भारतीय सिख श्रद्धालुओं ने तीर्थ यात्रा पूरी कर लाहौर पहुंचे

भारतीय सिख श्रद्धालुओं ने तीर्थ यात्रा पूरी कर लाहौर पहुंचे

29 जून को होगा महाराजा रणजीत सिंह की पुण्यतिथि का मुख्य समारोह, 30 जून को भारत लौटेंगे सिख श्रद्धालु
लाहौर –अली इमरान चट्ठा
महाराजा रणजीत सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित धार्मिक समारोहों में भाग लेने के लिए 21 जून को वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान पहुंचे भारतीय सिख श्रद्धालुओं ने विभिन्न पवित्र गुरुद्वारों के दर्शन पूरे कर लिए हैं और अब लाहौर पहुंचकर गुरुद्वारा डेरा साहिब में ठहरे हुए हैं।

इस वर्ष की यात्रा विशेष महत्व रखती है क्योंकि एक वर्ष के अंतराल के बाद यह तीर्थयात्रा दोबारा शुरू हुई है। पिछले वर्ष पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव के कारण शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) ने यात्रा स्थगित कर दी थी। वर्ष 2026 में यात्रा की बहाली को सद्भाव और धार्मिक सौहार्द का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
इस यात्रा का आयोजन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (DSGMC) के सहयोग से किया गया। एसजीपीसी द्वारा 302 श्रद्धालुओं के लिए वीज़ा आवेदन भेजे गए थे, जिनमें से 290 को अनुमति मिली।

श्रद्धालु दो जत्थों में पाकिस्तान पहुंचे, जहां उनका स्वागत इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (PSGPC) के अधिकारियों ने किया। स्वागत समारोह में ईटीपीबी के चेयरमैन क़मर-उज़-ज़मान, अतिरिक्त सचिव श्राइंस नासिर मुश्ताक, डिप्टी सेक्रेटरी सैयद फ़राज़ अब्बास, पीएसजीपीसी के प्रधान एवं पंजाब के अल्पसंख्यक एवं मानवाधिकार मंत्री सरदार रमेश सिंह अरोड़ा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
श्रद्धालुओं ने अपने दस दिवसीय प्रवास के दौरान ननकाना साहिब स्थित गुरुद्वारा जन्म अस्थान, फ़ारूकाबाद का गुरुद्वारा सच्चा सौदा, हसन अब्दाल का गुरुद्वारा पंजा साहिब, करतारपुर दरबार साहिब तथा एमीनाबाद के गुरुद्वारा रोहरी साहिब सहित कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों में माथा टेका।
डीएसजीएमसी और एसजीपीसी के प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान सरकार की ओर से किए गए स्वागत और प्रबंधों की सराहना करते हुए धार्मिक स्वतंत्रता और अंतरधार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देने के प्रयासों की प्रशंसा की।

अधिकारियों के अनुसार महाराजा रणजीत सिंह की पुण्यतिथि का मुख्य समारोह 29 जून को लाहौर स्थित गुरुद्वारा डेरा साहिब में आयोजित होगा। धार्मिक कार्यक्रमों के समापन के बाद सभी भारतीय सिख श्रद्धालु 30 जून को वाघा सीमा के रास्ते भारत लौटेंगे।
ईटीपीबी ने श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा, आवास, परिवहन, लंगर, चिकित्सा सुविधा, पेयजल, अतिरिक्त एयर कंडीशनर, जनरेटर तथा रेस्क्यू 1122 की एंबुलेंस सहित व्यापक प्रबंध किए हैं।
ईटीपीबी चेयरमैन क़मर-उज़-ज़मान ने बताया कि पंजाब में इस समय 17 ऐतिहासिक गुरुद्वारे श्रद्धालुओं के लिए खुले हैं, जबकि लगभग 50 अन्य गुरुद्वारों के संरक्षण और पुनर्स्थापन का कार्य जारी है।
अतिरिक्त सचिव श्राइंस नासिर मुश्ताक ने कहा कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना ईटीपीबी की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सरदार रमेश सिंह अरोड़ा ने कहा कि पाकिस्तान सरकार अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों और कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बड़ी संख्या में युवा सिख श्रद्धालुओं की भागीदारी को अपनी धार्मिक विरासत से उनके गहरे जुड़ाव का प्रतीक बताया।

Ali Imran Chattha
Ali Imran Chattha
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