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IVF व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल : भरोसे का संकट और जवाबदेही की आवश्यकता

17 Jun, 2026 01:06 AM

दिल्ली के एक नामी IVF क्लिनिक के खिलाफ सामने आए कथित भ्रूण अदला-बदली के मामले ने न केवल एक परिवार की दुनिया हिला दी है, बल्कि पूरे देश में IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
गुरुग्राम के एक दंपति ने संतान प्राप्ति की आशा में IVF तकनीक का सहारा लिया। जनवरी 2026 में जुड़वां बच्चियों के जन्म के बाद परिवार में खुशियां थीं, लेकिन बाद में हुई DNA जांच ने उनकी जिंदगी को झकझोर कर रख दिया। आरोप है कि बच्चियां जैविक रूप से उस दंपति की संतान नहीं हैं और संभवतः क्लिनिक स्तर पर भ्रूणों की अदला-बदली हुई है।
यदि जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक चिकित्सीय त्रुटि नहीं होगी, बल्कि मानवीय अधिकारों, माता-पिता की भावनाओं और चिकित्सा नैतिकता का गंभीर उल्लंघन होगा। जिस मां ने नौ महीने तक बच्चे को अपनी कोख में रखा, उसके सामने यह प्रश्न खड़ा होना कि उसका वास्तविक जैविक बच्चा कहां है, किसी भी परिवार के लिए असहनीय पीड़ा है।
यह मामला यह भी दर्शाता है कि भारत में तेजी से बढ़ रहे IVF उद्योग की निगरानी कितनी प्रभावी है। हर वर्ष हजारों परिवार IVF के माध्यम से माता-पिता बनने का सपना पूरा करते हैं और अपना सबसे बड़ा विश्वास इन संस्थानों को सौंपते हैं। ऐसे में यदि नमूनों, भ्रूणों या रिकॉर्ड के प्रबंधन में लापरवाही होती है तो उसके परिणाम अत्यंत गंभीर हो सकते हैं।
आवश्यकता इस बात की है कि देशभर के IVF केंद्रों में सख्त ऑडिट व्यवस्था लागू की जाए। प्रत्येक भ्रूण, प्रत्येक नमूने और प्रत्येक प्रक्रिया की डिजिटल ट्रैकिंग सुनिश्चित की जाए। CCTV निगरानी, बारकोड प्रणाली और स्वतंत्र जांच व्यवस्था को अनिवार्य बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।
यह मामला केवल एक क्लिनिक या एक परिवार का नहीं है। यह उस भरोसे का प्रश्न है जो लाखों परिवार आधुनिक चिकित्सा विज्ञान पर करते हैं। यदि यह भरोसा टूटता है तो इसका प्रभाव पूरे स्वास्थ्य क्षेत्र पर पड़ता है।
अदालत द्वारा जांच के आदेश दिए जाना स्वागतयोग्य कदम है। अब देश की निगाहें इस बात पर हैं कि जांच कितनी निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित ढंग से की जाती है। सच्चाई सामने आनी चाहिए, दोषियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और यदि कोई गलती हुई है तो पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए।
आधुनिक विज्ञान लोगों को आशा देता है, लेकिन यह आशा तभी कायम रह सकती है जब उसकी नींव भरोसे, पारदर्शिता और जवाबदेही पर टिकी हो।

Posted By: GURBHEJ SINGH ANANDPURI

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