कराची से हिंदू तीर्थयात्री भारत रवाना, फैसलाबाद में सिख जत्थे को रोका गया

कराची से हिंदू तीर्थयात्री भारत रवाना, फैसलाबाद में सिख जत्थे को रोका गया

लाहौर | नज़राना टाइम्स अली इमरान चठ्ठा
पाकिस्तान के हिंदू तीर्थयात्रियों के दो समूह इस सप्ताह कराची से भारत रवाना हुए, जबकि 92 सदस्यों वाला एक सिख जत्था फैसलाबाद हवाई अड्डे पर फंसा रहा। दोनों मामलों के अलग-अलग नतीजों ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक यात्राओं को सुविधाएं देने के तरीके पर सवाल और भेदभाव के आरोप खड़े किए हैं।
84 हिंदू तीर्थयात्री 15 सितंबर को एतिहाद एयरवेज की उड़ान से कराची से अबू धाबी रवाना हुए। वहां से उन्हें आगे दिल्ली जाना था। इसके एक दिन बाद 118 तीर्थयात्रियों का दूसरा समूह उड़ान EY293 से रवाना हुआ। यह विमान 16 सितंबर को दोपहर लगभग 12:05 बजे कराची से अबू धाबी के लिए उड़ा।
आयोजकों के अनुसार, दोनों समूह मध्य प्रदेश के अशोकनगर स्थित श्री आनंदपुर आश्रम जा रहे हैं।
उनकी यात्रा सिख तीर्थयात्रियों के अनुभव से अलग रही। अधिकारियों के मुताबिक, श्री हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा के लिए वैध भारतीय वीजा रखने वाले सिख जत्थे को 11 सितंबर को फैसलाबाद में रोक दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि वापसी टिकट और आवश्यक मंजूरियों सहित कुछ यात्रा दस्तावेजों को लेकर विवाद के कारण उन्हें आगे जाने नहीं दिया गया।

'छिपा हुआ हाथ’, PTI नेता का आरोप
अल्पसंख्यक मामलों के पूर्व पंजाब संसदीय सचिव और PTI नेता सरदार महिंदर पाल सिंह ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। एक वीडियो संदेश में उन्होंने एक अज्ञात “छिपे हुए हाथ” पर तीर्थयात्रियों की यात्रा में बाधा डालने का आरोप लगाया और कहा कि यदि गतिरोध जारी रहा तो वह जिम्मेदार लोगों की पहचान उजागर करेंगे।
नज़राना टाइम्स से बात करते हुए सिंह ने दोनों समूहों के अनुभवों में कथित असमानता की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि हिंदू तीर्थयात्रियों को सरकार और मंदिर प्रबंधन का पूरा सहयोग मिला था। उन्होंने सवाल किया कि सिख तीर्थयात्रियों को इसी तरह की सुविधा क्यों नहीं दी गई।
उन्होंने अधिकारियों से जत्थे को आगे जाने की अनुमति देने की अपील की, ताकि यह मामला विभिन्न समुदायों के बीच संबंधों में और तनाव न बढ़ाए। सिंह ने यह भी कहा कि हिंदू जत्था वाघा-अटारी सीमा के रास्ते पाकिस्तान लौटेगा।
अरोड़ा ने भेदभाव के आरोप खारिज किए, दस्तावेजों का दिया हवाला
पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (PSGPC) के अध्यक्ष सरदार रमेश सिंह अरोड़ा, जो पंजाब के अल्पसंख्यक मामलों और मानवाधिकार मंत्री भी हैं, ने भेदभाव के आरोपों को खारिज किया।
अरोड़ा ने कहा कि सिख तीर्थयात्रियों को अनिवार्य वापसी टिकट और अन्य जरूरी यात्रा दस्तावेज नहीं होने के कारण रोका गया था। उन्होंने कहा कि यह PSGPC के किसी फैसले के कारण नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का सिख तीर्थयात्रियों की यात्रा में सुविधा देने का लगातार रिकॉर्ड रहा है और इस विशेष यात्रा के आगे न बढ़ पाने पर उन्होंने खेद जताया। उनके मुताबिक, संघीय जांच एजेंसी और आव्रजन अधिकारियों ने सभी यात्रियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा कि आवश्यक शर्तें पूरी की जातीं तो नतीजा अलग हो सकता था।
अरोड़ा ने कहा, “तीर्थयात्रियों को रोकने में PSGPC की कोई भूमिका नहीं थी।” उन्होंने कहा कि इस मामले पर कमेटी के आधिकारिक बयान रिकॉर्ड में मौजूद हैं।
अधिकारियों ने भी जत्थे को रोकने के आधार के रूप में वापसी टिकटों की कमी का उल्लेख किया। अरोड़ा के अनुसार, एयरलाइन कर्मचारियों ने बोर्डिंग पास जारी करने से इनकार कर दिया क्योंकि जत्थे के सदस्य एयरलाइन की यात्रा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर रहे थे।

नियमों के समान इस्तेमाल पर सवाल
कराची और अबू धाबी के रास्ते हिंदू तीर्थयात्रियों के रवाना होने से भारत जाने वाले अल्पसंख्यक धार्मिक समूहों पर पाकिस्तान के यात्रा नियमों के इस्तेमाल की और जांच-पड़ताल की मांग उठी है।
अधिकारी सिख मामले को दस्तावेजों की कमी बताते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि अलग-अलग नतीजे नियमों के समान इस्तेमाल पर सवाल उठाते हैं। उनके अनुसार, दो अल्पसंख्यक समुदाय भारत जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
इस घटनाक्रम ने एक अहम सवाल खड़ा किया है: क्या यात्रा संबंधी आवश्यकताएं सभी पर समान रूप से लागू की जा रही हैं, या अलग-अलग समुदायों के मामलों में अधिकारियों का विवेक अलग तरह से इस्तेमाल होता है?
दोनों मामले सामने आने के बाद इस्लामाबाद पर घटनाक्रम की परिस्थितियों को स्पष्ट करने का दबाव बढ़ रहा है।

Ali Imran Chattha
Ali Imran Chattha
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