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मानवीय आधार पर सरबजीत कौर का निर्वासन टलने की संभावना

10 Jan, 2026 10:10 PM
मानवीय आधार पर सरबजीत कौर का निर्वासन टलने की संभावना

मानवीय आधार पर सरबजीत कौर का निर्वासन टलने की संभावना
अब नूर फ़ातिमा के नाम से पहचानी जाने वाली भारतीय सिख महिला ने पाकिस्तान में सुरक्षा की मांग की
भारत की ओर से कोई आधिकारिक मांग नहीं, गृह मंत्रालय उच्च-प्रोफ़ाइल धर्मांतरण मामले की समीक्षा में
लाहौर, 10 जनवरी 2026
अली इमरान चट्ठा | नज़राना टाइम्स
 

सरबजीत कौर मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, भारतीय सिख महिला—जो अब नूर हुसैन (नूर फ़ातिमा) के नाम से जानी जाती हैं—को गंभीर मानवीय और सुरक्षा चिंताओं के कारण निकट भविष्य में भारत निर्वासित किए जाने की संभावना कम है।
आधिकारिक और कानूनी सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी अधिकारी उनके निर्वासन को लेकर संकोच में हैं, क्योंकि उन्हें भारत में जान से मारने की धमकियों और मुसलमानों व धर्मांतरित व्यक्तियों के साथ संभावित दुर्व्यवहार का खतरा बताया गया है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने न तो कोई सार्वजनिक बयान जारी किया है और न ही औपचारिक रूप से उनकी वापसी की मांग की है, जिससे तत्काल निर्वासन की संभावना और कम हो गई है।
राज्य मंत्री (गृह) तलाल चौधरी ने कहा है कि इस मामले को पूरी तरह मानवीय आधार पर देखा जा रहा है और संबंधित अधिकारी नूर फ़ातिमा की सुरक्षा, सम्मान और भलाई को प्राथमिकता दे रहे हैं।
निर्वासन के विरुद्ध अनुरोध
सूत्रों के अनुसार, सरबजीत कौर ने पाकिस्तानी अधिकारियों को स्पष्ट रूप से सूचित किया है कि वह भारत वापस नहीं जाना चाहतीं। उन्होंने निर्वासन की स्थिति में अपनी जान और व्यक्तिगत सुरक्षा को गंभीर खतरा बताया है।
दारुल अमान में जीवन
वर्तमान में नूर फ़ातिमा लाहौर के बंड रोड, चौक यतीम खाना के पास स्थित सरकारी शेल्टर होम दारुल अमान में रह रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, वह वहां सहज, सहयोगी और सभी नियमों का पालन कर रही हैं।
शेल्टर प्रशासन के मुताबिक, वह इस्लामी शिक्षा ग्रहण कर रही हैं, अन्य महिलाओं से धार्मिक मार्गदर्शन ले रही हैं और अपने स्वैच्छिक धर्मांतरण के बाद इस्लाम की गहरी समझ विकसित करने में रुचि दिखा रही हैं।
9 जनवरी 2026 को एक विशेष मेडिकल टीम ने उनकी जांच की और उनकी सेहत को संतोषजनक बताया। वह महिला पुलिस की निगरानी में अलग कमरे में सुरक्षा हिरासत में हैं।


पति जांच के दायरे में
उनके पति नासिर हुसैन, जो शेखूपुरा जिले के निवासी हैं, इस समय पुलिस हिरासत में हैं और वीज़ा व आव्रजन उल्लंघन से जुड़े मामलों में जांच का सामना कर रहे हैं। दोनों को 4 जनवरी 2026 को ननकाना साहिब के पास गिरफ्तार किया गया था।
मामले की पृष्ठभूमि
भारतीय पंजाब के कपूरथला जिले के अमनपुर गांव की निवासी सरबजीत कौर 4 नवंबर 2025 को गुरु नानक देव जी की जयंती के अवसर पर सिख तीर्थयात्रियों के जत्थे के साथ पाकिस्तान आई थीं।
हालांकि उनका वीज़ा 13 नवंबर को समाप्त हो गया था, लेकिन उन्होंने 5 नवंबर को इस्लाम धर्म स्वीकार कर नूर हुसैन/फ़ातिमा नाम अपनाया और नासिर हुसैन से विवाह कर पाकिस्तान में ही रुक गईं। बताया जाता है कि दोनों कई वर्षों से सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क में थे।
5 जनवरी को वाघा-अटारी सीमा के रास्ते उन्हें निर्वासित करने का प्रयास किया गया, लेकिन सीमा बंद होने और गृह मंत्रालय द्वारा विशेष निकास अनुमति न दिए जाने के कारण यह प्रक्रिया विफल रही।
कानूनी और कूटनीतिक समीक्षा जारी
लाहौर हाईकोर्ट में इस मामले से संबंधित कई याचिकाएं लंबित हैं। कुछ याचिकाएं वीज़ा उल्लंघन के आधार पर निर्वासन की मांग करती हैं, जबकि अन्य याचिकाओं में इसे स्वैच्छिक धर्मांतरण और विवाह बताते हुए पाकिस्तानी कानून के तहत संरक्षण की मांग की गई है।
10 जनवरी 2026 तक गृह मंत्रालय ने कोई अंतिम निर्णय या यात्रा अनुमति जारी नहीं की है और मामले की कानूनी, मानवीय और कूटनीतिक पहलुओं से समीक्षा जारी है।

Posted By: TAJEEMNOOR KAUR

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