अमेरिका-ईरान समझौता अधर में, पाकिस्तान ने तेज की कूटनीतिक भूमिका
- इंटरनेशनल
- 21 May, 2026 05:26 AM (Asia/Kolkata)
मोहसिन नकवी के लगातार तेहरान दौरों से बढ़ीं उम्मीदें, परमाणु मुद्दा अब भी सबसे बड़ी रुकावट
अली इमरान चट्ठा
इस्लामाबाद/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी खतरनाक तनाव में पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका अब एक नए और बेहद अहम दौर में प्रवेश कर चुकी है। इसी सिलसिले में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी बुधवार को एक बार फिर तेहरान पहुंचे। कुछ ही दिनों के भीतर यह उनका दूसरा दौरा है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि इस्लामाबाद युद्धविराम को टूटने से बचाने और स्थायी समझौते की दिशा में प्रगति सुनिश्चित करने के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है।
मोहसिन नकवी की यह ताजा यात्रा दर्शाती है कि पाकिस्तान और ईरानी नेतृत्व के बीच लगातार उच्च स्तरीय संपर्क जारी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस दौरे के दौरान अमेरिका-ईरान वार्ता और व्यापक क्षेत्रीय कूटनीतिक समन्वय से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब यह आशंका बढ़ती जा रही है कि समझौते के लिए उपलब्ध समय तेजी से कम होता जा रहा है।
पाकिस्तान इस समय वॉशिंगटन और तेहरान के बीच संवाद के रास्ते खुले रखने की कोशिशों में जुटा हुआ है। दोनों पक्षों की ओर से तीखे बयान सामने आ रहे हैं, जबकि वॉशिंगटन से यह संकेत भी मिल रहे हैं कि 8 अप्रैल के युद्धविराम के बाद रोके गए हमले फिर शुरू किए जा सकते हैं।
संघर्ष से युद्धविराम तक
मौजूदा हालात की गंभीरता को समझने के लिए उन घटनाओं पर नजर डालना जरूरी है जिन्होंने क्षेत्र को इस संकट तक पहुंचाया। 28 फरवरी को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के बाद तनाव तेजी से बढ़ गया। इसके बाद अमेरिका और इज़राइल ने ईरानी ठिकानों पर हमले किए, जबकि ईरान ने भी क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई की।
इसी नाजुक स्थिति में पाकिस्तान आगे आया। 8 अप्रैल को प्रधानमंत्री मुहम्मद शहबाज शरीफ ने घोषणा की कि अमेरिका और ईरान दो सप्ताह के सशर्त युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं, जिसके दौरान स्थायी समझौते के लिए बातचीत होगी। यह घोषणा ऐतिहासिक मानी गई क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान के विदेश मंत्रालय दोनों ने अपने-अपने बयानों में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का नाम लिया। इससे स्पष्ट हुआ कि दोनों पक्ष पाकिस्तान पर भरोसा कर रहे हैं।
इस्लामाबाद वार्ता: उम्मीद जगी, लेकिन समझौता नहीं हुआ
11 और 12 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद के सेरेना होटल में वार्ता का दौर आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य युद्धविराम को स्थिर करना और संघर्ष का स्थायी समाधान तलाशना था। पाकिस्तान ने इन वार्ताओं की मेजबानी और मध्यस्थता की। करीब 21 घंटे तक चली बातचीत तीन चरणों में हुई, जिनमें पहला अप्रत्यक्ष और दूसरा व तीसरा प्रत्यक्ष था।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे थे। वार्ता के समापन पर उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष किसी अंतिम समझौते तक नहीं पहुंच सके। उन्होंने कहा, “बुरी खबर यह है कि हम समझौते तक नहीं पहुंचे, और यह ईरान के लिए अमेरिका से ज्यादा बुरी खबर है।” जानकारी के अनुसार दोनों पक्ष दस बिंदुओं वाले युद्धविराम ढांचे के अधिकांश पहलुओं पर सहमत हो गए थे, लेकिन दो अहम मुद्दे—होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान का परमाणु कार्यक्रम—अभी भी अटके हुए हैं।
परमाणु कार्यक्रम और समुद्री अधिकार बने सबसे बड़े विवाद
पाकिस्तानी अधिकारियों के जरिए अमेरिका का 15 सूत्रीय प्रस्ताव ईरान तक पहुंचाया गया था। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने, बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता सीमित करने, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने, क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों के समर्थन को कम करने और बदले में प्रतिबंधों में राहत देने की बात शामिल थी। ईरान ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया।
