। इस प्रक्रिया में पाकिस्तान तेहरान और वॉशिंगटन के बीच प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब क्षेत्र में तनाव सीधे सैन्य टकराव में बदल चुका है और मध्य पूर्व में व्यापक युद्ध की आशंकाएँ बढ़ गई हैं।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, तेहरान का जवाब रविवार को पाकिस्तानी कूटनीतिक माध्यमों से अमेरिकी अधिकारियों तक पहुँचाया गया। रिपोर्ट में संदेश की पूरी जानकारी साझा नहीं की गई, लेकिन सूत्रों के मुताबिक इसमें युद्धविराम, समुद्री सुरक्षा, प्रतिबंधों में राहत और भविष्य में सैन्य कार्रवाई न करने की गारंटी जैसी शर्तें शामिल हैं।
पाकिस्तान ने इस संघर्ष के दौरान खुद को ईरान और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पुल के रूप में स्थापित किया है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने दोनों पक्षों से लगातार संपर्क बनाए रखते हुए संयम और संवाद पर ज़ोर दिया है।
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी प्रस्ताव में अस्थायी युद्धविराम, अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सुरक्षा व्यवस्था, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भविष्य की वार्ता और कुछ शर्तों के तहत प्रतिबंधों में धीरे-धीरे राहत शामिल है।
विश्लेषकों का कहना है कि दोनों पक्ष युद्ध को और अधिक फैलने से रोकना चाहते हैं, क्योंकि इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य वार्ता का मुख्य केंद्र बना हुआ है क्योंकि यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है। किसी भी रुकावट का वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
यूरोप, एशिया और खाड़ी देशों सहित कई सरकारों ने कूटनीतिक प्रयासों का स्वागत किया है। संयुक्त राष्ट्र ने भी तुरंत तनाव कम करने और नागरिक ढाँचे की सुरक्षा की अपील दोहराई है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कई बड़े मतभेद अभी भी बाकी हैं और बातचीत में रुकावटें आ सकती हैं। इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी रहना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि संघर्ष के बीच भी कूटनीति सक्रिय है।
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