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जेल जा चुके पाकिस्तानी मानवाधिकार वकीलों को मिला प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान

17 Jun, 2026 01:23 AM

इस्लामाबाद (नज़राना टाइम्स)

पाकिस्तान की प्रसिद्ध मानवाधिकार वकील ईमान ज़ैनब मज़ारी-हाज़िर और हादी अली चट्ठा को मानवाधिकारों तथा कानून के शासन की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए प्रतिष्ठित लुडोविक ट्रारियू अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

यह पुरस्कार दुनिया के सबसे सम्मानित कानूनी सम्मानों में से एक माना जाता है। इसका नाम फ्रांसीसी वकील और मानवाधिकार समर्थक लुडोविक ट्रारियू के नाम पर रखा गया है। वर्ष 1984 में स्थापित यह पुरस्कार हर साल उन वकीलों को दिया जाता है जिन्होंने व्यक्तिगत जोखिमों का सामना करते हुए भी मौलिक स्वतंत्रताओं की रक्षा के लिए असाधारण साहस का परिचय दिया हो।

ईमान मज़ारी-हाज़िर और हादी अली चट्ठा का चयन जबरन गुमशुदगी, नागरिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा कमजोर और हाशिए पर मौजूद समुदायों के अधिकारों की रक्षा से जुड़े मामलों में उनके व्यापक कानूनी कार्यों के आधार पर किया गया।

दोनों वकीलों ने कई चर्चित मानवाधिकार मामलों में पीड़ितों का पक्ष रखा है और संवैधानिक अधिकारों तथा कानूनी जवाबदेही के प्रबल समर्थक रहे हैं।

इस सम्मान के साथ वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित मानवाधिकार रक्षकों की उस विशिष्ट सूची में शामिल हो गए हैं जिन्हें यह पुरस्कार मिल चुका है। उल्लेखनीय है कि दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद शासन के दौरान जेल में बंद रहते हुए नेल्सन मंडेला को 1985 में इस पुरस्कार का पहला प्राप्तकर्ता चुना गया था।

इस सम्मान को मानवाधिकारों की वकालत और कानूनी पेशे में दोनों वकीलों के योगदान की महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मान्यता के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही यह उन चुनौतियों की ओर भी वैश्विक ध्यान आकर्षित करता है जिनका सामना संवेदनशील मानवाधिकार मामलों पर काम करने वाले वकीलों को करना पड़ता है तथा कानूनी पेशे की स्वतंत्रता की रक्षा के महत्व को रेखांकित करता है।

Posted By: Ali Imran Chattha

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