राजनीतिक भूचाल: 9 मई हिंसा में पीटीआई नेताओं को भारी सज़ाएं

राजनीतिक भूचाल: 9 मई हिंसा में पीटीआई नेताओं को भारी सज़ाएं

लाहौर 12 अगस्त अली इमरान चठ्ठा

पाकिस्तान  तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। लाहौर की एंटी-टेररिज़्म कोर्ट (एटीसी) ने सोमवार को 9 मई 2023 के विरोध प्रदर्शनों में भूमिका के आरोप में कई वरिष्ठ नेताओं को लंबी जेल सज़ाएं सुनाई।

पूर्व विदेश मंत्री और पीटीआई उपाध्यक्ष शाह महमूद क़ुरैशी को दो बड़े मामलों में बरी कर दिया गया। वहीं डॉ. यास्मीन राशिद, सीनेटर एजाज़ चौधरी, पूर्व पंजाब गवर्नर उमर सरफ़राज़ चीमा, पूर्व प्रांतीय मंत्री मियां महमूद-उर-रशीद, आयशा अली भुट्टा, इमरान ख़ान के सुरक्षा गार्ड हाफ़िज़ मोहम्मद अरशद और कई अन्य को 10 साल की कैद की सज़ा सुनाई गई।

पीटीआई सांसद अलीया हमज़ा मालिक और कार्यकर्ता सनम जावेद को 5 साल की कैद की सज़ा हुई। आरोपों में आगज़नी और सरकारी संपत्ति पर हमला शामिल था। मामले की सुनवाई 31 जुलाई 2025 को पूरी हुई थी।

इससे पहले, फैसलाबाद की विशेष एटीसी ने 9 मई की हिंसा के मामलों में 108 पीटीआई कार्यकर्ताओं को 10 साल की कैद की सज़ा सुनाई थी। इनमें उमर अय्यूब ख़ान, शिबली फ़राज़ और ज़रताज गुल जैसे नाम शामिल हैं। सबूतों की कमी के कारण 77 लोगों को बरी कर दिया गया। चुनाव आयोग ने सज़ायाफ़्ता नेताओं को सार्वजनिक पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आगामी आम चुनाव से पहले पीटीआई की नेतृत्व क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर कर सकता है। अपील की संभावना है, लेकिन तात्कालिक असर गहरा होगा।