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करतारपुर साहिब में तीन दिवसीय ज्योति जोत पर्व के धार्मिक आयोजन संपन्न

23 Sep, 2026 01:16 AM

करतारपुर, 22 सितंबर — नज़राना टाइम्स अली इमरान चठ्ठा
श्री गुरु नानक देव जी के 487वें ज्योति जोत पर्व के अवसर पर करतारपुर साहिब स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब में आयोजित तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम मंगलवार को संपन्न हो गए। कार्यक्रम में अखंड पाठ साहिब की समाप्ति, धार्मिक दीवान, गुरबाणी कीर्तन, अरदास और कवि दरबार शामिल रहे।
आयोजन की शुरुआत 20 सितंबर को अखंड पाठ साहिब के आरंभ के साथ हुई। इसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब का निरंतर पाठ किया जाता है। पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों से सिख श्रद्धालु करतारपुर पहुंचे। श्रद्धालुओं के लिए आवास, भोजन, चिकित्सा सहायता, परिवहन और सुरक्षा की व्यवस्था की गई थी।


21 सितंबर को पंज प्यारे के नेतृत्व में गुरुद्वारा दरबार साहिब से भारत-पाकिस्तान जीरो लाइन की ओर नगर कीर्तन निकाला गया। पाकिस्तानी पक्ष में इस नगर कीर्तन का नेतृत्व पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष और पंजाब के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सरदार रमेश सिंह अरोड़ा ने किया।
जीरो लाइन पर श्रद्धालुओं ने रहरास साहिब, गुरबाणी कीर्तन, आरती और अरदास की। अरदास में करतारपुर कॉरिडोर को जल्द खोलने और पाकिस्तान तथा भारत के बीच शांति कायम रहने की प्रार्थना भी शामिल थी।
भारतीय पक्ष में कार्यवाहक अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने डेरा बाबा नानक से जीरो लाइन की ओर एक सिख जत्थे का नेतृत्व किया। निर्धारित स्थान तक पहुंचने से पहले भारतीय सुरक्षा कर्मियों ने समूह को रोक दिया। इसके बाद जत्थेदार और श्रद्धालुओं ने सुरक्षा बैरिकेड के पास रहरास साहिब, शबद कीर्तन और अरदास की तथा कॉरिडोर दोबारा खोलने की प्रार्थना की।

अंतिम दिन अरदास और कवि दरबार का आयोजन
मंगलवार, 22 सितंबर को गुरुद्वारा दरबार साहिब में धार्मिक दीवान जारी रहे। अखंड पाठ साहिब की समाप्ति के बाद अंतिम अरदास और अन्य धार्मिक रस्में अदा की गईं।
तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान करतारपुर में ठहरे सिख श्रद्धालुओं ने ऐतिहासिक गुरुद्वारे में माथा टेकने के बाद अपने घरों की ओर लौटना शुरू किया।
दरबार साहिब में कवि दरबार भी आयोजित किया गया, जिसमें पाकिस्तान और भारत के कवियों ने सूफीवाद, शांति, मानवता तथा बाबा गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं और दर्शन पर आधारित कविताएं प्रस्तुत कीं।
पूरे आयोजन के दौरान लंगर हॉल में श्रद्धालुओं के लिए भोजन और चाय की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चिकित्सा और सुरक्षा दल भी तैनात रहे।
कॉरिडोर खोलने का मुद्दा चर्चा में
इन धार्मिक आयोजनों के दौरान करतारपुर कॉरिडोर का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। कॉरिडोर भारतीय पक्ष से बंद रहने के कारण भारतीय सिख श्रद्धालु इस वर्ष के ज्योति जोत पर्व पर गुरुद्वारा दरबार साहिब नहीं पहुंच सके।
सरदार रमेश सिंह अरोड़ा ने कहा कि पाकिस्तान ने सिख श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 2019 में करतारपुर कॉरिडोर खोला था। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक स्थलों तक पहुंच के समर्थन में पाकिस्तान की घोषित स्थिति को दोहराया।
कार्यवाहक अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने भी कॉरिडोर को दोबारा खोलने की मांग की। उन्होंने कहा कि सिख श्रद्धालुओं को गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर जाने का अवसर मिलना चाहिए, जो गुरु नानक देव जी से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण स्थलों में से एक है।

करतारपुर और गुरु नानक देव जी
गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के अंतिम वर्ष करतारपुर में बिताए। यहां उन्होंने भक्ति, ईमानदार मेहनत, समानता और मानवता की सेवा पर आधारित समुदाय की स्थापना की।
गुरु नानक देव जी ने 22 सितंबर, 1539 को करतारपुर में ज्योति जोत समाई। इसी कारण यह वार्षिक आयोजन सिख श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
उनकी शिक्षाओं में एक ईश्वर, मानव समानता, भेदभाव का विरोध, ईमानदार आजीविका, बांटकर खाने और निस्वार्थ सेवा पर जोर दिया गया। उनकी बाणी श्री गुरु ग्रंथ साहिब का केंद्रीय हिस्सा है।
तीन दिवसीय आयोजन मंगलवार को शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने गुरु नानक देव जी को नमन करने के बाद वापसी की। इस दौरान शांति, धार्मिक स्वतंत्रता और सीमा पार तीर्थयात्रा की बहाली के लिए अरदास की गई।
 

Posted By: Ali Imran Chattha

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