लोरालाई ऑलिव्स यूएई बाजार में प्रवेश करने वाला पहला पाकिस्तानी और दक्षिण एशियाई EVOO ब्रांड बना

लोरालाई ऑलिव्स यूएई बाजार में प्रवेश करने वाला पहला पाकिस्तानी और दक्षिण एशियाई EVOO ब्रांड बना

दुबई / इस्लामाबाद
रिपोर्ट: अली इमरान चट्ठा
पाकिस्तान की प्रीमियम ऑलिव ऑयल कंपनी “लोरालाई ऑलिव्स” ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में अपने व्यावसायिक संचालन की आधिकारिक शुरुआत कर दी है। इसके साथ ही यह यूएई बाजार में प्रवेश करने वाला पाकिस्तान और पूरे दक्षिण एशिया का पहला एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल (EVOO) ब्रांड बन गया है।
कंपनी का यूएई में विस्तार पाकिस्तान की उस राष्ट्रीय रणनीति के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक कृषि फसलों से हटकर उच्च मूल्य वाले प्रोसेस्ड कृषि निर्यात की ओर बढ़ना है।
निर्यात लक्ष्य और चरणबद्ध विस्तार
लोरालाई ऑलिव्स ने यूएई बाजार में पहले चरण के लिए लगभग 1 लाख डॉलर के निर्यात का लक्ष्य निर्धारित किया है। कंपनी योजनाबद्ध तरीके से अपने निर्यात में वृद्धि करते हुए वर्ष 2026 के अंत तक 5 लाख डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद कर रही है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी ने अमीरात के विभिन्न रिटेल स्टोर्स और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के साथ साझेदारियां पहले ही स्थापित कर ली हैं।
यूएई बाजार का रणनीतिक महत्व
यूएई को अंतरराष्ट्रीय विस्तार के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि वहां 16 लाख से अधिक पाकिस्तानी प्रवासी रहते हैं और यह मध्य पूर्व में ऑलिव ऑयल की खपत वाले सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है। उद्योग से जुड़े अनुमान बताते हैं कि वर्ष 2030 तक यूएई का ऑलिव ऑयल बाजार 404 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता की पहचान
यूएई में लॉन्च से पहले लोरालाई ऑलिव्स ने न्यूयॉर्क इंटरनेशनल  ऑयल प्रतियोगिता (NYIOOC) में सिल्वर अवॉर्ड जीतकर वैश्विक पहचान हासिल की थी। यह सम्मान प्राप्त करने वाला यह पहला पाकिस्तानी और दक्षिण एशियाई एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल ब्रांड बना।
दुनिया भर से आए 1,200 से अधिक उत्पादों के बीच जजों ने इसके उत्कृष्ट रासायनिक और स्वाद गुणों, टिकाऊ उत्पादन प्रक्रिया और आकर्षक पैकेजिंग की विशेष सराहना की।
उत्पादन क्षेत्र और ऑलिव की किस्में
कंपनी पाकिस्तान के तीन अलग-अलग कृषि क्षेत्रों — बलोचिस्तान के लोरालाई पहाड़ी क्षेत्र, पोठोहार पठार और खैबर पख्तूनख्वा — से ऑलिव प्राप्त करती है।
हर क्षेत्र की मिट्टी, ऊंचाई और जलवायु की भिन्नता ऑलिव ऑयल के स्वाद को विशिष्ट बनाती है।
यूएई बाजार के लिए कंपनी “फजर”, “आर्बेक्विना” और “फ्रांतोइओ” सहित कई एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल किस्में लॉन्च कर रही है।
नेतृत्व का विजन
लोरालाई ऑलिव्स के संस्थापक और सीईओ शौकत रसूल ने कहा: “हम दुनिया को उन जगहों और स्वादों से परिचित कराने आए हैं, जिन्हें पहले कभी नहीं जाना गया। लोरालाई की पहाड़ियां, पोठोहार की घाटियां और केपीके के बाग — इन धरतियों की अपनी एक आवाज है और लोरालाई ऑलिव्स उस आवाज को दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम है।”
उन्होंने पहले भी कहा था कि यदि अगले पांच वर्षों में देशभर में लगभग 1 करोड़ फलदार ऑलिव पेड़ लगाए जाएं तो पाकिस्तान 2 अरब डॉलर तक का ऑलिव ऑयल निर्यात कर सकता है।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति और IOC सदस्यता
पाकिस्तान सरकारी स्तर पर चलाए जा रहे ऑलिव वृक्षारोपण अभियानों के माध्यम से तेजी से ऑलिव खेती का विस्तार कर रहा है, ताकि खाद्य तेल आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
मई 2026 में पाकिस्तान आधिकारिक रूप से इंटरनेशनल ऑलिव काउंसिल (IOC) का पूर्ण सदस्य भी बन गया है। इससे पाकिस्तानी एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार ग्रेडिंग, प्रमाणन और व्यापार की सुविधा मिलेगी।
प्रमाणन और टिकाऊ खेती
लोरालाई ऑलिव्स के पास ISO 9001, ISO 22000, HACCP और हलाल सहित कई गुणवत्ता और सुरक्षा प्रमाणपत्र मौजूद हैं।
कंपनी अपने किसानों के नेटवर्क में ड्रिप सिंचाई, ऑर्गेनिक खाद और ऊर्जा-बचत वाली कोल्ड-प्रेस प्रोसेसिंग जैसी टिकाऊ कृषि तकनीकों को बढ़ावा दे रही है।
भविष्य की योजनाएं
यूएई में सफल शुरुआत के बाद लोरालाई ऑलिव्स अब अन्य GCC देशों में भी विस्तार की योजना बना रही है और यूरोपीय वितरकों के साथ बातचीत कर रही है।
इसके अलावा कंपनी चीन में एक कॉर्पोरेट ऑलिव एस्टेट मॉडल पर भी विचार कर रही है, जिसके सफल होने पर सालाना 2 करोड़ डॉलर तक का निर्यात संभव हो सकता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यूएई में लोरालाई ऑलिव्स की एंट्री अन्य पाकिस्तानी वैल्यू-एडेड फूड ब्रांड्स के लिए एक मिसाल बन सकती है, जो अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम बाजारों में अपनी पहचान स्थापित करना चाहते हैं।

Ali Imran Chattha
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