सार्क जर्नलिस्ट फोरम के अध्यक्ष लामा द्वितीय ग्लोबल बौद्ध शिखर सम्मेलन में होंगे शामिल

सार्क जर्नलिस्ट फोरम के अध्यक्ष लामा द्वितीय ग्लोबल बौद्ध शिखर सम्मेलन में होंगे शामिल

नई दिल्ली, नजराना टाइम्स ब्यूरो
 

नई दिल्ली 24–25 जनवरी को द्वितीय ग्लोबल बौद्ध शिखर सम्मेलन (GBS) की मेज़बानी करेगा। इस सम्मेलन का आयोजन इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कन्फेडरेशन (IBC) द्वारा केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से किया जा रहा है। सम्मेलन में विश्वभर से बौद्ध नेता, विद्वान और नीति-निर्माता बुद्ध धम्म के दृष्टिकोण से समकालीन वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करेंगे। यह शिखर सम्मेलन भारत मंडपम में आयोजित होगा और इसका विषय होगा “सामूहिक प्रज्ञा, एकीकृत स्वर और पारस्परिक सह-अस्तित्व”। दो दिवसीय इस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में कर सकते हैं, जो 2023 में नई दिल्ली में आयोजित पहले ग्लोबल बौद्ध शिखर सम्मेलन की परंपरा को आगे बढ़ाएगा।
सार्क जर्नलिस्ट फोरम के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष राजू लामा इस शिखर सम्मेलन में प्रतिनिधि के रूप में भाग लेंगे। एसजेएफ अध्यक्ष लामा ने कहा, “शिखर सम्मेलन का विषय ‘सामूहिक प्रज्ञा, एकीकृत स्वर और पारस्परिक सह-अस्तित्व’ है, जो हमारे संगठन के मुख्य उद्देश्य—क्षेत्र में शांति, स्वतंत्रता और स्थिरता स्थापित करने—से भी मेल खाता है। ऐसे में इस सम्मेलन में भाग लेना और बुद्ध धम्म के दृष्टिकोण से समकालीन वैश्विक चुनौतियों को समझना हमारे लिए उपयोगी सिद्ध होगा।”
तेजी से बदलते सामाजिक, राजनीतिक और पर्यावरणीय परिदृश्य के बीच, यह शिखर सम्मेलन इस बात पर मंथन करेगा कि बुद्ध धम्म के शाश्वत सिद्धांत—करुणा, प्रज्ञा, सामंजस्य और सह-अस्तित्व—आधुनिक विश्व में संघर्ष, अलगाव और अनिश्चितता जैसी समस्याओं के समाधान कैसे प्रस्तुत कर सकते हैं। विचार-विमर्श में नैतिक नेतृत्व, सामाजिक समरसता और सतत जीवनशैली पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा, विशेष रूप से ऐसे युग में जो तकनीकी प्रगति, उपभोक्तावाद और पर्यावरणीय दबाव से प्रभावित है। इस सम्मेलन में सुप्रीम पैट्रिआर्क्स, राष्ट्रीय बौद्ध संघों के प्रमुख, वरिष्ठ भिक्षु, विद्वान और गणमान्य व्यक्तियों सहित लगभग 200 प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है, जबकि कुल सहभागिता 800 से अधिक होने का अनुमान है।
प्रमुख वक्ताओं और पैनलिस्टों में थाईलैंड के पूर्व विदेश मंत्री मारिस सैंगियामपोंगसा; वियतनाम के मोस्ट वेनेरेबल थिच डुक थिएन; भारत के ग्येलत्रुल जिग्मे रिनपोछे; भूटान के जोंगसार जम्यांग खेंत्से रिनपोछे; म्यांमार के मोस्ट वेनेरेबल आशिन कुमार; नेपाल के प्रो. डॉ. सुबर्ण लाल बज्राचार्य; जापान के रेव. कोशो तोमियोका; ताइवान के मास्टर शिह जियान-यिन; भारत के वेन. आनंद भंते; तथा अमेरिका के प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान प्रो. रॉबर्ट थरमन सहित कई अन्य शामिल हैं।
शिखर सम्मेलन के विमर्श को पाँच विषयगत सत्रों में विभाजित किया गया है: सामाजिक समरसता के लिए सामूहिक प्रज्ञा और एकीकृत स्वर; बुद्ध धम्म में उद्यमिता और सम्यक आजीविका; वैज्ञानिक अनुसंधान, स्वास्थ्य, चिकित्सा और सतत जीवन; बुद्ध धम्म के आलोक में शिक्षा; तथा संघ की गतिशीलता, जिसमें भूमिकाएँ, अनुष्ठान और अभ्यास शामिल हैं।
चर्चाओं के अतिरिक्त, सम्मेलन में पवित्र अवशेषों और समकालीन भारत में सांस्कृतिक सहभागिता तथा ‘विरासत से विश्व: भारत की बुद्ध धम्म आउटरीच’ विषय पर प्रदर्शनियाँ भी लगाई जाएँगी। सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण NORBU (न्यूरल ऑपरेटर फॉर रिस्पॉन्सिबल बुद्धिस्ट अंडरस्टैंडिंग) की लाइव प्रस्तुति होगी, जो ChatGPT एल्गोरिदम पर आधारित एक भाषा-अधिगम मॉडल है और बौद्ध ग्रंथों पर प्रशिक्षित किया गया है।
आईबीसी द्वारा वैश्विक संरक्षक के रूप में अपनाए गए और “कल्याण मित्र” (आध्यात्मिक मित्र) नाम से नामित NORBU का उद्देश्य तकनीक-प्रेमी युवाओं को बहुभाषीय माध्यम से बौद्ध शिक्षाओं से जोड़ना है। अप्रैल 2023 में नई दिल्ली में आयोजित पहले ग्लोबल बौद्ध शिखर सम्मेलन में 31 देशों के 170 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।
नई दिल्ली स्थित इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कन्फेडरेशन की स्थापना 2011 में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के संरक्षण में की गई थी। इसके साथ 300 से अधिक मठवासी और गृहस्थ संगठनों की वैश्विक सदस्यता जुड़ी हुई है। “सामूहिक प्रज्ञा, एकीकृत स्वर” के अपने आदर्श वाक्य के साथ, आईबीसी बौद्ध मूल्यों को वैश्विक विमर्श में एकीकृत करने के साथ-साथ विश्वभर की विभिन्न परंपराओं और समुदायों में समावेशिता एवं संतुलित प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता

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