केपी सिख आनंद कारज बिल 2026 विधायी प्रक्रिया में आगे बढ़ा, सिख विवाहों के लिए व्यापक कानूनी ढांचे का प्रस्ताव
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- (Asia/Kolkata)
पेशावर (नज़राना टाइम्स) — खैबर पख्तूनख्वा में सिख विवाहों को व्यापक कानूनी मान्यता और पंजीकरण व्यवस्था प्रदान करने के उद्देश्य से प्रस्तावित सिख आनंद कारज बिल 2026 विधायी प्रक्रिया में एक और चरण आगे बढ़ा है। सांसदों, सरकारी अधिकारियों, सिख समुदाय के प्रतिनिधियों और मानवाधिकार संस्थाओं ने बिल के प्रमुख प्रावधानों, मौजूदा स्थिति और इसे प्रांतीय विधानसभा में पेश किए जाने से पहले बाकी प्रक्रियाओं की समीक्षा की।
इस संबंध में बैठक का आयोजन खैबर पख्तूनख्वा विधानसभा के पार्लियामेंट्री कॉकस ऑन माइनॉरिटीज ने ब्लू वीन्स और नेशनल कमीशन फॉर ह्यूमन राइट्स (NCHR) के सहयोग से किया।

बैठक में प्रांतीय विधानसभा के सदस्यों, अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधियों, प्रांतीय सरकार और विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों, NCHR, नागरिक समाज और मीडिया के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
1909 के कानून से अधिक व्यापक होगा नया ढांचा
बैठक में बताया गया कि प्रस्तावित कानून एक सदी से अधिक पुराने आनंद मैरिज एक्ट 1909 की तुलना में काफी व्यापक कानूनी ढांचा प्रदान करेगा। 1909 का कानून मुख्य रूप से सिख आनंद कारज परंपरा के अनुसार संपन्न विवाहों को कानूनी मान्यता देने से संबंधित था।
प्रस्तावित प्रांतीय कानून में आनंद कारज संपन्न कराने, विवाह का अनिवार्य पंजीकरण और प्रमाणपत्र जारी करने, वैवाहिक अधिकारों एवं दायित्वों, विवाह की अमान्यता, वैवाहिक संबंध समाप्त करने, सुलह, भरण-पोषण, बच्चों की अभिरक्षा तथा सिख विवाहों की कानूनी मान्यता से संबंधित विस्तृत प्रावधान शामिल हैं।
आनंद कारज सिख धर्म की पारंपरिक विवाह पद्धति है, जिसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की हजूरी में चार लावां के साथ विवाह संपन्न किया जाता है।
बिल अभी विधानसभा में पेश होना बाकी
पारिवारिक कानूनों के लिए स्थानीय सरकार के फोकल पर्सन मुहम्मद सईद-उर-रहमान ने प्रतिभागियों को बिल की वर्तमान स्थिति और आगे की विधायी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।
कानून विभाग द्वारा समीक्षा के बाद बिल को कैबिनेट कमेटी ऑन लेजिस्लेशन के पास भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने पर इसे प्रांतीय कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा और कैबिनेट की स्वीकृति के बाद विचार के लिए खैबर पख्तूनख्वा विधानसभा में पेश किया जाएगा।

