पाकिस्तान ने द्विपक्षीय और मक्का समझौतों के तहत सऊदी अरब के प्रति रक्षा प्रतिबद्धताएं दोहराईं
- इंटरनेशनल
- (Asia/Kolkata)
इस्लामाबाद | Nazrana Times अली इमरान चठ्ठा
पाकिस्तान ने क्षेत्रीय तनाव के बीच सऊदी अरब की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इस दौरान पाकिस्तान ने रियाद के साथ अपने मौजूदा द्विपक्षीय रक्षा समझौते और पाकिस्तान, सऊदी अरब तथा तुर्किये के बीच हुए त्रिपक्षीय मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का हवाला दिया।
पाकिस्तान और सऊदी अरब ने सितंबर 2025 में Strategic Mutual Defense Agreement पर हस्ताक्षर किए थे। उस समय जारी आधिकारिक संयुक्त बयान के अनुसार, समझौते का उद्देश्य रक्षा सहयोग और सामूहिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करना है। इसके तहत किसी एक देश के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई को दोनों देशों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई माना जाएगा।
7 अगस्त 2026 को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर इस सुरक्षा ढांचे का विस्तार किया।
त्रिपक्षीय समझौते के तहत तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। समझौते में रक्षा सहयोग बढ़ाने का भी प्रावधान है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने मक्का समझौते को रक्षात्मक प्रकृति का बताया है और कहा है कि यह किसी विशेष देश के खिलाफ निर्देशित नहीं है। इस्लामाबाद के अनुसार, इसका उद्देश्य सामूहिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करना तथा क्षेत्रीय शांति, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करना है।
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच दशकों से व्यापक सैन्य और सुरक्षा सहयोग रहा है, जिसमें प्रशिक्षण और सलाहकार व्यवस्थाएं भी शामिल हैं।
रॉयटर्स ने मई में पाकिस्तानी सुरक्षा और सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया था कि क्षेत्रीय तनाव के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई थी, जिसमें हजारों कर्मियों और सैन्य विमानों की तैनाती शामिल थी। हालांकि, उस समय पाकिस्तान की सेना, विदेश मंत्रालय और सऊदी सरकार ने इस तैनाती के पूरे विवरण की सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की थी।
रक्षा संबंधों की यह नवीनतम पुष्टि ऐसे समय हुई है जब मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है, जिसमें यमन के हूती आंदोलन और सऊदी अरब से जुड़े नए संघर्ष भी शामिल हैं।
इस्लामाबाद ने व्यापक क्षेत्रीय तनाव को रोकने के प्रयासों के तहत क्षेत्र के देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क भी जारी रखा है।
पाकिस्तान लगातार कहता रहा है कि सऊदी अरब और तुर्किये के साथ उसकी रक्षा व्यवस्थाएं सामूहिक रक्षा और प्रतिरोध क्षमता पर केंद्रित हैं तथा किसी विशेष देश के खिलाफ निर्देशित नहीं हैं।
मक्का समझौते में कहा गया है कि इसका उद्देश्य सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना और क्षेत्र तथा उससे आगे शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना है।
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से रणनीतिक और रक्षा संबंध हैं, जबकि तुर्किये को शामिल किए जाने से रक्षा सहयोग के लिए एक व्यापक त्रिपक्षीय ढांचा स्थापित हुआ है।
इन समझौतों के तहत भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई का निर्णय परिस्थितियों, संबंधित समझौतों के प्रावधानों और संबंधित सरकारों द्वारा लिए गए फैसलों पर निर्भर करेगा।
Leave a Reply