अमेरिका-ईरान शांति समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश तेज, फील्ड मार्शल असीम मुनीर तेहरान रवाना पाकिस्तान के मुख्य मध्यस्थ ईरानी राजधानी पहुंचे, बातचीत निर्णायक मोड़ पर
- इंटरनेशनल
- 22 May, 2026 03:11 PM (Asia/Kolkata)
इस्लामाबाद / तेहरान, शुक्रवार, 22 मई 2026
लेखक: अली इमरान चट्ठा
फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर, चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, शुक्रवार को तेहरान के लिए रवाना हुए। यह दौरा अमेरिका और ईरान के बीच एक बुनियादी समझौता कराने के लिए पाकिस्तान की महीनों से जारी मध्यस्थता मुहिम के अंतिम और सबसे अहम चरण के रूप में देखा जा रहा है।
पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य कमांडर ईरानी राजधानी इस कोशिश के साथ जा रहे हैं कि वाशिंगटन और तेहरान युद्ध समाप्त करने तथा व्यापक समझौते के लिए बातचीत शुरू करने पर सहमत हो सकें। कई दिनों की निचले स्तर की कूटनीतिक बातचीत के बाद उनकी सीधी भागीदारी को इस्लामाबाद की निर्णायक अंतिम कोशिश माना जा रहा है।
मध्यस्थ पक्ष एक लेटर ऑफ इंटेंट पर काम कर रहे हैं, जिसमें युद्धविराम की रूपरेखा और अगले 30 दिनों की बातचीत के लिए सिद्धांत शामिल हो सकते हैं। इस बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा भी शामिल होने की संभावना है।
नाजुक कूटनीतिक मोड़
तेहरान ने पुष्टि की है कि वह युद्ध समाप्त करने के लिए अपनी पेशकश पर वाशिंगटन से मिले ताजा जवाबों की समीक्षा कर रहा है। इसी बीच पाकिस्तान बातचीत में प्रगति के लिए अपनी कोशिशें तेज कर रहा है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि बातचीत एक समझौते और नए सैन्य हमलों के बीच “बॉर्डरलाइन” स्थिति में है। उन्होंने कहा कि अगर सही जवाब नहीं मिले तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं, हालांकि उन्होंने तेहरान को जवाब देने के लिए कुछ और दिन देने की इच्छा भी जताई है।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बातचीत में मामूली प्रगति स्वीकार की है, लेकिन उन्होंने इसे बड़ी सफलता के रूप में पेश करने से परहेज किया है।
शटल कूटनीति के बाद दौरा
फील्ड मार्शल मुनीर के तेहरान दौरे से पहले मंत्री स्तर पर लगातार कूटनीतिक प्रयास किए गए। गृह मंत्री मोहसिन नकवी एक ही सप्ताह में दो बार ईरान गए, जहां उन्होंने दोनों पक्षों के बीच संदेश पहुंचाए और संचार को तेज करने की कोशिश की।
बातचीत से जुड़े अधिकारियों ने माना है कि दोनों राजधानियों के बीच संवाद जारी है, लेकिन जवाबों को तेजी से पहुंचाना अभी भी एक चुनौती बना हुआ है, खासकर वाशिंगटन की बेचैनी के संकेतों को देखते हुए।
विश्लेषकों के अनुसार परमाणु मुद्दा अभी भी सबसे बड़ा अड़ंगा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि परमाणु मुद्दे को मौजूदा बातचीत का हिस्सा बनाया जाए, जबकि ईरान का कहना है कि इस पर बातचीत 30 दिनों की विश्वास निर्माण प्रक्रिया के बाद ही हो सकती है। इस प्रक्रिया में युद्ध का औपचारिक अंत और समुद्री नाकाबंदी हटाना शामिल होगा।
होरमुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर भी दोनों पक्षों में मतभेद कायम हैं। वाशिंगटन तेहरान की इस स्थिति को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूला जाए।
व्यापक बहुपक्षीय ढांचा
पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की इस मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल हैं। इस्लामाबाद की विशेष स्थिति, जिसमें तेहरान के साथ उसके लंबे संबंध और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, फील्ड मार्शल मुनीर तथा ट्रंप प्रशासन के बीच व्यक्तिगत संपर्क शामिल हैं, उसे इस कूटनीतिक ढांचे का केंद्रीय हिस्सा बनाती है।
रिपोर्टों के अनुसार हज सीजन के बाद बातचीत का एक और दौर इस्लामाबाद में होने की संभावना है। इससे पाकिस्तान किसी भी संभावित बुनियादी समझौते के बाद अमल और अगले कदमों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभर सकता है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका
फील्ड मार्शल मुनीर का ताजा दौरा ईरानी नेतृत्व के साथ उनकी लगातार सीधी भागीदारी का हिस्सा है। इससे पहले अप्रैल में तेहरान यात्रा के दौरान उन्होंने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की थी। अराघची ने बातचीत की मेजबानी के लिए पाकिस्तान का धन्यवाद किया और क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए तेहरान की प्रतिबद्धता दोहराई।
आईएसपीआर ने लगातार इन मुलाकातों को ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए जारी मध्यस्थता प्रयासों का हिस्सा बताया है।
लंबी अनिश्चितता के कारण वैश्विक तेल बाजारों में चिंता है और पूरा क्षेत्र हालात पर नजर रखे हुए है। ऐसे माहौल में फील्ड मार्शल मुनीर का तेहरान पहुंचना केवल द्विपक्षीय कूटनीति नहीं, बल्कि दशक के सबसे अहम भू-राजनीतिक टकराव में संभावित मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उनका मिशन वह लेटर ऑफ इंटेंट हासिल कर पाएगा, जिसकी ओर वाशिंगटन और तेहरान कई महीनों से बढ़ रहे हैं।
Leave a Reply