इसलिए यह अभी प्रस्तावित बिल है और कानून के रूप में लागू नहीं हुआ है।
दोनों पक्षों के लिए न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष
प्रस्तावित बिल के तहत विवाह के लिए दोनों पक्षों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है। विवाह के लिए दोनों की स्वतंत्र और पूर्ण सहमति आवश्यक होगी।
बल, धोखाधड़ी, दबाव, गलत जानकारी या अनुचित प्रभाव के माध्यम से प्राप्त सहमति को वैध नहीं माना जाएगा।
बिल में सिख विवाहों का अनिवार्य पंजीकरण करने और स्थानीय सरकार, चुनाव एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से आनंद कारज रजिस्ट्रारों को लाइसेंस देने का भी प्रावधान प्रस्तावित है।
वैवाहिक अधिकारों और पारिवारिक मामलों के लिए कानूनी व्यवस्था
प्रस्तावित कानून विवाह में दोनों पक्षों के समान अधिकारों और दायित्वों का प्रावधान करता है, जिसमें आपसी सम्मान, सहयोग और भरण-पोषण शामिल हैं।
इसके साथ ही हिंसा, दबाव और दुर्व्यवहार से सुरक्षा तथा सुलह और वैवाहिक संबंध समाप्त करने के लिए कानूनी व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।
वैवाहिक मामलों से जुड़े विवादों पर फैमिली कोर्ट को अधिकार क्षेत्र देने का भी प्रावधान है।
सिख समुदाय की लंबे समय से चली आ रही जरूरत
पार्लियामेंट्री कॉकस ऑन माइनॉरिटीज के चेयरपर्सन और प्रांतीय विधानसभा सदस्य अस्कर परवेज ने कहा कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य सिख समुदाय को उसकी धार्मिक परंपराओं और व्यावहारिक जरूरतों के अनुरूप स्पष्ट और प्रभावी कानूनी ढांचा उपलब्ध कराना है।
कॉकस के वाइस चेयरपर्सन और प्रांतीय विधानसभा सदस्य गुरपाल सिंह ने कहा कि सिख समुदाय लंबे समय से ऐसे ढांचे की प्रतीक्षा कर रहा है, जो आनंद कारज को धार्मिक विवाह परंपरा के रूप में मान्यता देने के साथ पंजीकरण, दस्तावेजीकरण और वैवाहिक मामलों के लिए व्यावहारिक कानूनी व्यवस्था भी उपलब्ध कराए।
आनंद कारज प्रमाणपत्र होगा विवाह का कानूनी सबूत
प्रस्तावित बिल के तहत पंजीकृत आनंद कारज को कानूनी और नागरिक उद्देश्यों के लिए वैध विवाह माना जाएगा।
इससे विरासत, उत्तराधिकार, भरण-पोषण, अभिभावकत्व, बच्चों की कानूनी स्थिति, पारिवारिक पंजीकरण और पहचान दस्तावेजों से जुड़े मामलों में कानूनी मान्यता मिलेगी।
आनंद कारज प्रमाणपत्र को अदालतों, न्यायाधिकरणों, सार्वजनिक प्राधिकरणों और सरकारी संस्थानों के समक्ष विवाह के प्रमाण के रूप में स्वीकार करने का भी प्रावधान है।
प्रस्तावित कानून लागू होने से पहले संपन्न हुए सिख विवाहों के पंजीकरण की व्यवस्था भी मसौदे में शामिल है। कानून लागू होने के बाद प्रांतीय सरकार को 120 दिनों के भीतर इसके कार्यान्वयन के लिए नियम बनाने होंगे।

सिख समुदाय से परामर्श जारी रखने पर जोर
NCHR के प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रभावी व्यक्तिगत और पारिवारिक कानून धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए कानून के समक्ष समानता, गरिमा और अपने अधिकारों के व्यावहारिक इस्तेमाल से सीधे जुड़े हैं।
ब्लू वीन्स के प्रोग्राम मैनेजर और बिल की ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य कमर नसीम ने कहा कि तकनीकी प्रक्रिया का उद्देश्य सिख समुदाय की चिंताओं और व्यावहारिक जरूरतों को कानूनी रूप से स्पष्ट और प्रशासनिक रूप से लागू किए जा सकने वाले ढांचे में बदलना है।
प्रतिभागियों ने बिल की बाकी विधायी प्रक्रिया और बाद में नियम तैयार करते समय सिख धार्मिक एवं सामुदायिक प्रतिनिधियों के साथ लगातार परामर्श की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि पूरे खैबर पख्तूनख्वा में विवाह पंजीकरण की व्यवस्था व्यावहारिक और आसानी से सुलभ हो सके।
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