एलएचसी में भारतीय नागरिक सर्बजीत कौर के निर्वासन मामले की सुनवाई जारी, कैबिनेट डिवीजन की रिपोर्ट का इंतज़ार

एलएचसी में भारतीय नागरिक सर्बजीत कौर के निर्वासन मामले की सुनवाई जारी, कैबिनेट डिवीजन की रिपोर्ट का इंतज़ार

लाहौर | 6 फरवरी 2026 | नज़राना टाइम्स अली इमरान चट्ठा
 

लाहौर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को भारतीय नागरिक सर्बजीत कौर उर्फ़ नूर हुसैन / नूर फातिमा के उच्च-प्रोफ़ाइल निर्वासन मामले की सुनवाई जारी रखी। सर्बजीत कौर जनवरी की शुरुआत से वीज़ा और इमिग्रेशन उल्लंघन के चलते लाहौर के महिला शेल्टर होम (दार-उल-अमान) में रह रही हैं।
48 वर्षीय सिख महिला सर्बजीत कौर, जो भारत के पंजाब की निवासी हैं, 4 नवंबर 2025 को गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर ननकाना साहिब आई सिख जत्थे के साथ पाकिस्तान पहुंची थीं। उनका वीज़ा 13–14 नवंबर को समाप्त हो गया था, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान में ही रहना जारी रखा। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने इस दौरान इस्लाम धर्म अपनाया, शेखूपुरा निवासी पाकिस्तानी नागरिक नासिर हुसैन से विवाह किया और अपना नाम नूर हुसैन रखा।
वीज़ा अवधि समाप्त होने के बाद पाकिस्तान के फॉरेनर्स एक्ट 1946 के तहत कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने 4 जनवरी 2026 को उन्हें हिरासत में लिया। वाघा-अटारी सीमा के ज़रिए निर्वासन का प्रयास संघीय मंज़ूरियों की कमी और अदालत में लंबित याचिकाओं के कारण टल गया। बाद में उन्हें सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया के लिए दार-उल-अमान भेज दिया गया।

 


सरकारी और अदालती कार्यवाही
सुनवाई के दौरान पंजाब सोशल वेलफेयर और बैत-उल-माल विभाग ने अदालत को बताया कि विशेष एग्ज़िट परमिट या स्पष्ट अदालती आदेश के बिना सर्बजीत कौर को शेल्टर होम से रिहा नहीं किया जा सकता। विभाग ने 4 फरवरी 2026 के पत्र का हवाला देते हुए गृह विभाग से मार्गदर्शन मांगा है।
अदालत को यह भी बताया गया कि गृह मंत्रालय ने 6 जनवरी 2026 को विशेष एग्ज़िट परमिट की मंज़ूरी दे दी थी, लेकिन विभिन्न संघीय विभागों के बीच तालमेल के अभाव में इसे लागू नहीं किया जा सका।
 

अन्य विभागों की प्रतिक्रियाएँ:
• विदेश मंत्रालय: मामले में कोई सीधी भूमिका नहीं, कानूनी निर्वासन पर कोई आपत्ति नहीं
• मानवाधिकार और अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय: कानूनी प्रक्रिया के समर्थन में

• कैबिनेट डिवीजन: कानूनी वकील नियुक्त करने और विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक महीने की मोहलत मांगी
याचिकाकर्ता महेंद्र पाल सिंह के वकील अली चंगेज़ी संधू ने दलील दी कि सर्बजीत कौर की पाकिस्तान में मौजूदगी फॉरेनर्स एक्ट का उल्लंघन है और कानून के तहत तुरंत निर्वासन होना चाहिए।
 मौजूदा स्थिति
लाहौर हाईकोर्ट ने फिलहाल न तो निर्वासन और न ही रिहाई का आदेश दिया है। अदालत ने विभागों के बीच समन्वय जारी रखने की हिदायत दी। कैबिनेट डिवीजन की रिपोर्ट आने तक सर्बजीत कौर दार-उल-अमान में ही रहेंगी।
यह मामला धर्म परिवर्तन, विवाह की वैधता, वीज़ा उल्लंघन और मानवाधिकार जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़ा है और देश-विदेश में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। आगे की सुनवाई कैबिनेट डिवीजन की रिपोर्ट के बाद होगी।

Ali Imran Chattha
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