अमेरिका ने शुरुआत में चार प्रमुख उद्देश्य तय किए थे—ईरान की मिसाइल क्षमता को नष्ट करना, उसकी नौसेना को कमजोर करना, क्षेत्रीय सहयोगी समूहों से संबंध खत्म करवाना और यह सुनिश्चित करना कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। दूसरी ओर ईरान का कहना है कि किसी भी समझौते की शुरुआत तत्काल युद्ध समाप्ति से होनी चाहिए और वह अपने परमाणु अधिकारों पर कोई समझौता नहीं करेगा।
मोहसिन नकवी की सक्रिय कूटनीति
पाकिस्तान की बैकचैनल डिप्लोमेसी में गृह मंत्री मोहसिन नकवी केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं। 16 और 17 मई को अपने दौरे के दौरान उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन, गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ से मुलाकात की, जो शांति प्रक्रिया में ईरान के मुख्य वार्ताकार भी हैं।
राष्ट्रपति पेज़ेशकियन के साथ करीब 90 मिनट चली बैठक में क्षेत्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। नकवी ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी अलग मुलाकात की। इस दौरान ईरानी गृह मंत्री ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के कूटनीतिक प्रयासों की खुलकर सराहना की।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नरमी
हाल के हफ्तों में सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत तब मिला जब अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों की नौसैनिक सुरक्षा कार्रवाई रोक दी। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह कदम पाकिस्तान और अन्य देशों के अनुरोध पर उठाया गया है और “पूर्ण एवं अंतिम समझौते” की दिशा में “बेहद सकारात्मक प्रगति” हो रही है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान को उम्मीद है कि मौजूदा प्रगति क्षेत्र और दुनिया में स्थायी शांति एवं स्थिरता का मार्ग प्रशस्त करेगी।
बाधाओं के बावजूद पाकिस्तान डटा रहा
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने स्वीकार किया है कि मध्यस्थता के रास्ते में कई “बाधाएं” मौजूद हैं। इसी दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को “पाषाण युग में वापस भेजने” जैसी धमकियां भी दीं। इसके बावजूद इस्लामाबाद दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने की कोशिशों में लगा हुआ है।
पाकिस्तान और चीन ने पहले एक संयुक्त पांच सूत्रीय पहल भी पेश की थी, जिसमें तत्काल युद्धविराम, तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास और होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य समुद्री यातायात बहाल करने की मांग की गई थी।
शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की भूमिका
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने व्यक्तिगत रूप से इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया की निगरानी की है। वॉशिंगटन और तेहरान दोनों ने उनकी भूमिका को स्वीकार किया है। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के साथ उनके भरोसेमंद संबंध ही पाकिस्तान को एक प्रभावी मध्यस्थ बनाते हैं।
वार्ता अब किस मोड़ पर?
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि ईरान “बेहद समझौता चाहता है” और यह संघर्ष “बहुत जल्द समाप्त” हो जाएगा। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष दोबारा शुरू हुआ तो ईरान की प्रतिक्रिया “और भी चौंकाने वाली” होगी।
दोनों पक्षों ने माना है कि प्रगति हुई है, लेकिन अंतिम समझौता अभी नहीं हो सका है। परमाणु मुद्दा अब भी सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि परमाणु संप्रभुता, मिसाइल क्षमता और समुद्री अधिकार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दोनों पक्षों को कठिन समझौते करने होंगे।
इसके बावजूद तेहरान के साथ पाकिस्तान के लगातार उच्च स्तरीय संपर्क, प्रस्तावों का आदान-प्रदान और अमेरिका द्वारा होर्मुज में अपनी सैन्य कार्रवाई रोकना इस बात के संकेत हैं कि समझौते की उम्मीद अभी भी जिंदा है—और इस पूरे कूटनीतिक प्रयास के केंद्र में पाकिस्तान की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो चुकी है।
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