खाद्य नीति में बदलाव की मांग: केवल गेहूं नहीं, पोषण पर ध्यान जरूरी
18 Mar, 2026 12:42 AM
पोषण/SDPI: गेहूं-आधारित नीति से पोषण सुरक्षा ढांचे की ओर बदलाव पर जोर
लाहौर (17 मार्च 2026, नज़राना टाइम्स) अली इमरान चठ्ठा
विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और विकास क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों ने एक परामर्श बैठक में पाकिस्तान की खाद्य नीतियों को गेहूं-आधारित दृष्टिकोण से हटाकर व्यापक पोषण सुरक्षा ढांचे की ओर ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
“इंटीग्रेटेड रोडमैप फॉर सस्टेनेबल फूड सिस्टम्स ट्रांसफॉर्मेशन इन पाकिस्तान” शीर्षक से आयोजित यह बैठक Sustainable Development Policy Institute द्वारा आयोजित की गई, जिसमें United Nations रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर ऑफिस, Food and Agriculture Organization, UNICEF, World Food Programme, World Health Organization और International Fund for Agricultural Development के सहयोग से देशभर में संवाद श्रृंखला का हिस्सा थी।
चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने पर्यावरण, प्रशासन और बाज़ार से जुड़े कई चुनौतियों को उजागर किया। उन्होंने मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट, साइट्रस और आम जैसे फलों की निर्यात गुणवत्ता में कमी, कृषि भूमि का हाउसिंग सोसाइटी में रूपांतरण और आपूर्ति श्रृंखला में 40% तक खाद्य नुकसान पर चिंता जताई।
Dr Sajid Amin (SDPI) ने कहा कि इस परामर्श का उद्देश्य प्रांतीय वास्तविकताओं और स्थानीय ज्ञान को राष्ट्रीय नीति में शामिल करना है।
Sitara Gill (FAO) ने बताया कि कार्यक्रम का लक्ष्य पौष्टिक भोजन की उपलब्धता बढ़ाना, आहार विविधता को बढ़ावा देना और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि देश में अनाज, वसा, तेल और चीनी अधिक मात्रा में उपलब्ध हैं, जबकि फल और सब्जियां अनुशंसित स्तर से काफी कम हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि पर्याप्त कैलोरी होने के बावजूद पोषण स्थिति चिंताजनक है—5 वर्ष से कम उम्र के 40.2% बच्चे अविकसित (स्टंटेड), 28.9% कम वजन और 17.7% कमजोर (वेस्टेड) हैं। 24.3% आबादी खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है, जबकि 43% महिलाओं में एनीमिया पाया जाता है और केवल 27.6% लोग न्यूनतम आहार विविधता प्राप्त कर पाते हैं।
Dr Asim Bashir Khan ने वित्तीय नीतियों में सुधार की आवश्यकता बताते हुए स्वस्थ खाद्य पदार्थों पर सब्सिडी बढ़ाने और करों में कमी की सिफारिश की।
Dr Babar Shahbaz (University of Agriculture Faisalabad) ने कहा कि पाकिस्तान “कैलोरी की अधिकता लेकिन पोषण की कमी” का सामना कर रहा है। उन्होंने पांच स्तंभों पर आधारित सुधार योजना का प्रस्ताव दिया, जिसमें पोषण-संवेदनशील वातावरण, जलवायु-उपयुक्त फसल विविधीकरण, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला, “वन हेल्थ” दृष्टिकोण और डेटा-आधारित शासन शामिल हैं।
Dr Imran Khalid ने कहा कि खाद्य नीति अभी भी गेहूं और चीनी पर केंद्रित है और प्रभावशाली समूह सुधारों में बाधा डालते हैं। उन्होंने सरकार की भूमिका को बाज़ार नियंत्रक के रूप में पुनर्परिभाषित करने का सुझाव दिया।
Dr Khalid Farooq ने भूजल दोहन और पर्यावरणीय चिंताओं पर प्रकाश डाला, जबकि Prof Shanawar Waseem Ali (University of the Punjab) ने किसानों की समस्याओं और बाज़ार सुधारों की आवश्यकता बताई।
Dr Zakir Sial (पंजाब सिंचाई विभाग) ने जल गुणवत्ता और प्रदूषण को खाद्य नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
अंत में Dr Shafqat Munir Ahmed (SDPI) ने कहा कि खाद्य प्रणाली में बदलाव एक जटिल प्रक्रिया है, लेकिन इसका उद्देश्य “गेहूं सुरक्षा” से “पोषण सुरक्षा” की ओर नीति बदलाव करना है।
Posted By: TAJEEMNOOR KAUR








