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क्लाइमेट गाला 2026 में आस्था, समावेशिता और युवा नेतृत्व के जरिए जलवायु कार्रवाई पर जोर

29 Oct, 2026 11:42 PM

लाहौर, 29 अक्टूबर 2026: जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी, समावेशी नेतृत्व और रोजमर्रा की जिंदगी में व्यावहारिक बदलाव जरूरी हैं। यही संदेश क्लाइमेट गाला 2026 में दिया गया। बरगद ने अपने ‘फेथ इन एक्शन प्रोजेक्ट’ के तहत यूनिवर्सिटी ऑफ एजुकेशन, लोअर मॉल कैंपस, लाहौर के सहयोग से इन्क्लूसिव क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क (I-CAN) का दूसरा सम्मेलन आयोजित किया। इसमें छात्रों, धार्मिक नेताओं, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं सहित 236 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का उद्देश्य समावेशी और आस्था-आधारित जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाना था।

खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण की प्रांतीय मंत्री सलमा बट ने प्रतिभागियों से टिकाऊ खाद्य आदतें अपनाने, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने और रोजमर्रा की खपत के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने की अपील की। यूनिवर्सिटी ऑफ एजुकेशन, लाहौर के कुलपति प्रो. डॉ. आकिफ अनवर चौधरी ने बदलाव लाने में युवाओं की क्षमता को रेखांकित किया और पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराई।

EP&CCD की उप सचिव अम्बरीन लतीफ ने बरगद की पहल की सराहना की, जबकि HR&MAD के निदेशक मुहम्मद यूसुफ ने पर्यावरणीय जिम्मेदारी और नीतियों के प्रति जागरूकता के महत्व पर जोर दिया।

धार्मिक नेताओं ने साझा पर्यावरणीय जिम्मेदारी पर दिया जोर

“आस्था, नैतिकता और पर्यावरण: एक साझा जिम्मेदारी” विषय पर आयोजित वरिष्ठ पैनल चर्चा में पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

अल्लामा असगर चिश्ती ने प्रकृति की रक्षा से जुड़ी धार्मिक शिक्षाओं को रेखांकित किया। वहीं, रेव. सैमुअल बी. मैसी, प्रो. अशोक कुमार और अन्य धार्मिक प्रतिनिधियों ने पर्यावरण संरक्षण को साझा जिम्मेदारी बताया। ख्वाजा सिरा सोसाइटी की डॉ. सादिया सालार ने कहा कि जलवायु संबंधी फैसलों में वंचित समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

जलवायु कार्यकर्ता शाज़ीन सईद ने ऐसे सामुदायिक समाधानों की जरूरत बताई, जो स्थानीय जरूरतों को सरकारी नीतियों से जोड़ सकें। उन्होंने साझा पर्यावरणीय मूल्यों को व्यावहारिक कदमों में बदलने के महत्व पर भी जोर दिया।

जलवायु नेतृत्व और सामुदायिक समाधानों पर युवाओं की भूमिका

“जलवायु चिंता से जलवायु नेतृत्व तक: युवा कार्यकर्ताओं की भूमिका” विषय पर आयोजित युवा पैनल में वायु प्रदूषण, कचरा प्रबंधन, रावी नदी और हरित उद्यमिता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

पंजाब पर्यावरण संरक्षण एजेंसी की ताहिरा जमील और सुथरा पंजाब के अब्दुल वहाब ने प्रदूषण से होने वाले सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी नुकसान को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री की राष्ट्रीय युवा परिषद की सदस्य रमीन मशहूद ने निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में युवाओं की सार्थक भागीदारी की अपील की।

पर्यावरण कार्यकर्ता अबूज़र मधु ने जलवायु जागरूकता बढ़ाने में कहानी कहने और सामुदायिक भागीदारी की भूमिका पर प्रकाश डाला। ग्रीन रिवायत की संस्थापक असमा आरिफ ने टिकाऊ आजीविका को बढ़ावा देने के लिए पुनर्चक्रण और हरित उद्यमिता को महत्वपूर्ण बताया।

बरगद की अलीज़ा अज़ीज़ ने युवाओं से ऑनलाइन जागरूकता तक सीमित न रहने और अपनी चिंताओं को जमीनी स्तर पर सामुदायिक कार्रवाई में बदलने का आह्वान किया।

विभिन्न समुदायों के बीच सहयोग की अपील

I-CAN की प्रमुख राबिया दार ने साझा मूल्यों को सार्थक पर्यावरणीय कार्रवाई में बदलने के लिए विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच सहयोग बढ़ाने की अपील की।

सम्मेलन में प्रधानमंत्री युवा कार्यक्रम के प्रतिनिधि रिज़वान अनवर और माहा जमील; अबरू फाउंडेशन की नबीहा शकील; एडप्रो कंसल्टेंट्स की अक़्सा ज़हूर; और पैकेजेस की FemCare Embrace में मार्केटिंग प्रमुख सना फातिमा ने भी हिस्सा लिया। इसके अलावा कई शिक्षाविद, पर्यावरण विशेषज्ञ और सामुदायिक प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

I-CAN पुरस्कारों से जलवायु कार्रवाई में योगदान को सम्मान

सम्मेलन के दौरान I-CAN पुरस्कारों के जरिए समावेशी जलवायु कार्रवाई में योगदान देने वाले लोगों और पहलों को सम्मानित किया गया। सहेली और फेमिनिस्ट फ्यूचर लैब्स की डॉ. ज़ैनब अमान को लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाली जलवायु कार्रवाई के लिए I-CAN पुरस्कार प्रदान किया गया।

विशेष मीडिया शाउट-आउट पुरस्कारों के तहत हाफिज़ा असमा को जलवायु शिक्षा को सर्कुलर उद्यमिता से जोड़ने के लिए सम्मानित किया गया। वहीं, बलूचिस्तान की फेरो बार्स से जुड़ी अरफा शान को अतिरिक्त खजूरों के मूल्यवर्धन के जरिए संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सम्मान मिला।

क्लाइमेट गाला 2026 ने स्पष्ट संदेश दिया कि जलवायु संरक्षण के लिए केवल जागरूकता पर्याप्त नहीं है। इसके लिए व्यावहारिक समाधान अपनाने, वंचित समुदायों की आवाज को शामिल करने, युवाओं को सशक्त बनाने और पर्यावरण की रक्षा के लिए विभिन्न धर्मों तथा संस्थानों के बीच साझेदारी मजबूत करने की जरूरत है।

Posted By: Ali Imran Chattha

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