एचीसन कॉलेज की 140वीं वर्षगांठ के लिए भारतीय मेहमान लाहौर पहुंचे

एचीसन कॉलेज की 140वीं वर्षगांठ के लिए भारतीय मेहमान लाहौर पहुंचे

लाहौर, 2 नवंबर (नज़राना टाइम्स): एचीसन कॉलेज की 140वीं वर्षगांठ के समारोहों में भाग लेने के लिए भारतीय मेहमान सोमवार को लाहौर पहुंचे। कॉलेज की आधारशिला 3 नवंबर 1886 को रखी गई थी और इसी तारीख को संस्थान की वर्षगांठ मनाई जाती है।

प्रतिनिधिमंडल में उन पूर्व विद्यार्थियों के रिश्तेदार भी शामिल हैं, जिन्होंने 1947 के विभाजन से पहले अविभाजित पंजाब में इस कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की थी। कॉलेज के पूर्व विद्यार्थियों को “ओल्ड बॉयज़” कहा जाता है।

हरचरण सिंह बराड़ के नाम वाले कक्ष का होगा अनावरण

चंडीगढ़ से पहुंचीं कंवलजीत “बबली” कौर बराड़ अपने पिता हरचरण सिंह बराड़ के नाम वाले कक्षा-कक्ष का अनावरण करेंगी। यह पहल हरचरण सिंह बराड़ और सैयद बाबर अली की मित्रता को सम्मान देने के लिए की गई है।

फरवरी के संस्थापक दिवस समारोहों में भी पहुंचे थे परिवार

कॉलेज ने इससे पहले 13 से 15 फरवरी तक तीन दिवसीय संस्थापक दिवस समारोह आयोजित किए थे। उस अवसर पर भारत में रहने वाले सभी 15 जीवित पूर्व विद्यार्थियों को आमंत्रित किया गया था। इनमें से अधिकांश की उम्र 90 से 99 वर्ष के बीच थी।

जो पूर्व विद्यार्थी स्वयं यात्रा नहीं कर सके, उनकी जगह उनके बच्चों और पोते-पोतियों या नाती-नातिनों ने समारोहों में भाग लिया था।

ऐतिहासिक गुरुद्वारे में करीब 80 साल बाद हुआ था कीर्तन

फरवरी के समारोहों के दौरान कॉलेज के ऐतिहासिक गुरुद्वारे में लगभग 80 वर्षों बाद पहली बार कीर्तन आयोजित किया गया था। इस अवसर पर चारों दरवाजे सभी धर्मों के लोगों के लिए खोले गए थे।

पंजाब के प्रांतीय मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा और कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एस.एम. तुराब हुसैन भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।

पटियाला से भेजी गई स्मारक शॉल

एचीसन कॉलेज से संबंध रखने वाले पटियाला के यादविंद्रा पब्लिक स्कूल ने इस वर्ष की शुरुआत में अपने परिसर में भी वर्षगांठ मनाई थी। स्कूल ने लाहौर के समारोहों के लिए एक स्मारक शॉल भी भेजी है।

लोगों के बीच संबंध मजबूत करने की पहल

आयोजकों ने कहा कि यह पहल लोगों के आपसी संबंधों पर केंद्रित है और किसी सरकार का प्रतिनिधित्व नहीं करती।

एक प्रतिनिधि ने कहा, “यह भारत और पाकिस्तान के आम लोगों के लिए एक मंच है।”

News Disclaimer:The news, articles and other materials published by Nazarana Times are based on the opinions of our reporters and writers. The institution is not responsible for the facts and names given in them and the institution does not necessarily agree with them.